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चार फीडरों से बिजली सप्लाई ठप
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तावडू। ‘म्हार गांव-जगमग गांव’ योजना पर करोड़ों रुपये खर्च कर ग्रामीण आंचल की बिजली आपूर्ति व्यवस्था का दावा थोड़ी देर की बूंदाबांदी में ध्वस्त हो गया। रविवार शाम को इलाके में हुई बूंदाबांदी से ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली आपूर्ति करने वाले चार फीडर ठप हो गए। जिसकी वजह से कई गांव अंधेरे में डूब गए। सोमवार सुबह 11 बजे तक बिजली न आने से जलापूर्ति भी बाधित रही। दिन में बिजली सप्लाई दोबारा चालू की गई।
योजना के तहत उपमंडल के गांवों में लाइनें, ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरण बदलकर नए लगाए जा रहे हैं। कई फीडरों में काम पूरा भी हो भी चुका है, लेकिन बिजली की आपूर्ति व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आ रहा। बिजली विभाग के अधिकारी कोई न कोई तकनीकी आड़ लेकर पल्ला झाड़ लेते हैं। रविवार रात बिजली खराबी के कारण अधिकांश गांव अंधेरे में डूबे रहे। मामूली बूंदाबांदी में सालाका, बिस्सर, सिलखो व राठीवाश आरडीएस फीडरों की सप्लाई रात 8 बजे ठप हो गई। कुछ फीडरों के सर्किट स्विच काटकर लाइनमैनों ने इतिश्री कर ली। कई फीडर रातभर बंद पड़े रहे। बिजली गुल रहने से जलापूर्ति भी नहीं हो पाई।
गुणवत्तापूर्ण तरीके से नहीं हो रहा काम
गांव सालाका सरपंच सुमेर, मालाका गांव के सरपंच हसन, धुलावत गांव निवासी निसार, पढेनी निवासी रामसिंह, नम्बरदार खुर्शीद, रकुमुदीन, सिलखो निवासी रईस, शेर मोहम्मद, मसीत निवासी सम्मा, जेकम, चीला निवासी जुबेर, आबिद, चिलावली निवासी जमालुद्दीन, साहिर आदि ग्रामीणों ने बताया कि सरकार ने म्हारा गांव-जगमग गांव योजना के अंतर्गत गांवों में नई लाइनें, ट्रांसफार्मर, पोल आदि उपकरणों के बदलने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। ग्रामीण उपभोक्ताओं को सुचारू रूप से बिजली मिल सके। गुणवत्तापूर्ण तरीके से कार्य नहीं होने के कारण इन दावों की पोल थोड़ी हवा व बूंदाबांदी में बिजली गुल होते ही खुल जाती है। रविवार शाम थोड़ी बूंदाबांदी के कारण बिजली गुल हो गई जो सोमवार 11 बजे तक सुचारू नहीं हो पाए। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी शाम होते ही अपने घरों को निकल जाते है। जिसकी वजह से लाइनमैन भी मनमानी करते है। जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण उपभोक्ताओं ने निगम के उच्चाधिकारियों से समस्या पर ध्यान देने की मांग की है।
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गांवों में बिजली ठप होने की सूचना नहीं है। मामले में संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की जाएगी।
- पीके चौहान, सुप्रीडेंट ऑफ इंजीनियर, विद्युत विभाग
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योजना के तहत उपमंडल के गांवों में लाइनें, ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरण बदलकर नए लगाए जा रहे हैं। कई फीडरों में काम पूरा भी हो भी चुका है, लेकिन बिजली की आपूर्ति व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आ रहा। बिजली विभाग के अधिकारी कोई न कोई तकनीकी आड़ लेकर पल्ला झाड़ लेते हैं। रविवार रात बिजली खराबी के कारण अधिकांश गांव अंधेरे में डूबे रहे। मामूली बूंदाबांदी में सालाका, बिस्सर, सिलखो व राठीवाश आरडीएस फीडरों की सप्लाई रात 8 बजे ठप हो गई। कुछ फीडरों के सर्किट स्विच काटकर लाइनमैनों ने इतिश्री कर ली। कई फीडर रातभर बंद पड़े रहे। बिजली गुल रहने से जलापूर्ति भी नहीं हो पाई।
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गुणवत्तापूर्ण तरीके से नहीं हो रहा काम
गांव सालाका सरपंच सुमेर, मालाका गांव के सरपंच हसन, धुलावत गांव निवासी निसार, पढेनी निवासी रामसिंह, नम्बरदार खुर्शीद, रकुमुदीन, सिलखो निवासी रईस, शेर मोहम्मद, मसीत निवासी सम्मा, जेकम, चीला निवासी जुबेर, आबिद, चिलावली निवासी जमालुद्दीन, साहिर आदि ग्रामीणों ने बताया कि सरकार ने म्हारा गांव-जगमग गांव योजना के अंतर्गत गांवों में नई लाइनें, ट्रांसफार्मर, पोल आदि उपकरणों के बदलने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। ग्रामीण उपभोक्ताओं को सुचारू रूप से बिजली मिल सके। गुणवत्तापूर्ण तरीके से कार्य नहीं होने के कारण इन दावों की पोल थोड़ी हवा व बूंदाबांदी में बिजली गुल होते ही खुल जाती है। रविवार शाम थोड़ी बूंदाबांदी के कारण बिजली गुल हो गई जो सोमवार 11 बजे तक सुचारू नहीं हो पाए। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी शाम होते ही अपने घरों को निकल जाते है। जिसकी वजह से लाइनमैन भी मनमानी करते है। जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण उपभोक्ताओं ने निगम के उच्चाधिकारियों से समस्या पर ध्यान देने की मांग की है।
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गांवों में बिजली ठप होने की सूचना नहीं है। मामले में संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की जाएगी।
- पीके चौहान, सुप्रीडेंट ऑफ इंजीनियर, विद्युत विभाग