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Noida News: किसान बनकर आबादी भूखंड मांग रहे थे बाहरी निवेशक, 52 मामले पकड़े
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- जमीन खरीदकर खुद को किसान बताने वालों की खुली पोल, यमुना प्रधिकरण की जांच में हुआ खुलासा
- 88 मामलों की जांच में सिर्फ 13 शिफ्टिंग के योग्य
अतुल भारद्वाज
ग्रेटर नोएडा। यमुना सिटी में आबादी भूखंड हासिल करने के लिए जमीन खरीदकर खुद को स्थानीय किसान बताने वाले बाहरी निवेशकों की हेराफेरी सामने आई है। यमुना प्राधिकरण (यीडा) की जांच में ऐसे 52 मामले पकड़े गए हैं जिनमें आवेदक स्थानीय निवासी नहीं थे। वहीं 23 मामलों में अधिसूचना जारी होने के बाद निर्माण कराने या मौके पर निर्माण नहीं होने की बात सामने आई है। कुल 88 मामलों की जांच में सिर्फ 13 को ही भूखंड शिफ्टिंग के योग्य पाया गया है। प्राधिकरण अब नियमों के विपरीत लाभ लेने की कोशिश करने वालों पर कार्रवाई की तैयारी में है। ऐसे लोगों को आबादी भूखंड नहीं दिए जाएंगे।
अधिकारियों ने बताया कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में विकास योजनाएं शुरू होने के बाद जमीन की बढ़ती कीमतों और आबादी भूखंड पाने की उम्मीद में बाहरी लोगों ने कृषि भूमि खरीदी थी। इसके बाद कुछ निवेशकों ने खुद को काश्तकार बताते हुए आबादी भूखंड की मांग की। कुछ ने मौके पर अस्थायी निर्माण कर उसे पुराना बताने का दावा भी किया ताकि उन्हें किसानों को मिलने वाले लाभ मिल सकें। अब प्राधिकरण दस्तावेज के सत्यापन और सैटेलाइट डाटा के आधार पर इन दावों की जांच कर रहा है।
सैटेलाइट डाटा से हुआ दावों का खुलासा
प्राधिकरण के फेज-1 में शामिल 30 गांवों के 88 मामलों में भूखंड शिफ्टिंग की मांग की गई थी। सामान्य तौर पर सड़क या अन्य विकास कार्य के लिए किसी भूखंड की जमीन जरूरी होने पर प्रभावित व्यक्ति को दूसरी जगह भूखंड दिया जाता है। इन मामलों में वर्ष 2010 से 2012 के सैटेलाइट डाटा और स्थानीय निवासी होने से जुड़े दस्तावेज का सत्यापन किया गया। जांच में 52 आवेदक स्थानीय निवासी नहीं पाए गए। इसके अलावा 23 मामलों में अधिसूचना के बाद निर्माण होने या निर्माण नहीं होने की स्थिति सामने आई। इस तरह कुल 75 मामले शिफ्टिंग के लिए उपयुक्त नहीं पाए गए, जबकि केवल 13 मामलों को पात्र माना गया।
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नोएडा एयरपोर्ट : नौकरी के लिए 184 ने किया आवेदन
सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि नोएडा एयरपोर्ट पर नौकरी के लिए 184 युवाओं ने आवेदन किया। इसमें 101 ग्रेजुएट थे जिनमें से 55 युवाओं को ऑफर लेटर मिल चुका है। इनमें से 27 को अपने दस्तावेज देने बाकी हैं। नौकरी के लिए 83 युवा ग्रेजुएट नहीं हैं। इनको कार्गो विलेज में प्राथमिकता पर नौकरी दी जानी है।
लीजबैक के 97 मामले पहले ही निरस्त
यीडा में इससे पहले भी किसानों को मिलने वाले लाभों में गड़बड़ी के मामले सामने आ चुके हैं। आवासीय जरूरत के अलावा पशुओं के बाड़े और अन्य उपयोगों के लिए जमीन के लीजबैक से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय समिति ने जांच की थी। इसमें अनियमितताएं मिलने के बाद 97 मामलों में भूखंड देने की प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी। संबंधित पक्ष इन मामलों पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं। इन पर प्राधिकरण को अंतिम निर्णय लेना है।
कोट
वास्तविक किसानों के मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा। निवेश के उद्देश्य से जमीन खरीदकर लाभ लेने वाले बाहरी लोगों को आबादी भूखंड नहीं दिए जा सकते। यह सुविधा जरूरतमंद किसानों के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर देने के मामले में बकाया भुगतान के लिए सुरक्षा समूह के खिलाफ एनसीएलटी में पैरवी की गई है। - राकेश कुमार सिंह, सीईओ, यमुना प्राधिकरण
