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भाजपा के गढ़ में सियासी सेंधमारी जुटा विपक्ष
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सोहरखा चुनाव को लेकर चर्चा करते लोग।
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नोएडा। वीआईपी माने जाने वाली नोएडा विधानसभा सीट पर इस बार चुनाव काफी दिलचस्प नजर आ रहा है। अस्तित्व में आने के बाद से ही नोएडा सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। इस बार अन्य दल भाजपा के गढ़ में सियासी सेंधमारी में जुटे हैं। भाजपा पंकज सिंह और सपा-रालोद गठबंधन के सुनील चौधरी प्रत्याशी पुराने चेहरे हैं। वहीं, कांग्रेस ने पंखुरी पाठक और बसपा ने कृपाराम शर्मा को प्रत्याशी बनाकर दोनों पुराने चेहरों को कुछ हद तक परेशानी में डाल दिया है। आम आदमी पार्टी ने भी पंकज अवाना के रूप में प्रत्याशी उतारकर इस सीट से यूपी में चुनावी श्रीगणेश किया है। सभी प्रत्याशी जातिगत आंकड़ों के आधार पर भी वोटरों को साधने का काम कर रहे हैं।
भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर सभी प्रत्याशी बिजली, पानी, किसान और बिल्डर-खरीदार विवाद को ही मुद्दा बनाएं हैं। सबका साथ-सबका विकास का नारा देने वाली भाजपा को अन्य राजनीतिक दल के प्रत्याशी भी इन्हीं मुद्दों पर घेरने का प्रयास कर रहे हैं। नोएडा सीट से केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह विधायक हैं। ऐसे में यह सीट वीआईपी सीट मानी जाती है। 2012 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई नोएडा विधानसभा सीट भाजपा के कब्जे में है। जबकि सपा दूसरे नंबर पर है। इस बार कांग्रेेस और बसपा के साथ आम आदमी पार्टी भी ताल ठोक रही है।
लोगों की प्रतिक्रिया
गांव सोहरखा में चुनावी चर्चा करते हुए बुजुर्ग महेंद्र सिंह यादव कहते हैं कि सपा और बसपा के कार्यकाल में पेंशन मिलती थी, लेकिन जब से भाजपा की सरकार बनी है, पेंशन खत्म हो गई। बुजुर्ग इंद्रपाल कहते हैं कि भाजपा के राज में महंगाई ने कमर तोड़कर दी है। सेक्टर-116 निवासी परविंदर यादव बताते हैं कि डूब क्षेत्र का अंधेरा, बिल्डर-खरीदार का झगड़ा और खारा पानी पांच साल तक किसी भी राजनीतिक दल को याद नहीं आया, अब चुनाव सिर पर आ गए हैं तो सभी ने घोषणा पत्र में इनको मुद्दा बनाया है। रवि, मोइन, दीपक, सतपाल और मोहित भी उनकी बात से इत्तेफाक रखते हैं।
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उधर रजत विहार के सामने खोड़ा कॉलोनी में व्यापार करने वाले अंकुर मंगलम इस बार भी कमल खिलाने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा के राज में व्यापारी सुरक्षित हुआ है। रंगदारी, अपहरण और अन्य प्रकार के संगठित अपराध पूरी तरह से खत्म हो गए हैं। वहीं, नोएडा निवासी किरनपाल कहते हैं कि दिल्ली मॉडल को सभी जानते हैं। केजरीवाल ने दिल्ली के लिए वास्तव में काम किया है। सपा, बसपा, कांग्रेस और भाजपा को तो देख ही चुके हैं। एक बार आम आदमी पार्टी को भी मौका देकर देखा जाए, शायद इस बार नोएडा के दिन बदल जाएं।
इतिहास : नोएडा विधानसभा सीट 2012 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह सीट दादरी विधानसभा में थी। 2012 में परिसीमन के बाद इस सीट पर पहली बार भाजपा के प्रत्याशी डॉ. महेश शर्मा विधायक बने थे। तब से यह सीट भाजपा के कब्जे में है। 2014 में डॉ. महेश शर्मा के लोकसभा चुनाव जीत गए। उपचुनाव में भाजपा की ही विमला बाथम विधायक बनीं। 2017 में विधानसभा चुनाव में पंकज सिंह ने इस सीट पर कब्जा जमाया।
ये हैं प्रमुख मुद्दे
- बिल्डर बायर्स के बीच रजिस्ट्री विवाद।
