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मेडिकल कॉलेज में दो दिन के लिए भी ऑक्सीजन का स्टॉक नहीं
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अंतराम खटाना
नूंह । जिले के एक मात्र शहीद हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन का अभाव अभी भी है। हालांकि, कॉलेज प्रशासन द्वारा जैसे-तैसे ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। लेकिन, यहां पर एक या दो दिन के लिए भी ऑक्सीजन का स्टॉक नहीं है। इस कारण मरीजों के तीमारदारों को ऑक्सीजन की खुद ही व्यवस्था करनी पड़ रही है। आए दिन होने वाले ऑक्सीजन संकट से उभरने के लिए अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस कारण लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति रोष है। लोगों का कहना हैं कि कम से कम एक या दो दिन के लिए ऑक्सीजन का स्टॉक तो होना ही चाहिए। इसके अभाव में मरीजों की जान भी जा सकती है।
क्षेत्र के रशीद एडवोकेट पुन्हाना, युवा बुरहान सलंबा, तौफिक हिंगनुपर, इम्तियाज मालब आदि लोगों का कहना है कि सरकार भले ही प्रदेश में ऑक्सीजन के भंडार के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन धरातल पर इन दावों की पोल खुल रही है। मेडिकल कॉलेज में भी ऑक्सीजन की सही तरह से आपूर्ति नहीं हो रही है। सरकार और प्रशासन को इस बारे में तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। ऑक्सीजन का स्टॉक होने से मरीजों के इलाज में जुटें डॉक्टर बेहतर तरीके से कार्य कर सकते हैं। यहां पर आए दिन घंटे या दो घंटे की ऑक्सीजन रहने के बाद ही ऑक्सीजन की गाड़ी पहुंचती है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। (संवाद)
पलवल और गुरुग्राम के गंभीर मरीज भी भर्ती
जिले के मेडिकल कॉलेज को नूंह, पलवल और गुरुग्राम जिले के लिए कोविड का स्पेशल अस्पताल बनाया गया है। इस कारण इन जिलों से कोरोना के गंभीर मरीज इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। काफी दिनों से मेडिकल कॉलेज के सभी बेड फुल हैं।
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बेडों की संख्या बढ़ाने की हो रही मांग
मेडिकल कॉलेज में कुल 652 बेड हैं। इनमें 31 आईसीयू और कोरोना आइसोलेशन के 165 बेड हैं। मेडिकल कॉलेज में अतिरिक्त बेडों की संख्या को बढ़ाने के लिए नूंह विधायक आफताब अहमद व जजपा जिला अध्यक्ष तैय्यब हुसैन के अलावा मेवात विकास मंच द्वारा सरकार व प्रशासन से मांग की जा रही है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।
उपचार नहीं मिलने से कई लोगों की हो चुकी है मौत
मेडिकल कॉलेज में बेडों की संख्या बहुत कम है। इस कारण कोरोना व अन्य बीमारियों के गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण कॉलेज के बहार कई लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं।
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मेडिकल कॉलेज में मरीजों का बेहतर उपचार किया जा रहा है। कॉलेज की स्थिति पर जिला प्रशासन और सरकार की नजर है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, यहां पर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएंगी। इसके लिए प्रयास जारी हैं।
- धीरेंद्र खड़गटा, उपायुक्त नूंह
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नूंह । जिले के एक मात्र शहीद हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन का अभाव अभी भी है। हालांकि, कॉलेज प्रशासन द्वारा जैसे-तैसे ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। लेकिन, यहां पर एक या दो दिन के लिए भी ऑक्सीजन का स्टॉक नहीं है। इस कारण मरीजों के तीमारदारों को ऑक्सीजन की खुद ही व्यवस्था करनी पड़ रही है। आए दिन होने वाले ऑक्सीजन संकट से उभरने के लिए अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस कारण लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति रोष है। लोगों का कहना हैं कि कम से कम एक या दो दिन के लिए ऑक्सीजन का स्टॉक तो होना ही चाहिए। इसके अभाव में मरीजों की जान भी जा सकती है।
क्षेत्र के रशीद एडवोकेट पुन्हाना, युवा बुरहान सलंबा, तौफिक हिंगनुपर, इम्तियाज मालब आदि लोगों का कहना है कि सरकार भले ही प्रदेश में ऑक्सीजन के भंडार के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन धरातल पर इन दावों की पोल खुल रही है। मेडिकल कॉलेज में भी ऑक्सीजन की सही तरह से आपूर्ति नहीं हो रही है। सरकार और प्रशासन को इस बारे में तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। ऑक्सीजन का स्टॉक होने से मरीजों के इलाज में जुटें डॉक्टर बेहतर तरीके से कार्य कर सकते हैं। यहां पर आए दिन घंटे या दो घंटे की ऑक्सीजन रहने के बाद ही ऑक्सीजन की गाड़ी पहुंचती है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। (संवाद)
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पलवल और गुरुग्राम के गंभीर मरीज भी भर्ती
जिले के मेडिकल कॉलेज को नूंह, पलवल और गुरुग्राम जिले के लिए कोविड का स्पेशल अस्पताल बनाया गया है। इस कारण इन जिलों से कोरोना के गंभीर मरीज इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। काफी दिनों से मेडिकल कॉलेज के सभी बेड फुल हैं।
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बेडों की संख्या बढ़ाने की हो रही मांग
मेडिकल कॉलेज में कुल 652 बेड हैं। इनमें 31 आईसीयू और कोरोना आइसोलेशन के 165 बेड हैं। मेडिकल कॉलेज में अतिरिक्त बेडों की संख्या को बढ़ाने के लिए नूंह विधायक आफताब अहमद व जजपा जिला अध्यक्ष तैय्यब हुसैन के अलावा मेवात विकास मंच द्वारा सरकार व प्रशासन से मांग की जा रही है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।
उपचार नहीं मिलने से कई लोगों की हो चुकी है मौत
मेडिकल कॉलेज में बेडों की संख्या बहुत कम है। इस कारण कोरोना व अन्य बीमारियों के गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण कॉलेज के बहार कई लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं।
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मेडिकल कॉलेज में मरीजों का बेहतर उपचार किया जा रहा है। कॉलेज की स्थिति पर जिला प्रशासन और सरकार की नजर है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, यहां पर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएंगी। इसके लिए प्रयास जारी हैं।
- धीरेंद्र खड़गटा, उपायुक्त नूंह