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Noida News : 1060 फ्लैटों पर भी लटकी ध्वस्तीकरण की तलवार, फ्लोर एरिया में की हेराफेरी का आरोप
Wed, 31 Aug 2022 05:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा
संदीप वर्मा, ग्रेटर नोएडा
संदीप वर्मा, ग्रेटर नोएडा
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 31 Aug 2022 05:58 AM IST
सार
Noida News : आरोप है कि फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में हेरफेर कर स्विमिंग पूल और ग्रीन एरिया की जगह पर अतिरिक्त फ्लैट बना दिए गए। जांच में ग्रेनो प्राधिकरण के आदेश पर कई वर्षों तक यह फ्लैट सील रहे।
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- फोटो : social media
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विस्तार
ट्विन टावर की तरह ग्रेनो में सुपरटेक के सी-जार प्रोजेक्ट के 1060 फ्लैटों पर भी ध्वस्तीकरण की तलवार लटकी हुई है। आरोप है कि फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में हेरफेर कर स्विमिंग पूल और ग्रीन एरिया की जगह पर अतिरिक्त फ्लैट बना दिए गए। जांच में ग्रेनो प्राधिकरण के आदेश पर कई वर्षों तक यह फ्लैट सील रहे।
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वर्ष 2019 में हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रमुख सचिव औद्योगिक प्राधिकरण को नियम सम्मत रास्ता निकालने के लिए आदेश दिया था। प्रमुख सचिव के फ्लैटों के नियमित करने के निर्णय को ग्रेनो प्राधिकरण ने दोबारा रिव्यू के लिए भेजा था। वहीं, प्रमुख सचिव के आदेश के खिलाफ याचिका अभी हाईकोर्ट में लंबित है।
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ओमीक्रॉन-1 में सी-जार प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। बुकिंग करते समय निवेशकों को पूरे स्थान पर 844 फ्लैट बनाकर देने की योजना थी। धीरे-धीरे निवेशकों ने बुकिंग कराई तो 1904 फ्लैट बनाकर तैयार कर दिए। निवेशकों ने आरोप लगाया कि फ्लोर एरिया रेशियो में घालमेल कर बिल्डर ने इतने ही स्थान पर 1060 अतिरिक्त फ्लैट बना लिए।
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2016 में प्राधिकरण ने सील किए फ्लैट
ग्रीन बेल्ट में अतिरिक्त फ्लैट की जांच के बाद 11 अप्रैल 2016 को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 1060 फ्लैटों को सील कर दिया। हालांकि, तब तक कुछ लोगों को कब्जा मिल गया था। ऐसे में इनके फ्लैट सील होने से बच गए। बिल्डर ने लगभग 1600 फ्लैट बेच रखे हैं।
दो टावरों के बीच तीन-तीन मीटर का दिया स्पेस
निवेशकों का आरोप है कि बिल्डर ने जब फ्लैट की बुकिंग कराई थी तो बेहद खुला हुआ स्थान दिखाया था। अब सोसाइटी में बेहद छोटा पार्क और स्वीमिंग पूल तो नाममात्र का है। कुछ टावरों के बीच 3-3 मीटर का ही फासला दिया है।
हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव को नियम अनुसार कार्रवाई के दिए निर्देश
वर्ष 2016 में मामला हाईकोर्ट में पहुंचा। यहां निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 में तत्कालीन प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास प्राधिकरण को नियम के तहत निर्णय लेने के लिए कहा। प्रमुख सचिव ने इसे नियमित करने का निर्देश जारी किया तो ग्रेनो प्राधिकरण ने नियमों का हवाला देते हुए दोबारा पुनर्विचार करने के लिए प्रमुख सचिव को फाइल भेज दी। वहीं, इस मामले में निवेशक नाराजगी जाहिर करते हुए हाईकोर्ट पहुंच गए।