- डूब क्षेत्र की कॉलोनियों में विद्युत कनेक्शन न होना।
- प्राधिकरण और किसानों के बीच विभिन्न मुद्दों पर विवाद।
- खारे पानी को पीने लायक बनाना और गंगाजल की आपूर्ति।
- सार्वजनिक परिवहन के साधनों को बढ़ाने का लक्ष्य।
- शहर को प्रदूषण मुक्त करने के उपायों पर प्रभावी काम।
- बरसात के दौरान सड़कों पर जलभराव की समस्या।
- शहर के मुख्य बाजारों में कई जगह सड़क पर ही पार्किंग।
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भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर सभी प्रत्याशी बिजली, पानी, किसान और बिल्डर-खरीदार विवाद को ही मुद्दा बनाएं हैं। सबका साथ-सबका विकास का नारा देने वाली भाजपा को अन्य राजनीतिक दल के प्रत्याशी भी इन्हीं मुद्दों पर घेरने का प्रयास कर रहे हैं। नोएडा सीट से केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह विधायक हैं। ऐसे में यह सीट वीआईपी सीट मानी जाती है। 2012 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई नोएडा विधानसभा सीट भाजपा के कब्जे में है। जबकि सपा दूसरे नंबर पर है। इस बार कांग्रेेस और बसपा के साथ आम आदमी पार्टी भी ताल ठोक रही है।
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लोगों की प्रतिक्रिया
गांव सोहरखा में चुनावी चर्चा करते हुए बुजुर्ग महेंद्र सिंह यादव कहते हैं कि सपा और बसपा के कार्यकाल में पेंशन मिलती थी, लेकिन जब से भाजपा की सरकार बनी है, पेंशन खत्म हो गई। बुजुर्ग इंद्रपाल कहते हैं कि भाजपा के राज में महंगाई ने कमर तोड़कर दी है। सेक्टर-116 निवासी परविंदर यादव बताते हैं कि डूब क्षेत्र का अंधेरा, बिल्डर-खरीदार का झगड़ा और खारा पानी पांच साल तक किसी भी राजनीतिक दल को याद नहीं आया, अब चुनाव सिर पर आ गए हैं तो सभी ने घोषणा पत्र में इनको मुद्दा बनाया है। रवि, मोइन, दीपक, सतपाल और मोहित भी उनकी बात से इत्तेफाक रखते हैं।
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उधर रजत विहार के सामने खोड़ा कॉलोनी में व्यापार करने वाले अंकुर मंगलम इस बार भी कमल खिलाने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा के राज में व्यापारी सुरक्षित हुआ है। रंगदारी, अपहरण और अन्य प्रकार के संगठित अपराध पूरी तरह से खत्म हो गए हैं। वहीं, नोएडा निवासी किरनपाल कहते हैं कि दिल्ली मॉडल को सभी जानते हैं। केजरीवाल ने दिल्ली के लिए वास्तव में काम किया है। सपा, बसपा, कांग्रेस और भाजपा को तो देख ही चुके हैं। एक बार आम आदमी पार्टी को भी मौका देकर देखा जाए, शायद इस बार नोएडा के दिन बदल जाएं।
इतिहास : नोएडा विधानसभा सीट 2012 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह सीट दादरी विधानसभा में थी। 2012 में परिसीमन के बाद इस सीट पर पहली बार भाजपा के प्रत्याशी डॉ. महेश शर्मा विधायक बने थे। तब से यह सीट भाजपा के कब्जे में है। 2014 में डॉ. महेश शर्मा के लोकसभा चुनाव जीत गए। उपचुनाव में भाजपा की ही विमला बाथम विधायक बनीं। 2017 में विधानसभा चुनाव में पंकज सिंह ने इस सीट पर कब्जा जमाया।
ये हैं प्रमुख मुद्दे
- बिल्डर बायर्स के बीच रजिस्ट्री विवाद।
- डूब क्षेत्र की कॉलोनियों में विद्युत कनेक्शन न होना।
- प्राधिकरण और किसानों के बीच विभिन्न मुद्दों पर विवाद।
- खारे पानी को पीने लायक बनाना और गंगाजल की आपूर्ति।
- सार्वजनिक परिवहन के साधनों को बढ़ाने का लक्ष्य।
- शहर को प्रदूषण मुक्त करने के उपायों पर प्रभावी काम।
- बरसात के दौरान सड़कों पर जलभराव की समस्या।
- शहर के मुख्य बाजारों में कई जगह सड़क पर ही पार्किंग।