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Noida News: खेत-खलिहान में कर दी प्लाटिंग, फिर वहीं बन गईं कॉलोनियां

Mon, 13 Oct 2025 01:08 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 13 Oct 2025 01:08 AM IST
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Plotting was done in the fields and barns, then colonies were built there.
रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के लोढ़ी गांव में  भूमि प्लाटिंग। संवाद
सोनभद्र। नगर में अवैध काॅलोनियों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से खेती की जमीन पर प्लाटिंग कर नई कॉलाेनियां बसाई जा रही है। कुछ साल पहले तक जहां खेत-खलिहान थे, अब वहां कॉलोनियां आबाद हो चुकी हैं। पिछले दस साल में नगर के चारों तरफ डेढ़ दर्जन से ज्यादा कॉलोनियां बन गई हैं लेकिन सरकारी दस्तावेज में इनका कोई उल्लेख नहीं है।
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वर्ष 2022 तक रॉबर्ट्सगंज नगर पालिका का क्षेत्र काफी छोटा था। यहां की कुल आबादी महज 50 हजार थी। नगर पालिका अपनी सीमा अंदर होने वाले निर्माण कार्यों पर नजर रखती थी। आसपास के ग्रामीण इलाकों में निगरानी न होने के कारण तेजी से अवैध कॉलोनियां बनती गईं। उरमौरा, छपका, लोढ़ी, बढ़ौली, पकरी, सहजौर, सहिजन, रौंप, बभनौली, बिच्छी आदि गांवाें में के खेतों में कॉलोनियां आबाद हो चुकी हैं। इन इलाकों में 30 हजार से ज्यादा की आबादी रह रही है। इन कॉलोनियों में रहने वाले बिजली, पानी, सड़क, जलनिकासी जैसी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
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राजस्व और रजिस्ट्री विभाग की मिलीभगत से चल रहा खेल
नई कॉलोनी बसाने से पहले भूमि का स्वरूप बदलवाना (धारा-80) पड़ता है। खेती की जमीन को आवासीय और व्यावसायिक उपयोग करने से पहले इस प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी है। लेकिन प्लाटिंग का कारोबार कर रहे लोग इस प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे। राजस्व और रजिस्ट्री विभाग की मिलीभगत से वह किसानों से एकमुश्त भूमि का अनुबंध करते हैं। रजिस्ट्री के दौरान कृषि भूमि होने के कारण सर्किल रेट और स्टांप शुल्क कम लगता है। इसके बाद जमीन पर प्लाट बनाकर बेच दिए जाते हैं। कागज में जमीन खेती की है, लेकिन वहां कॉलोनियां आबाद हो गई हैं।
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विनियमित क्षेत्र बेखबर, प्रशासन भी बेपरवाह
तेजी से बढ़ती कॉलोनियां भविष्य के लिए चुनौती बन रही हैं। जिला मुख्यालय के निकाय व आसपास के क्षेत्र में इस तरह बेतरतीब बसावट पर निगरानी के लिए ही विनियमित क्षेत्र का गठन किया गया था। कर्मचारियों की कमी और कार्य के बोझ से तले विभाग नए इलाकों में हो रही मनमानी प्लाटिंग से बेखबर है। तहसील प्रशासन भी बेपरवाह बना हुआ है।
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इन इलाकों में गायब हो गए खेत
प्लाटिंग और अवैध कॉलोनियों की बसावट सबसे ज्यादा जिला मुख्यालय से सटे गांवों में है। उरमौरा से लोढ़ी के बीच कुछ साल पहले तक मौजूद खेत अब प्लाट में तब्दील हो चुके हैं। छपका, सहिजन, रौंप गांवाें में भी प्लाटिंग जोरों पर है।
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कोट-
गांव के आसपास प्लाटिंग हो रही है। टुकड़ों में जमीन बेचकर कॉलोनी बसाई जा रही है। इसका असर मूल निवासियों पर पड़ रहा है। बेतरतीब बसावट के चलते उन्हें सुविधाएं भी नहीं मिल पा रहीं। -शमशेर बहादुर सिंह, लोढ़ी।
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अच्छी सुविधाओं की उम्मीद में कॉलोनी में घर बनवाया था, मगर अब तक सड़क भी नहीं बनाई गई। जगह-जगह तार और खंभे लटक रहे हैं। यहां के लोग सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। -विवेक कुमार मिश्र, उरमौरा।
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अवैध तरीके से कॉलोनी बसाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों ने जमीन खरीदकर घर बनवा लिए। सुविधा नहीं मिलेगी होगी तो पीड़ा होगी ही। इस पर शुरू से निगरानी की जानी चाहिए। - महावीर सिंह, उरमौरा।

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वर्जन...
अवैध कॉलोनियों का रिकॉर्ड नहीं है, मगर जो भी इलाके नगर में शामिल हुए हैं, वहां जनसुविधाओं के विकास की योजना बनाई जा रही है। विकास के कार्य कराए जा रहे हैं। इन इलाकों को पूरी तरह विकसित होने में थोड़ा वक्त लगेगा। -मुकेश चौधरी, ईओ नगर पालिका।
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