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फिल्म सिटी विकसित करने के लिए केवल एक कंपनी आई आगे
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ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-21 में 1000 एकड़ में विकसित होने वाली फिल्म सिटी के लिए निकाले गए ग्लोबल टेंडर में सिर्फ एक कंपनी ने टेंडर डाला है, जबकि फॉक्स स्टूडियो, यूनिवर्सल स्टूडियो, एलएंडटी समेत चार कंपनियों ने टेंडर खरीदे थे। 30 जून को टेंडर डालने का अंतिम दिन था। अब चार जुलाई को टेंडर खोले जाएंगे। इसके बाद कंपनी का नाम पता चलेगा। नियमानुसार एक हजार करोड़ से अधिक की परियोजना में एक कंपनी के टेंडर डालने पर भी उसे काम दिया जा सकता है, लेकिन इसकी अनुमति प्रदेश कैबिनेट देगी।
फिल्म सिटी तीन चरणों में विकसित होगी। 740 एकड़ में फिल्म फैसिलिटी, 40 एकड़ में फिल्म संस्थान और 120 एकड़ में एम्यूजमेंट पार्क विकसित होगा। रिटेल व अन्य वाणिज्यिक योजना जैसे होटल, रेस्तरां, विला और कार्यालय 100 एकड़ में विकसित होंगे। टेंडर भरने के लिए फिल्म सिटी की विकासकर्ता कंपनी की तकनीक और वित्तीय योग्यता भी तय गई थी। इसके अंतर्गत आवेदन करने वाली कंपनी का सालाना टर्नओवर तीन वित्तीय वर्षों में 2500 करोड़ रुपये होना चाहिए था। वहीं, फिल्म और मीडिया क्षेत्र में पात्र परियोजनाओं पर निर्माण आदि का अनुभव होना चाहिए। इसमें दो श्रेणी हैं। पहली फिल्म और दूसरी ओटीटी प्लेटफार्म की श्रेणी है।
सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की गई थी। इस दौरान चार कंपनियों ने टेंडर खरीदे थे, लेकिन एक कंपनी ने ही टेंडर भरा है। नियमानुसार तीन टेंडर आने पर ही काम का आवंटन होता है। एक हजार करोड़ से अधिक की परियोजना में एक ही टेंडर पर प्रदेश कैबिनेट की अनुमति से काम दिया जा सकता है। अब इस पर 4 जुलाई के बाद फैसला होगा।
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फिल्म सिटी तीन चरणों में विकसित होगी। 740 एकड़ में फिल्म फैसिलिटी, 40 एकड़ में फिल्म संस्थान और 120 एकड़ में एम्यूजमेंट पार्क विकसित होगा। रिटेल व अन्य वाणिज्यिक योजना जैसे होटल, रेस्तरां, विला और कार्यालय 100 एकड़ में विकसित होंगे। टेंडर भरने के लिए फिल्म सिटी की विकासकर्ता कंपनी की तकनीक और वित्तीय योग्यता भी तय गई थी। इसके अंतर्गत आवेदन करने वाली कंपनी का सालाना टर्नओवर तीन वित्तीय वर्षों में 2500 करोड़ रुपये होना चाहिए था। वहीं, फिल्म और मीडिया क्षेत्र में पात्र परियोजनाओं पर निर्माण आदि का अनुभव होना चाहिए। इसमें दो श्रेणी हैं। पहली फिल्म और दूसरी ओटीटी प्लेटफार्म की श्रेणी है।
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सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की गई थी। इस दौरान चार कंपनियों ने टेंडर खरीदे थे, लेकिन एक कंपनी ने ही टेंडर भरा है। नियमानुसार तीन टेंडर आने पर ही काम का आवंटन होता है। एक हजार करोड़ से अधिक की परियोजना में एक ही टेंडर पर प्रदेश कैबिनेट की अनुमति से काम दिया जा सकता है। अब इस पर 4 जुलाई के बाद फैसला होगा।
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