सी-जार मामले में पिछले वर्ष बोर्ड बैठक में एजेंडा लाया गया था जो स्थगित हो गया था। अब दोबारा बोर्ड बैठक में एजेंडा लाने पर विचार किया जाएगा।
- अमनदीप डुली, एसीईओ, प्राधिकरण
बिल्डर ने हमें जिस स्थान पर पार्क और स्वीमिंग पूल दिखाकर फ्लैट दिए थे। अब वहां 1060 अतिरिक्त फ्लैट बना दिए हैं। ट्विन टावर की तरह अवैध इमारतें खड़ी कर दी गईं हैं, इन्हें भी गिराना चाहिए।
-अरविंद कुमार सिंह, निवेशक सी-जार प्रोजेक्ट
निवेशकों के जीवन भर की कमाई लूट ली गई है। बिल्डर प्रबंधन से कई बार कंप्लीशन और एनओसी के कागज मांगे हैं, लेकिन नहीं दिए गए। फ्लैट का पूरा पैसा दे दिया गया है। कल यदि अवैध इमारत ढहाई जाती हैं तो पूंजी बर्बाद हो जाए।
- वरुण शर्मा, निवेशक सी-जार प्रोजेक्ट
मलबे के ढेर पर चला बुलडोजर का वार
जमींदोज ट्विन टावरों के भारी-भरकम 80 हजार मीट्रिक टन मलबे को ठिकाने लगाने का काम मंगलवार से शुरू हो गया। ध्वस्त इमारतों के बड़े-बड़े टुकड़ों को बुलडोजर और ड्रिल मशीनों के जरिये तोड़कर कंक्रीट में तब्दील किया जा रहा है। हर दिन 250 मीट्रिक टन मलबा सेक्टर-80 के कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन (सीएंडडी) वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भेजा जाएगा। कंक्रीट तोड़ने वाली ड्रिल मशीनों का शोर दिनभर सुनाई दिया। प्रदूषण से निपटने के लिए पानी की बौछारों के बीच काम किया जा रहा है।
सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की क्षमता हर दिन 850 मीट्रिक टन मलबा निस्तारित करने की है, लेकिन फिलहाल इसे 300 मीट्रिक टन क्षमता से चलाया जा रहा है। ट्विन टावर का मलबा बढ़ने पर इसकी निस्तारण क्षमता को बढ़ाने के निर्देश रैमकी कंपनी को दिए गए हैं, क्योंकि रोजाना 250 मीट्रिक टन मलबा ध्वस्त इमारतों का भेजा जाएगा जबकि शहर के अन्य हिस्सों से आने वाला मलबा अलग होगा। अगले दो से तीन दिनों में ट्विन टावर के मलबे का प्लांट में निस्तारण होने लगेगा। अनुबंध के तहत ट्विन टावर का मलबा सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एडिफिस इंजीनियरिंग कंपनी की होगी। प्लांट में जो भी मलबा निस्तारित होगा उसका प्रति क्यूब मीटर के हिसाब से कंपनी को खर्च उठाना होगा।
चार मंजिला इमारत का हिस्सा हटाना चुनौती :
ट्विन टावर के ऊपरी तीन से चार तलों पर विस्फोटक नहीं लगाए गए थे। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि विस्फोट के दौरान इमारतें जिस जगह हैं वहीं जमींदोज हो जाएं। सियान टावर के ऊपरी तीन से चार तल जस के तस मलबे के ऊपर धराशायी हो गए हैं। इसका एक हिस्सा एटीएस सोसाइटी की बाउंड्री तोड़कर आवासीय टावर के नजदीक सोसाइटी सड़क पर गिरा है। इन्हें टुकड़ों में तब्दील कर हटाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है, लेकिन बिल्डिंग का साबुत हिस्सा इतनी जल्दी हटा पाना बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
मलबा हटने पर बनेगा हरित क्षेत्र
ग्रीन एरिया की जमीन को घेरकर ट्विन टावर बनाया गया था। टावर ध्वस्त हो गए हैं और मलबा हटाने की जद्दोजहद जारी है। इसके हटने के बाद उस जगह को ग्रीन एरिया के रूप में ही विकसित किया जाएगा।