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Noida News: न छत, न शिक्षक, 109 बच्चों का भविष्य अधर में
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-राजकीय प्राइमरी पाठशाला रानौता बदहाल, किचन के बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं विद्यार्थी
सद्दाम हुसैन
पिनगवां । राजकीय प्राइमरी पाठशाला रानौता में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है। हालात इतने खराब हैं कि स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए एक भी कक्षा कक्ष उपलब्ध नहीं है। बच्चों को किचन रूम के बरामदे में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जहां न तो पर्याप्त जगह है और न ही पढ़ने का अनुकूल वातावरण। खुले बरामदे में बैठकर पढ़ाई करना बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों के लिए खतरा बना हुआ है।
स्कूल भवन में कुल मिलाकर केवल दो कमरों की हालत कुछ हद तक ठीक है। इनमें से एक कमरा स्टाफ कार्यालय के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जबकि दूसरा मिड डे मील किचन रूम है। बच्चों के लिए पढ़ाई हेतु एक भी कमरा उपलब्ध नहीं है। स्कूल के पुराने तीन से चार कमरे जर्जर अवस्था में हैं, जो बिलकुल डेमरेज हो चुके हैं । इन कमरों में बच्चों को बैठाना जोखिम भरा होने के कारण पूरी तरह बंद कर दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए करीब एक वर्ष पूर्व एक नए कमरे का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश वह कार्य आज तक अधूरा पड़ा है। निर्माण कार्य लंबे समय से रुका हुआ है, जिससे बच्चों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाता, तो आज बच्चों को इस तरह खुले में पढ़ने को मजबूर नहीं होना पड़ता। भवन की कमी के साथ-साथ स्कूल में शिक्षकों का भी भारी अभाव है। स्कूल में एक भी नियमित (रेगुलर) शिक्षक तैनात नहीं है। वर्तमान में केवल एक सहायक शिक्षक, एक गेस्ट टीचर और मानोता स्थित स्कूल से अस्थायी रूप से भेजा गया ये शिक्षक ही स्कूल का संचालन कर रहे हैं। जबकि स्कूल के रजिस्टर में कुल 109 बच्चे दर्ज हैं, जिनकी शिक्षा के लिए न तो पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं और न ही उचित कक्षाएं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूल में जल्द से जल्द नए कक्षों का निर्माण पूरा कराया जाए और नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
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स्कूल भवन के लिए लेटर भेज रखा है, उम्मीद है नए सत्र तक कमरों का निर्माण हो जाएगा। स्कूल में तीन अध्यापक तैनात है जो बहुत अच्छे से स्कूल चला रहे है।
- राजयोग, सीआरएस हैड
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सद्दाम हुसैन
पिनगवां । राजकीय प्राइमरी पाठशाला रानौता में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है। हालात इतने खराब हैं कि स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए एक भी कक्षा कक्ष उपलब्ध नहीं है। बच्चों को किचन रूम के बरामदे में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जहां न तो पर्याप्त जगह है और न ही पढ़ने का अनुकूल वातावरण। खुले बरामदे में बैठकर पढ़ाई करना बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों के लिए खतरा बना हुआ है।
स्कूल भवन में कुल मिलाकर केवल दो कमरों की हालत कुछ हद तक ठीक है। इनमें से एक कमरा स्टाफ कार्यालय के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जबकि दूसरा मिड डे मील किचन रूम है। बच्चों के लिए पढ़ाई हेतु एक भी कमरा उपलब्ध नहीं है। स्कूल के पुराने तीन से चार कमरे जर्जर अवस्था में हैं, जो बिलकुल डेमरेज हो चुके हैं । इन कमरों में बच्चों को बैठाना जोखिम भरा होने के कारण पूरी तरह बंद कर दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए करीब एक वर्ष पूर्व एक नए कमरे का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश वह कार्य आज तक अधूरा पड़ा है। निर्माण कार्य लंबे समय से रुका हुआ है, जिससे बच्चों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाता, तो आज बच्चों को इस तरह खुले में पढ़ने को मजबूर नहीं होना पड़ता। भवन की कमी के साथ-साथ स्कूल में शिक्षकों का भी भारी अभाव है। स्कूल में एक भी नियमित (रेगुलर) शिक्षक तैनात नहीं है। वर्तमान में केवल एक सहायक शिक्षक, एक गेस्ट टीचर और मानोता स्थित स्कूल से अस्थायी रूप से भेजा गया ये शिक्षक ही स्कूल का संचालन कर रहे हैं। जबकि स्कूल के रजिस्टर में कुल 109 बच्चे दर्ज हैं, जिनकी शिक्षा के लिए न तो पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं और न ही उचित कक्षाएं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूल में जल्द से जल्द नए कक्षों का निर्माण पूरा कराया जाए और नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
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स्कूल भवन के लिए लेटर भेज रखा है, उम्मीद है नए सत्र तक कमरों का निर्माण हो जाएगा। स्कूल में तीन अध्यापक तैनात है जो बहुत अच्छे से स्कूल चला रहे है।
- राजयोग, सीआरएस हैड