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नोएडा हैबिटेट सेंटर: आमने-सामने बैठें तो समाधान मुश्किल नहीं
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नोएडा हैबिटेट सेंटर: आमने-सामने बैठें तो समाधान मुश्किल नहीं
- आर्बिटरेशन में है नोएडा हैबिटेट सेंटर का मामला, नोएडा प्राधिकरण ने किया है टेंडर निरस्त
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-94 के नोएडा कन्वेंशन एंड हैबिटेट सेंटर का मामला मध्यस्थता की प्रक्रिया (आर्बिटरेशन) में है। इससे पहले नोएडा प्राधिकरण ने विवादों के बीच टेंडर निरस्त कर दिया। इसके बाद इसकी कार्यदायी संस्था सेतु निगम आर्बिटरेशन में चली गई। मध्यस्थता कराने के लिए आर्बिटरेटर भी नियुक्त किया गया है। लेकिन मामला काफी धीमा चल रहा है। हालांकि दोनों एजेंसियां यूपी सरकार के अधीन हैं। अगर दोनों एजेंसियां चाहें तो आमने-सामने बैठकर मामले को सुलझा सकती हैं।
दरअसल, नोएडा कन्वेंशन एंड हैबिटेट सेंटर परियोजना का पूरा खाका 2017 में शुरू हुआ। इसके लिए गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा ने पूरा जोर लगाया। वर्ष 2020 में काम शुरू करने की कोशिशें हुईं लेकिन टेंडर निकाले जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पा रहा था। बाद में सेतु निगम को काम मिला। सेतु निगम ने मौके पर काम शुरू कर दिया। लेकिन आरोप है कि काम में लापरवाही हुई। यही नहीं काम को दूसरे ठेकेदार को देने की बात भी सामने आई। कुछ अन्य गतिविधियां भी परियोजना के साइट पर सामने आईं, जिसका प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने विरोध किया। लेकिन संस्था ने सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया। हालांकि उस समय की तत्कालीन सीईओ ने टेंडर को निरस्त करते हुए मामले की जांच के आदेश दे दिए। मामले में कमेटी गठित की गई। इसी बीच कार्यदायी संस्था आर्बिटरेशन में चली गईं।
पीपीपी मॉडल पर परियोजना का काम करने की योजना
हालांकि टेंडर निरस्त करने के बाद भी प्राधिकरण ने आस नहीं छोड़ी और 600 करोड़ का टेंडर निकालने के बदले पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर काम कराने के लिए योजना बनाई। उस समय कई ग्रुप प्राधिकरण के संपर्क में आए और प्रजेंटेशन आदि दिया। लेकिन उस समय काम फाइनल नहीं हो पाया। अगर भविष्य में ऐसा होता है तो कोई निजी ग्रुप इसे बनाने के बाद संचालन का भी काम करेगी ताकि अपना खर्च निकाल सके।
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कोने में पड़ा है 31 मंजिला भवन का मॉडल
नोएडा कन्वेंशन एंड हैबिटेट सेंटर परियोजना का एक मॉडल बनवाया गया था। जिसे प्राधिकरण ने कार्यालय के मुख्य द्वार के सामने रखा था। हर आंख उसको निहारती रहती थी। लेकिन वर्तमान समय में उस मॉडल को हटाकर बाहर कोने में रखवा दिया गया है।
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- आर्बिटरेशन में है नोएडा हैबिटेट सेंटर का मामला, नोएडा प्राधिकरण ने किया है टेंडर निरस्त
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-94 के नोएडा कन्वेंशन एंड हैबिटेट सेंटर का मामला मध्यस्थता की प्रक्रिया (आर्बिटरेशन) में है। इससे पहले नोएडा प्राधिकरण ने विवादों के बीच टेंडर निरस्त कर दिया। इसके बाद इसकी कार्यदायी संस्था सेतु निगम आर्बिटरेशन में चली गई। मध्यस्थता कराने के लिए आर्बिटरेटर भी नियुक्त किया गया है। लेकिन मामला काफी धीमा चल रहा है। हालांकि दोनों एजेंसियां यूपी सरकार के अधीन हैं। अगर दोनों एजेंसियां चाहें तो आमने-सामने बैठकर मामले को सुलझा सकती हैं।
दरअसल, नोएडा कन्वेंशन एंड हैबिटेट सेंटर परियोजना का पूरा खाका 2017 में शुरू हुआ। इसके लिए गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा ने पूरा जोर लगाया। वर्ष 2020 में काम शुरू करने की कोशिशें हुईं लेकिन टेंडर निकाले जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पा रहा था। बाद में सेतु निगम को काम मिला। सेतु निगम ने मौके पर काम शुरू कर दिया। लेकिन आरोप है कि काम में लापरवाही हुई। यही नहीं काम को दूसरे ठेकेदार को देने की बात भी सामने आई। कुछ अन्य गतिविधियां भी परियोजना के साइट पर सामने आईं, जिसका प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने विरोध किया। लेकिन संस्था ने सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया। हालांकि उस समय की तत्कालीन सीईओ ने टेंडर को निरस्त करते हुए मामले की जांच के आदेश दे दिए। मामले में कमेटी गठित की गई। इसी बीच कार्यदायी संस्था आर्बिटरेशन में चली गईं।
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पीपीपी मॉडल पर परियोजना का काम करने की योजना
हालांकि टेंडर निरस्त करने के बाद भी प्राधिकरण ने आस नहीं छोड़ी और 600 करोड़ का टेंडर निकालने के बदले पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर काम कराने के लिए योजना बनाई। उस समय कई ग्रुप प्राधिकरण के संपर्क में आए और प्रजेंटेशन आदि दिया। लेकिन उस समय काम फाइनल नहीं हो पाया। अगर भविष्य में ऐसा होता है तो कोई निजी ग्रुप इसे बनाने के बाद संचालन का भी काम करेगी ताकि अपना खर्च निकाल सके।
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कोने में पड़ा है 31 मंजिला भवन का मॉडल
नोएडा कन्वेंशन एंड हैबिटेट सेंटर परियोजना का एक मॉडल बनवाया गया था। जिसे प्राधिकरण ने कार्यालय के मुख्य द्वार के सामने रखा था। हर आंख उसको निहारती रहती थी। लेकिन वर्तमान समय में उस मॉडल को हटाकर बाहर कोने में रखवा दिया गया है।