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20 से अधिक ऑपरेशन टले, 500 मरीज मायूस लौटे

Tue, 25 Feb 2020 02:00 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 25 Feb 2020 02:00 AM IST
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Over 20 opration denaied, 500 patients returned
नोएडा जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड।
20 से अधिक ऑपरेशन टले, 500 मरीज मायूस लौटे
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नोएडा। सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में बीते पांच दिनों से चल रही 56 पैरामेडिकल स्टाफ और 45 सुरक्षा गार्डों की हड़ताल से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। ये संविदा कर्मी बकाया वेतन के भुगतान और 15 डाटा ऑपरेटर को बिना नोटिस दिए कार्य मुक्त करने के विरोध में हड़ताल कर रहे हैं। इसका असर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पताल में 10 ओटी टेक्नीशियन में से 8 हड़ताल में शामिल हैं। ऐसे में दो ही टेक्नीशियन ही काम संभाल रहे हैं। सोमवार को जिला अस्पताल में करीब 50 ऑपरेशन होने थे। लेकिन, कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से 20 से ज्यादा ऑपरेशन टाल दिए गए। वहीं, ओपीडी में पहुंचने वाले लगभग दो हजार से अधिक मरीजों में से करीब 500 को मायूस लौटना पड़ा। साथ ही इमरजेंसी भी रही। अस्पताल की सीएमएस डॉ. वंदना शर्मा का कहना है कि हड़ताल की वजह से ऑपरेशन प्रभावित हुए हैं। स्थिति को संभालने के लिए चिकित्सकों को समय से पहले ओटी पहुंचकर ज्यादा से ज्यादा ऑपरेशन करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि अस्पताल में हर दिन ढाई से तीन हजार मरीज आते हैं। अस्पताल की मांग पर प्राधिकरण ने संविदा कर्मचारियों को नियुक्त किया था। अस्पताल में पैथोलॉजी लैब, ईसीजी, एक्स-रे, ऑपरेशन थियेटर और इमरजेंसी समेत सभी विभाग संविदा के कर्मचारियों के भरोसे ही चल रहे हैं।
पर्चा बनवाने के लिए करनी पड़ी मशक्कत
रविवार को छुट्टी के बाद सोमवार को मरीजों की भीड़ से जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं गड़बड़ा गईं। वहीं, चिकित्सकों समेत मरीज बेहाल रहे। हड़ताल के कारण मरीजों को पर्चा बनवाने में दो से तीन घंटे तक लाइन में खड़े रहना पड़ा। इसके बाद भी कई लोगों का पर्चा नहीं बन पाया। समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। जिन मरीजों के पर्चे बन गए, उन्हें भी चिकित्सकों से मुलाकात करने अपनी समस्या बताने के लिए मारामारी करनी पड़ी। इससे ओपीडी में धक्का-मुक्की का माहौल बना रहा। वहीं, कई मरीजों को बिना इलाज के ही मायूस लौटना पड़ा।
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नहीं करा पाए जांच
जिला अस्पताल में संविदा कर्मियों की हड़ताल का असर मरीजों की जांच पर भी पड़ रहा है। हड़ताल की वजह से एक्स-रे, ईसीजी, ब्लड जांच, लीवर, यूरिन समेत विभिन्न प्रकार जांच करवाने के लिए भी मरीज भटकते रहे। लैब में कर्मचारियों के नहीं होने से उन्हें निजी लैब का सहारा लेना पड़ा। जबकि कई तो बगैर जांच कराए ही लौट गए। मरीजों का कहना है कि कर्मियों की हड़ताल से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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दो घंटे से रजिस्ट्रेशन काउंटर पर खड़ी हूं, लेकिन अभी तक पर्चा नहीं बन पाया है। अस्पताल में पैर रखने की तक की जगह नहीं है।
- मीरा सिंह
अस्पताल में कोई कर्मचारी नजर ही नहीं आ रहा है। जहां भी जा रहे हैं, सारे विभाग बंद हैं। हड़ताल से मरीजों को परेशानी हो रही है।
- जगेंद्र
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