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महंगी किताबें खरीदने की मजबूरी, स्कूलों में लगी निजी प्रकाशकों की किताबें
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महंगी किताबें खरीदने की मजबूरी, एनसीईआरटी की 1000, निजी प्रकाशकों की 7000 रुपये है किताबों की कीमत
रबूपुरा। शिक्षा विभाग में कमीशन खोरी के चलते पुस्तक विक्रेताओं ने अभिभावकों की जेब फिर से काटनी शुरू कर दी है। निजी स्कूलों की मिलीभगत से निजी प्रकाशक महंगी किताबें बेचकर अभिभावकों की जेब पर डाका डाल रहे हैं। इस बार भी अधिकतर स्कूलों में एनसीईआरटी की जगह मनमाने प्रकाशक की किताबें लगाई जा रही हैं। एनसीईआरटी कोर्स की किताबें जहां 1000 रुपये में मिल रही हैं। वहीं, निजी प्रकाशन की पुस्तकों का मूल्य 7 से 8 हजार रुपये है।
प्रत्येक छात्र को शिक्षा का अधिकार के लिए सरकार ने एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) की किताबें लगाने के आदेश जारी किए थे। लेकिन सरकार के सख्त निर्देश के बावजूद भी अधिकारी व स्कूल प्रबंधन निजी प्रकाशकों के साथ मिलकर कमीशन खोरी का खेल खेल रहे हैं। निजी प्रकाशकों पर शिकंजा कसने के दावों के मध्य निजी स्कूलों की मनमानी, कमीशन खोरी एवं जिम्मेदार अफसरों की उदासीनता के कारण नई शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लगाए जाने का अनिवार्य नियम मखौल बनकर रह गया है। सूत्रों की माने तो एनसीईआरटी की अपेक्षा निजी प्रकाशन की किताबों की कोई कीमत निर्धारित नहीं है। सत्र शुरू होने से पहले ही स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को किताब विक्रेताओं के नाम की चिट देनी शुरू कर दी है। निजी स्कूलों ने कमीशन के चलते कॉपियों पर भी स्कूल का नाम प्रकाशित करा दिया गया है। इससे कॉपियों की कीमत तीन गुनी तक हो गई है। अभिभावकों का आरोप है कि इसमें शिक्षा विभाग की मिलीभगत है। वह स्कूलों पर कार्रवाई के बजाय आंखें मूंदे देखता रहता है।
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रबूपुरा। शिक्षा विभाग में कमीशन खोरी के चलते पुस्तक विक्रेताओं ने अभिभावकों की जेब फिर से काटनी शुरू कर दी है। निजी स्कूलों की मिलीभगत से निजी प्रकाशक महंगी किताबें बेचकर अभिभावकों की जेब पर डाका डाल रहे हैं। इस बार भी अधिकतर स्कूलों में एनसीईआरटी की जगह मनमाने प्रकाशक की किताबें लगाई जा रही हैं। एनसीईआरटी कोर्स की किताबें जहां 1000 रुपये में मिल रही हैं। वहीं, निजी प्रकाशन की पुस्तकों का मूल्य 7 से 8 हजार रुपये है।
प्रत्येक छात्र को शिक्षा का अधिकार के लिए सरकार ने एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) की किताबें लगाने के आदेश जारी किए थे। लेकिन सरकार के सख्त निर्देश के बावजूद भी अधिकारी व स्कूल प्रबंधन निजी प्रकाशकों के साथ मिलकर कमीशन खोरी का खेल खेल रहे हैं। निजी प्रकाशकों पर शिकंजा कसने के दावों के मध्य निजी स्कूलों की मनमानी, कमीशन खोरी एवं जिम्मेदार अफसरों की उदासीनता के कारण नई शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लगाए जाने का अनिवार्य नियम मखौल बनकर रह गया है। सूत्रों की माने तो एनसीईआरटी की अपेक्षा निजी प्रकाशन की किताबों की कोई कीमत निर्धारित नहीं है। सत्र शुरू होने से पहले ही स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को किताब विक्रेताओं के नाम की चिट देनी शुरू कर दी है। निजी स्कूलों ने कमीशन के चलते कॉपियों पर भी स्कूल का नाम प्रकाशित करा दिया गया है। इससे कॉपियों की कीमत तीन गुनी तक हो गई है। अभिभावकों का आरोप है कि इसमें शिक्षा विभाग की मिलीभगत है। वह स्कूलों पर कार्रवाई के बजाय आंखें मूंदे देखता रहता है।
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