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Noida News: डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज
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सत्र अदालत ने एसीजेए-2 कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। नोएडा के सेक्टर-46 निवासी ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता पीयूष दत्त कौशिक ने पहले एसीजेएम-2 गौतमबुद्ध नगर की अदालत में सेक्टर-46 स्थित सुपर स्पेशियलिटी विनोद आई सेंटर की संचालक डॉ. श्वेता गोयल के खिलाफ चिकित्सा लापरवाही के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी।
एसीजेएम-2 कोर्ट ने 2 जनवरी 2026 को यह आवेदन खारिज करते हुए कहा था कि इसमें डॉक्टर, पुलिस अधिकारियों और अन्य विषयों से जुड़े आरोप उलझे हुए ढंग से पेश किए गए हैं। इसी आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सेशन कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। सत्र अदालत ने आदेश में कहा कि रेलवे टिकट जैसे दस्तावेज मूल एफआईआर के मुकदमे में याचिकाकर्ता के बचाव के लिए उपयोगी हो सकते हैं। मगर केवल इनके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि डॉक्टर ने जानबूझकर झूठी सूचना दी। इसी तरह आरटीआई जवाब में किसी दस्तावेज के न मिलने से यह साबित नहीं होता कि घटना हुई ही नहीं। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए एसीजेएम-2 कोर्ट का आदेश यथावत बरकरार रखा।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। नोएडा के सेक्टर-46 निवासी ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता पीयूष दत्त कौशिक ने पहले एसीजेएम-2 गौतमबुद्ध नगर की अदालत में सेक्टर-46 स्थित सुपर स्पेशियलिटी विनोद आई सेंटर की संचालक डॉ. श्वेता गोयल के खिलाफ चिकित्सा लापरवाही के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी।
एसीजेएम-2 कोर्ट ने 2 जनवरी 2026 को यह आवेदन खारिज करते हुए कहा था कि इसमें डॉक्टर, पुलिस अधिकारियों और अन्य विषयों से जुड़े आरोप उलझे हुए ढंग से पेश किए गए हैं। इसी आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सेशन कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। सत्र अदालत ने आदेश में कहा कि रेलवे टिकट जैसे दस्तावेज मूल एफआईआर के मुकदमे में याचिकाकर्ता के बचाव के लिए उपयोगी हो सकते हैं। मगर केवल इनके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि डॉक्टर ने जानबूझकर झूठी सूचना दी। इसी तरह आरटीआई जवाब में किसी दस्तावेज के न मिलने से यह साबित नहीं होता कि घटना हुई ही नहीं। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए एसीजेएम-2 कोर्ट का आदेश यथावत बरकरार रखा।
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