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नोएडा-ग्रेनो मेट्रो को रोजाना 6.7 लाख का हो रहा घाटा
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नोएडा-ग्रेनो मेट्रो को रोजाना 6.7 लाख का हो रहा घाटा
नोएडा। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की वजह से नोएडा-ग्रेनो मेट्रो सेवा अब भी बंद है। इससे रोजाना 6.7 लाख रुपये का घाटा हो रहा है। मेट्रो का परिचालन बंद किए जाने से बीते तीन माह में करीब 6 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। नोएडा-ग्रेनो मेट्रो को 22 मार्च से बंद किया गया है। मेट्रो के राजस्व आंकड़ों पर गौर करें तो प्रत्येक माह करीब 2 करोड़ का राजस्व मिल रहा था। यह राजस्व टिकटों व कार्ड की बुकिंग से आ रहा था। उस दौरान मेट्रो की रोजाना की कमाई 6.7 लाख थी। खास बात यह है कि लॉकडाउन से पहले मेट्रो के परिचालन में पहले से ही 10 से 12 करोड़ रुपये का घाटा प्रतिमाह हो रहा था। हालांकि, उस दौरान करीब दो करोड़ रुपये की कमाई भी हर महीने हो रही थी। यही कारण था कि मेट्रो प्रबंधन की ओर से भविष्य में राजस्व बढ़ोतरी के लिए कई उपाय किए जाने थे। उनका लक्ष्य इसे और बेहतर बनाते हुए यात्रियों की संख्या बढ़ाने का था। उस दौरान करीब 25 से 30 हजार यात्री रोजाना सफर कर रहे थे।
अब बदल गई पूरी तस्वीर
भविष्य में नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो को शुरू भी किया जाता है तो घाटे की भरपाई करना खासा मुश्किल होगा। इसकी वजह यह है कि सामाजिक दूरी की वजह से मेट्रो में पहले जितने यात्री नहीं जा सकेंगे। ऐसे में मेट्रो का राजस्व में घाटा होना लाजिमी है। वर्तमान की स्थिति को देखते हुए मेट्रो के शुरू होने पर आधे यात्री ही सफर करेंगे। इसका सीधा असर पड़ेगा।
नई परियोजनाओं पर भी पड़ा असर
कोरोना की वजह से ग्रेनो वेस्ट मेट्रो के निर्माण कार्य को लेकर चल रही गतिविधि भी थम गई है। हालांकि, इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन काम की गति पर इसका असर जरूर पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि लॉकडाउन नहीं होता तो इस दिशा में कई कारगर कदम उठ चुके होते। फिलहाल, स्थिति के सामान्य होने पर ध्यान दिया जा रहा है।
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नोएडा। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की वजह से नोएडा-ग्रेनो मेट्रो सेवा अब भी बंद है। इससे रोजाना 6.7 लाख रुपये का घाटा हो रहा है। मेट्रो का परिचालन बंद किए जाने से बीते तीन माह में करीब 6 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। नोएडा-ग्रेनो मेट्रो को 22 मार्च से बंद किया गया है। मेट्रो के राजस्व आंकड़ों पर गौर करें तो प्रत्येक माह करीब 2 करोड़ का राजस्व मिल रहा था। यह राजस्व टिकटों व कार्ड की बुकिंग से आ रहा था। उस दौरान मेट्रो की रोजाना की कमाई 6.7 लाख थी। खास बात यह है कि लॉकडाउन से पहले मेट्रो के परिचालन में पहले से ही 10 से 12 करोड़ रुपये का घाटा प्रतिमाह हो रहा था। हालांकि, उस दौरान करीब दो करोड़ रुपये की कमाई भी हर महीने हो रही थी। यही कारण था कि मेट्रो प्रबंधन की ओर से भविष्य में राजस्व बढ़ोतरी के लिए कई उपाय किए जाने थे। उनका लक्ष्य इसे और बेहतर बनाते हुए यात्रियों की संख्या बढ़ाने का था। उस दौरान करीब 25 से 30 हजार यात्री रोजाना सफर कर रहे थे।
अब बदल गई पूरी तस्वीर
भविष्य में नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो को शुरू भी किया जाता है तो घाटे की भरपाई करना खासा मुश्किल होगा। इसकी वजह यह है कि सामाजिक दूरी की वजह से मेट्रो में पहले जितने यात्री नहीं जा सकेंगे। ऐसे में मेट्रो का राजस्व में घाटा होना लाजिमी है। वर्तमान की स्थिति को देखते हुए मेट्रो के शुरू होने पर आधे यात्री ही सफर करेंगे। इसका सीधा असर पड़ेगा।
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नई परियोजनाओं पर भी पड़ा असर
कोरोना की वजह से ग्रेनो वेस्ट मेट्रो के निर्माण कार्य को लेकर चल रही गतिविधि भी थम गई है। हालांकि, इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन काम की गति पर इसका असर जरूर पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि लॉकडाउन नहीं होता तो इस दिशा में कई कारगर कदम उठ चुके होते। फिलहाल, स्थिति के सामान्य होने पर ध्यान दिया जा रहा है।
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