{"_id":"5d28e8fa8ebc3e6cee20aaeb","slug":"plastic-waste-will-be-used-in-road-construction-noida-news-noi4488150182","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोएडा में प्लास्टिक कचरे से बनेगी सड़क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोएडा में प्लास्टिक कचरे से बनेगी सड़क
विज्ञापन
नोएडा में अब प्लास्टिक कचरे से बनेगी सड़क
नोएडा। अब नोएडा में भी सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे का उपयोग होगा। नोएडा प्राधिकरण ट्र्रायल के तौर पर नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे के सर्विस लेन पर ऐसी दो किमी लंबी सड़क का निर्माण कराएगा। सड़क निर्माण के लिए जुटाए गए मैटेरियल में चार फीसदी मैटेरियल प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल होगा। अहम है कि इससे पहले बंगलूरू और लखनऊ में इस तरह के प्रयोग किया जा चुके हैं।
प्लास्टिक कचरे के निस्तारण को लेकर नोएडा प्राधिकरण लगातार कवायद कर रहा है। इसी कड़ी में सड़क निर्माण कार्य के दौरान इसके उपयोग की योजना बनाई गई। उच्चाधिकारियों को योजना से अवगत करा दिया गया है और प्रस्ताव की संस्तुति के लिए भेजा गया है। योजना के मुताबिक नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे के दो किलोमीटर लंबे कैरेजवे के निर्माण में इसके उपयोग का प्रस्ताव दिया गया है।
दो से तीन एमएम छोटे टुकड़े का होगा उपयोग
अधिकारियों के मुताबिक प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा करने के बाद उसके दो से तीन मिलीमीटर के टुकड़े किए जाएंगे। इसके बाद इसे निर्माण सामग्री में मिला दिया जाएगा। कुल निर्माण सामग्री में इसकी मात्रा चार प्रतिशत तक होगी।
विज्ञापन
प्लास्टिक के उपयोग से सड़क की मजबूती का दावा
अधिकारियों की मानें तो सड़क निर्माण सामग्री में प्लास्टिक के उपयोग से इसकी मजबूती बढ़ेगी। अधिकारियों का तो यहां तक दावा है कि सामान्य सड़कों के निर्माण के तीन से चार वर्ष के बाद मरम्मत की जरूरत पड़ती है। वहीं प्लास्टिक कचरे को मिलाकर बनाई गई सड़क की मररमत की जरूरत 7 से 8 वर्ष तक नहीं पड़ेगी। सड़क पर बारिश का पानी का भी असर नहीं के बराबर होगा।
12 प्रतिशत तक बढ़ेगी लागत
सड़क निर्माण सामग्री में प्लास्टिक कचरे के उपयोग से बनाई जाने वाली सड़क का बजट करीब 10 से 12 फीसदी तक
बढ़ जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि प्रोसेसिंग की वजह से निर्माण की लागत बढ़ेगी।
प्रयोग सफल रहा तो पूरे नोएडा में होगा लागू
अधिकारियों के मुताबिक प्रयोग सफल रहा तो पूरे नोएडा की सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। हॉट इन प्लेस री-साइकिलिंग पद्धति से सड़क बनाने के दौरान प्लास्टिक कचरे के उपयोग की योजना बनाई जाएगी। इससे सड़क की ऊंचाई नहीं बढ़ेगी और जलभराव जैसी समस्या से लोगों को निजात मिलेगी।
अक्तूबर में शुरू होगा एक्सप्रेसवे के रिसर्फेसिंग का काम
प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे के रिसर्फेसिंग का काम अक्तूबर में शुरू होगा। इसका टेंडर 25 जुलाई तक जारी किया जाएगा। इसका बजट करीब 60 करोड़ रुपये होगा। इसमें जीरो माइल से 10 किलोमीटर और 10 से 20 किलोमीटर तक सड़क की री-सर्फेसिंग का काम होगा। इसे ढाई माह में पूरा कर दिया जाएगा। प्राधिकरण हर वर्ष सड़कों के रिसर्फेसिंग पर 1000 करोड़ रुपये खर्च करता है।