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- 88 मामलों की जांच में सिर्फ 13 शिफ्टिंग के योग्य
अतुल भारद्वाज
ग्रेटर नोएडा। यमुना सिटी में आबादी भूखंड हासिल करने के लिए जमीन खरीदकर खुद को स्थानीय किसान बताने वाले बाहरी निवेशकों की हेराफेरी सामने आई है। यमुना प्राधिकरण (यीडा) की जांच में ऐसे 52 मामले पकड़े गए हैं जिनमें आवेदक स्थानीय निवासी नहीं थे। वहीं 23 मामलों में अधिसूचना जारी होने के बाद निर्माण कराने या मौके पर निर्माण नहीं होने की बात सामने आई है। कुल 88 मामलों की जांच में सिर्फ 13 को ही भूखंड शिफ्टिंग के योग्य पाया गया है। प्राधिकरण अब नियमों के विपरीत लाभ लेने की कोशिश करने वालों पर कार्रवाई की तैयारी में है। ऐसे लोगों को आबादी भूखंड नहीं दिए जाएंगे।
अधिकारियों ने बताया कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में विकास योजनाएं शुरू होने के बाद जमीन की बढ़ती कीमतों और आबादी भूखंड पाने की उम्मीद में बाहरी लोगों ने कृषि भूमि खरीदी थी। इसके बाद कुछ निवेशकों ने खुद को काश्तकार बताते हुए आबादी भूखंड की मांग की। कुछ ने मौके पर अस्थायी निर्माण कर उसे पुराना बताने का दावा भी किया ताकि उन्हें किसानों को मिलने वाले लाभ मिल सकें। अब प्राधिकरण दस्तावेज के सत्यापन और सैटेलाइट डाटा के आधार पर इन दावों की जांच कर रहा है।
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सैटेलाइट डाटा से हुआ दावों का खुलासा
प्राधिकरण के फेज-1 में शामिल 30 गांवों के 88 मामलों में भूखंड शिफ्टिंग की मांग की गई थी। सामान्य तौर पर सड़क या अन्य विकास कार्य के लिए किसी भूखंड की जमीन जरूरी होने पर प्रभावित व्यक्ति को दूसरी जगह भूखंड दिया जाता है। इन मामलों में वर्ष 2010 से 2012 के सैटेलाइट डाटा और स्थानीय निवासी होने से जुड़े दस्तावेज का सत्यापन किया गया। जांच में 52 आवेदक स्थानीय निवासी नहीं पाए गए। इसके अलावा 23 मामलों में अधिसूचना के बाद निर्माण होने या निर्माण नहीं होने की स्थिति सामने आई। इस तरह कुल 75 मामले शिफ्टिंग के लिए उपयुक्त नहीं पाए गए, जबकि केवल 13 मामलों को पात्र माना गया।
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नोएडा एयरपोर्ट : नौकरी के लिए 184 ने किया आवेदन
सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि नोएडा एयरपोर्ट पर नौकरी के लिए 184 युवाओं ने आवेदन किया। इसमें 101 ग्रेजुएट थे जिनमें से 55 युवाओं को ऑफर लेटर मिल चुका है। इनमें से 27 को अपने दस्तावेज देने बाकी हैं। नौकरी के लिए 83 युवा ग्रेजुएट नहीं हैं। इनको कार्गो विलेज में प्राथमिकता पर नौकरी दी जानी है।
लीजबैक के 97 मामले पहले ही निरस्त
यीडा में इससे पहले भी किसानों को मिलने वाले लाभों में गड़बड़ी के मामले सामने आ चुके हैं। आवासीय जरूरत के अलावा पशुओं के बाड़े और अन्य उपयोगों के लिए जमीन के लीजबैक से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय समिति ने जांच की थी। इसमें अनियमितताएं मिलने के बाद 97 मामलों में भूखंड देने की प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी। संबंधित पक्ष इन मामलों पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं। इन पर प्राधिकरण को अंतिम निर्णय लेना है।
कोट
वास्तविक किसानों के मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा। निवेश के उद्देश्य से जमीन खरीदकर लाभ लेने वाले बाहरी लोगों को आबादी भूखंड नहीं दिए जा सकते। यह सुविधा जरूरतमंद किसानों के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर देने के मामले में बकाया भुगतान के लिए सुरक्षा समूह के खिलाफ एनसीएलटी में पैरवी की गई है। - राकेश कुमार सिंह, सीईओ, यमुना प्राधिकरण