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Noida News: स्पोर्ट्स सिटी में फ्लैट बंधक रखने की जगह बैंक गारंटी का भी विकल्प
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स्पोर्ट्स सिटी में फ्लैट बंधक रखने की जगह बैंक गारंटी का भी विकल्प
- खेल सुविधाएं न विकसित होने तक ग्रुप हाउसिंग की ओसी जारी करने के लिए प्राधिकरण की पहल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट-2 सेक्टर-150 के बिल्डरों को नोएडा प्राधिकरण ने खेल सुविधाएं विकसित होने तक 20 प्रतिशत फ्लैटों की जगह बैंक गारंटी देने का भी विकल्प दिया है। यह मांग परियोजनाओं की रजिस्ट्री की अनुमति देने के लिए की गई है। अब तक प्राधिकरण की फ्लैट बंधक रखने की शर्त पर यहां की कई परियोजनाओं के बिल्डरों का यह कहना था कि सभी फ्लैट बिक चुके हैं। ऐसे में बंधक रखने के लिए फ्लैट बचे नहीं हैं।
प्राधिकरण की शर्त के अनुसार परियोजना के 20 फीसदी खाली फ्लैट खेल सुविधाएं विकसित होने तक बंधक रखे जाने हैं। इस नियम के कारण कई परियोजनाओं की रजिस्ट्री अटकी हुई है। प्राधिकरण ने अब विकल्प के तौर पर उतनी ही राशि की बैंक गारंटी या सावधि जमा जमा करने को कहा है। बिल्डर इस प्रस्ताव से भी सहमत नहीं हैं। उनका तर्क है कि उनके पास इतनी बड़ी राशि की बैंक गारंटी देने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। इस पर प्राधिकरण ने सर्कल रेट पर भी बैंक गारंटी का विकल्प दिया है। प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर सिंह ने बताया कि फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री तेजी से कराने के लिए बैंक गारंटी का विकल्प बिल्डरों को दिया गया है।
कोर्ट गए हुए हैं बिल्डर
कुछ बिल्डरों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस प्रकरण पर अब 6 अक्तूबर को सुनवाई प्रस्तावित है। कोर्ट की सुनवाई पर प्राधिकरण व बिल्डर दोनों पक्ष के लिए अहम होगा।
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- खेल सुविधाएं न विकसित होने तक ग्रुप हाउसिंग की ओसी जारी करने के लिए प्राधिकरण की पहल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट-2 सेक्टर-150 के बिल्डरों को नोएडा प्राधिकरण ने खेल सुविधाएं विकसित होने तक 20 प्रतिशत फ्लैटों की जगह बैंक गारंटी देने का भी विकल्प दिया है। यह मांग परियोजनाओं की रजिस्ट्री की अनुमति देने के लिए की गई है। अब तक प्राधिकरण की फ्लैट बंधक रखने की शर्त पर यहां की कई परियोजनाओं के बिल्डरों का यह कहना था कि सभी फ्लैट बिक चुके हैं। ऐसे में बंधक रखने के लिए फ्लैट बचे नहीं हैं।
प्राधिकरण की शर्त के अनुसार परियोजना के 20 फीसदी खाली फ्लैट खेल सुविधाएं विकसित होने तक बंधक रखे जाने हैं। इस नियम के कारण कई परियोजनाओं की रजिस्ट्री अटकी हुई है। प्राधिकरण ने अब विकल्प के तौर पर उतनी ही राशि की बैंक गारंटी या सावधि जमा जमा करने को कहा है। बिल्डर इस प्रस्ताव से भी सहमत नहीं हैं। उनका तर्क है कि उनके पास इतनी बड़ी राशि की बैंक गारंटी देने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। इस पर प्राधिकरण ने सर्कल रेट पर भी बैंक गारंटी का विकल्प दिया है। प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर सिंह ने बताया कि फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री तेजी से कराने के लिए बैंक गारंटी का विकल्प बिल्डरों को दिया गया है।
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कोर्ट गए हुए हैं बिल्डर
कुछ बिल्डरों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस प्रकरण पर अब 6 अक्तूबर को सुनवाई प्रस्तावित है। कोर्ट की सुनवाई पर प्राधिकरण व बिल्डर दोनों पक्ष के लिए अहम होगा।
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