एसटीपी के पानी से बनेगी बिजली
अगले चरण में एसटीपी के पानी से बिजली बनाने की एक योजना पर काम चल रहा है। एसबीआर टेक्नोलॉजी पर आधारित एसटीपी का निर्माण होगा। इससे बिजली बनाई जाएगी।
विज्ञापन
नोएडा। अब नोएडा में भी सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे का उपयोग होगा। नोएडा प्राधिकरण ट्र्रायल के तौर पर नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे के सर्विस लेन पर ऐसी दो किमी लंबी सड़क का निर्माण कराएगा। सड़क निर्माण के लिए जुटाए गए मैटेरियल में चार फीसदी मैटेरियल प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल होगा। अहम है कि इससे पहले बंगलूरू और लखनऊ में इस तरह के प्रयोग किया जा चुके हैं।
प्लास्टिक कचरे के निस्तारण को लेकर नोएडा प्राधिकरण लगातार कवायद कर रहा है। इसी कड़ी में सड़क निर्माण कार्य के दौरान इसके उपयोग की योजना बनाई गई। उच्चाधिकारियों को योजना से अवगत करा दिया गया है और प्रस्ताव की संस्तुति के लिए भेजा गया है। योजना के मुताबिक नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे के दो किलोमीटर लंबे कैरेजवे के निर्माण में इसके उपयोग का प्रस्ताव दिया गया है।
विज्ञापन
दो से तीन एमएम छोटे टुकड़े का होगा उपयोग
अधिकारियों के मुताबिक प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा करने के बाद उसके दो से तीन मिलीमीटर के टुकड़े किए जाएंगे। इसके बाद इसे निर्माण सामग्री में मिला दिया जाएगा। कुल निर्माण सामग्री में इसकी मात्रा चार प्रतिशत तक होगी।
विज्ञापन
प्लास्टिक के उपयोग से सड़क की मजबूती का दावा
अधिकारियों की मानें तो सड़क निर्माण सामग्री में प्लास्टिक के उपयोग से इसकी मजबूती बढ़ेगी। अधिकारियों का तो यहां तक दावा है कि सामान्य सड़कों के निर्माण के तीन से चार वर्ष के बाद मरम्मत की जरूरत पड़ती है। वहीं प्लास्टिक कचरे को मिलाकर बनाई गई सड़क की मररमत की जरूरत 7 से 8 वर्ष तक नहीं पड़ेगी। सड़क पर बारिश का पानी का भी असर नहीं के बराबर होगा।
12 प्रतिशत तक बढ़ेगी लागत
सड़क निर्माण सामग्री में प्लास्टिक कचरे के उपयोग से बनाई जाने वाली सड़क का बजट करीब 10 से 12 फीसदी तक
बढ़ जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि प्रोसेसिंग की वजह से निर्माण की लागत बढ़ेगी।
प्रयोग सफल रहा तो पूरे नोएडा में होगा लागू
अधिकारियों के मुताबिक प्रयोग सफल रहा तो पूरे नोएडा की सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। हॉट इन प्लेस री-साइकिलिंग पद्धति से सड़क बनाने के दौरान प्लास्टिक कचरे के उपयोग की योजना बनाई जाएगी। इससे सड़क की ऊंचाई नहीं बढ़ेगी और जलभराव जैसी समस्या से लोगों को निजात मिलेगी।
अक्तूबर में शुरू होगा एक्सप्रेसवे के रिसर्फेसिंग का काम
प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे के रिसर्फेसिंग का काम अक्तूबर में शुरू होगा। इसका टेंडर 25 जुलाई तक जारी किया जाएगा। इसका बजट करीब 60 करोड़ रुपये होगा। इसमें जीरो माइल से 10 किलोमीटर और 10 से 20 किलोमीटर तक सड़क की री-सर्फेसिंग का काम होगा। इसे ढाई माह में पूरा कर दिया जाएगा। प्राधिकरण हर वर्ष सड़कों के रिसर्फेसिंग पर 1000 करोड़ रुपये खर्च करता है।
एसटीपी के पानी से बनेगी बिजली
अगले चरण में एसटीपी के पानी से बिजली बनाने की एक योजना पर काम चल रहा है। एसबीआर टेक्नोलॉजी पर आधारित एसटीपी का निर्माण होगा। इससे बिजली बनाई जाएगी।