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पोंजी स्कीम के नाम पर 100 करोड़ से अधिक रुपये ठगे

Sun, 06 Oct 2019 01:15 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 06 Oct 2019 01:15 AM IST
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ponji scheme fraud
पोंजी स्कीम के नाम पर 100 करोड़ से अधिक रुपये ठगे
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नोएडा। पोंजी स्कीम के नाम पर 100 करोड़ से अधिक की ठगी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने सेक्टर-20 थाने में मामला दर्ज कराया है। लुभावने ऑफर देकर जालसाज लोगों को निशाना बना रहे थे। फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर हर माह 4 से 10 फीसदी तक के रिटर्न का झांसा देते थे। पिछले दो साल में सबसे ज्यादा लोग इससे जुड़े हैं।

पुलिस के अनुसार, दिल्ली के एक अस्पताल में अनिल कुमार कार्यरत हैं। आरोप है कि इनके साथ अस्पताल में ही नर्सिंग असिस्टेंट का काम करने वाले राजेश ने 2016 में फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश कराने वाली कंपनी न्यू एरा वेल्थ मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के बारे में बताया था। इस कंपनी का नोएडा सेक्टर-18 के चौखानी स्क्वायर में ऑफिस था। कंपनी को महेंद्र वर्मा व सुशील वर्मा नाम के दो भाइयों ने जून 2014 में शुरू किया था। 2016 में इससे काफी संख्या में लोग जुड़ने लगे थे। जालसाजों ने पोंजी स्कीम के माध्यम से लोगों को ज्यादा से ज्यादा जोड़कर अच्छा मुनाफा मिलने का लालच दिया था। इसके बाद दो साल में कई स्कीम के जरिये परिवार के लोगों से पैसे लेकर कुल 55 लाख रुपये तक लगा दिए। इसमें से केवल 2018 तक केवल डेढ़ लाख रुपये तक ही रिटर्न मिले। एक व्यक्ति ने 45 लाख रुपये का भी निवेश किया है। इसके बाद दिसंबर 2018 से ही कंपनी के सभी लोग भाग निकले। अब ऑफिस भी बंद है। उसके बाद से जालसाज रुपये लौटाने का झांसा देकर लगातार समय मांग रहे थे। कई महीने बीतने के बाद अब सेक्टर-20 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। ठगी के शिकार हुए पीड़ितों का आरोप है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में दोनों भाई महेंद्र वर्मा व सुशील वर्मा के साथ इनके पिता चरण सिंह, अस्पताल का पूर्व कर्मी राजेश के अलावा मंजू व अन्य चार लोग भी शामिल हैं। इन लोगों ने कुछ साल में 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी के अलावा हवाला कारोबार से भी जुड़े हैं। इन लोगों ने फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर एक वेबसाइट भी बनाई थी जो एक साल से ज्यादा समय से बंद है। वहीं, मामले की जांच कर रहे अधिकारी राघवेंद्र कुमार ने बताया कि कंपनी में डेढ़ साल से ज्यादा समय से ही आरोपियों ने आना बंद कर दिया और दिसंबर 2018 में ऑफिस भी बंद कर दिया। इसके बाद भी पीड़ितों से बात करके उनके बारे में पता लगाया जा रहा है।
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