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अब लानी होगी समाधान योजना तो पूरे होंगे प्रोजेक्ट
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ग्रेटर नोएडा। सुपरटेक लिमिटेड के दिवालिया घोषित होने से अब पुराने प्रोजेक्ट में पेच फंस गया है। अब इसके लिए अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) के नेतृत्व में कंपनी चलानी होगी। इसके लिए जल्द से जल्द समाधान योजना लानी होगा, ताकि प्रोजेक्ट पूरे हो सकें। इसमें सुपरटेक के नोएडा-ग्रेनो के कई प्रोजेक्ट शामिल हैं।
एडवोकेट कुमार मिहिर ने बताया कि अब दो-तीन दिन में अखबारों में एक विज्ञापन देना होगा। इसमें उन लोगों से क्लेम मंगाने की अपील की जाएगी, जिनका पैसा सुपरटेक लिमिटेड के प्रोजेक्ट में लगा हुआ है। इसमें फ्लैट खरीदार, बैंक, प्राधिकरण, ठेकेदार, निर्माण सामग्रियों के विक्रेता समेत अन्य एजेंसियां शामिल हैं। यह सभी एनसीएलटी में क्लेम करेंगे। इसके बाद यह तय होगा कि इसमें फाइनेंशियल क्रेडिटर कौन-कौन होगा। इसका मकसद यह होगा कि अगर समाधान योजना के मुताबिक सुपरटेक लिमिटेड के प्रोजेक्टों का बेड़ा पार नहीं लगता है तो ऐसी स्थित में कंपनी की संपत्तियों की नीलामी होगी और उससे आया हुआ पैसा बकायेदारों में बंटेगा। इसकी एक सूची भी बनेगी।
इसके अलावा आईआरपी की ओर से एक कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) का भी गठन होगा। इसमें खरीदारों समेत अन्य निवेशकों को शामिल किया जाएगा। इसमें बड़े बकायेदारों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इनका काम वोटिंग का होगा यानी कंपनी को चलाने के लिए कोई बड़ा फैसला लेना होगा तो सीओसी की बैठक बुलाई जाएगी। बैठक में वोटिंग के माध्यम से कुछ फैसले लिए जाएंगे। इसमें डेवलपर्स चुनने से लेकर अन्य गतिविधियों के लिए वोटिंग होगी। इसके माध्यम से फैसले लिए जाएंगे।
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कंपनी को उबारने के लिए बढ़ेंगे कदम
सूत्रों का कहना है कि इसमें पहले 180 दिन और बाद में 90 दिन तक समाधान योजना लाते हुए कंपनी को उबारने के लिए कदम बढ़ाए जाएंगे। अगर ऐसा लगता है कि कंपनी को उबारने के लिए और दिन चाहिए तो इसके लिए अपील करनी होगी। फिर एनसीएलटी इस पर अपना निर्णय देगी। इस तरह से दिवालिया प्रक्रिया चलती रहेगी। बताया जा रहा है कि करीब 15-16 हजार फ्लैट खरीदारों का पूरा भविष्य अब आईआरपी और सीओसी के निर्णय पर अटका होगा कि किस प्रकार अधूरे फ्लैटों को पूरा कराया जाए और बकायेदारों का पैसा देकर फ्लैट खरीदारों को उनका हक दिलाया जाए।
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एडवोकेट कुमार मिहिर ने बताया कि अब दो-तीन दिन में अखबारों में एक विज्ञापन देना होगा। इसमें उन लोगों से क्लेम मंगाने की अपील की जाएगी, जिनका पैसा सुपरटेक लिमिटेड के प्रोजेक्ट में लगा हुआ है। इसमें फ्लैट खरीदार, बैंक, प्राधिकरण, ठेकेदार, निर्माण सामग्रियों के विक्रेता समेत अन्य एजेंसियां शामिल हैं। यह सभी एनसीएलटी में क्लेम करेंगे। इसके बाद यह तय होगा कि इसमें फाइनेंशियल क्रेडिटर कौन-कौन होगा। इसका मकसद यह होगा कि अगर समाधान योजना के मुताबिक सुपरटेक लिमिटेड के प्रोजेक्टों का बेड़ा पार नहीं लगता है तो ऐसी स्थित में कंपनी की संपत्तियों की नीलामी होगी और उससे आया हुआ पैसा बकायेदारों में बंटेगा। इसकी एक सूची भी बनेगी।
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इसके अलावा आईआरपी की ओर से एक कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) का भी गठन होगा। इसमें खरीदारों समेत अन्य निवेशकों को शामिल किया जाएगा। इसमें बड़े बकायेदारों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इनका काम वोटिंग का होगा यानी कंपनी को चलाने के लिए कोई बड़ा फैसला लेना होगा तो सीओसी की बैठक बुलाई जाएगी। बैठक में वोटिंग के माध्यम से कुछ फैसले लिए जाएंगे। इसमें डेवलपर्स चुनने से लेकर अन्य गतिविधियों के लिए वोटिंग होगी। इसके माध्यम से फैसले लिए जाएंगे।
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कंपनी को उबारने के लिए बढ़ेंगे कदम
सूत्रों का कहना है कि इसमें पहले 180 दिन और बाद में 90 दिन तक समाधान योजना लाते हुए कंपनी को उबारने के लिए कदम बढ़ाए जाएंगे। अगर ऐसा लगता है कि कंपनी को उबारने के लिए और दिन चाहिए तो इसके लिए अपील करनी होगी। फिर एनसीएलटी इस पर अपना निर्णय देगी। इस तरह से दिवालिया प्रक्रिया चलती रहेगी। बताया जा रहा है कि करीब 15-16 हजार फ्लैट खरीदारों का पूरा भविष्य अब आईआरपी और सीओसी के निर्णय पर अटका होगा कि किस प्रकार अधूरे फ्लैटों को पूरा कराया जाए और बकायेदारों का पैसा देकर फ्लैट खरीदारों को उनका हक दिलाया जाए।