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Noida News: एम्स-आरएमएल में मनाया गया पीएमआर दिवस
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डॉक्टर-मरीज के बीच हुआ संवाद, बताया कैसे रह सकते हैं स्वस्थ
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एम्स और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में रविवार को राष्ट्रीय शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास (पीएमआर) दिवस मनाया गया। इस दौरान डॉक्टरों और मरीजों में संवाद हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि कैसे भविष्य में होने वाली समस्याओं को कम किया जा सकता है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें दिव्यांगों के लिए व्यावसायिक मार्गदर्शन सत्र, आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए ग्रुप डिस्कशन और सहारा देने वाली बैठकों का आयोजन हुआ। वहीं, एम्स के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग ने कार्यक्रम आयोजित कर मरीजों को आत्मनिर्भर होने की जानकारी दी। विभाग के प्रमुख डॉ. प्रोफेसर संजय वाधवा ने कहा कि ऊंचाई से गिरने, चोट लगने सहित दूसरे कारणों में पीएमआर विभाग की जरूरत बढ़ी है। अस्पताल में ऐसे मरीज आते हैं जिन्हें जल्द ठीक करने के लिए एआई सहित अन्य तकनीकों का सहारा लिया जाता है। वहीं, विभाग की प्रोफेसर डॉ गीता हांडा ठुकराल ने बताया कि ऊंचाई से गिरने, सड़क दुर्घटना के कारण लोगों में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी की समस्याएं बढ़ी हैं। ऐसे कार्यक्रम के माध्यम से मरीजों को जागरूक करने के साथ उनके परिवार को विशेष जानकारी दी जा सकती है जिससे भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोका जा सकता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एम्स और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में रविवार को राष्ट्रीय शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास (पीएमआर) दिवस मनाया गया। इस दौरान डॉक्टरों और मरीजों में संवाद हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि कैसे भविष्य में होने वाली समस्याओं को कम किया जा सकता है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें दिव्यांगों के लिए व्यावसायिक मार्गदर्शन सत्र, आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए ग्रुप डिस्कशन और सहारा देने वाली बैठकों का आयोजन हुआ। वहीं, एम्स के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग ने कार्यक्रम आयोजित कर मरीजों को आत्मनिर्भर होने की जानकारी दी। विभाग के प्रमुख डॉ. प्रोफेसर संजय वाधवा ने कहा कि ऊंचाई से गिरने, चोट लगने सहित दूसरे कारणों में पीएमआर विभाग की जरूरत बढ़ी है। अस्पताल में ऐसे मरीज आते हैं जिन्हें जल्द ठीक करने के लिए एआई सहित अन्य तकनीकों का सहारा लिया जाता है। वहीं, विभाग की प्रोफेसर डॉ गीता हांडा ठुकराल ने बताया कि ऊंचाई से गिरने, सड़क दुर्घटना के कारण लोगों में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी की समस्याएं बढ़ी हैं। ऐसे कार्यक्रम के माध्यम से मरीजों को जागरूक करने के साथ उनके परिवार को विशेष जानकारी दी जा सकती है जिससे भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोका जा सकता है।
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