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एनसीएलटी ने खारिज की वेव ग्रुप की याचिका, 1 करोड़ जुर्माना लगाया

Tue, 07 Jun 2022 02:18 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 02:18 AM IST
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NCLT rejects Wave Group's plea, fined Rs 1 crore
नोएडा। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल (एनसीएलटी) ने सोमवार को हुई सुनवाई में वेव ग्रुप की याचिका खारिज कर दी। बिल्डर ग्रुप ने वेव मेगा सिटी सेंटर परियोजना पर दिवालिया प्रक्रिया चलाने की याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद याचिका खारिज करते हुए वेव समूह पर एक करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही घर खरीदारों, प्राधिकरण के पैसों की हेरफेर की आशंका को देखते हुए वेव समूह की जांच गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) से कराने का आदेश दिया है। कोर्ट का मानना है कि वेव ग्रुप ने अपने घर खरीदारों को धोखे की मंशा से दिवालिया प्रक्रिया चलवाने की कोशिश की।
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सेक्टर-32-25 के वेव मेगा सिटी सेंटर प्राइवेट लिमिटेड (डब्ल्यूएमसीसी) ने एनसीएलटी में दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवेदन किया गया। उस दौरान खरीदारों के हित में कंपनी ने ऐसा फैसला लेने की बात कही गई थी। इससे पहले कंपनी की 1.08 लाख वर्गमीटर जमीन का आवंटन निरस्त करते हुए नोएडा प्राधिकरण ने वेव ग्रुप की एक परियोजना पर सीलिंग और कब्जे की कार्रवाई की थी।
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वेव ग्रुप का कहना था कि नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-32 और 25 में आवासीय-सह-वाणिज्यिक परियोजना को मनमाने तरीके से सील कर दिया है। कंपनी प्रवक्ता ने बताया था कि इस परियोजना में 3,800 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। जिसमें इसके प्रमोटर्स और उनके सहयोगियों के 2,213 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। इसके अलावा बैंक लोन के रूप में 200 करोड़ रुपये की राशि ली गई है। जबकि खरीदारों से करीब 1400 करोड़ रुपये की राशि ली गई है। इसमें से 2000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान विभिन्न सरकारी एजेंसियों को किया गया है, जिसमें नोएडा प्राधिकरण को किया गया लगभग 1600 करोड़ रुपये का भुगतान शामिल है।
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निरस्त की गई 1.08 लाख वर्गमीटर जमीन वापस लेने के लिए वेव को देने होंगे करीब 2700 करोड़
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल वेव ग्रुप के पास 56 हजार वर्गमीटर जमीन है। जिसके एवज में प्राधिकरण का 90 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं, अगर वेव ग्रुप निरस्त की गई 1.08 लाख वर्गमीटर जमीन की वापसी चाहता है तो उसे बकाये का करीब 2700 करोड़ रुपये वापस करने होंगे।
2300 खरीदार अब भी फंसे
वेव ग्रुप की विभिन्न परियोजनाओं में अब भी करीब 2300 ग्रुप हाउसिंग और कॉमर्शियल के खरीदार फंसे हुए हैं। वेव ग्रुप के खरीदारों की ओर से यहां आंकड़ा दिया गया है। उनका कहना है कि अब तक एक भी खरीदार की रजिस्ट्री नहीं हुई है। वेव ग्रुप की ओर से पैसे जमा कराने के बाद ही रजिस्ट्री संभव है। एनसीएलटी का मानना है कि सुनवाई के दौरान खरीदारों ने यह साबित कर दिया कि उन्होंने बिल्डर को पैसे दिए। लेकिन इन पैसों का हेरफेर किया गया। ऐसे में घर खरीदारों के मकान भी नहीं मिल पाए। प्राधिकरण को भी पैसे नहीं मिले। आखिर यह पैसे कहां गए। लिहाजा इसकी गंभीर जांच होनी चाहिए।
यह है वेव मेगा सिटी सेंटर का मामला
नोएडा के सेक्टर 25 और 32 के बीच स्थित वेव मेगा सिटी सेंटर प्राइवेट लिमिटेड ने 2011 में लीजहोल्ड के आधार पर 6.18 लाख वर्गमीटर भूमि का आवंटन लगभग 1.07 लाख रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से 6,622 करोड़ रुपये में कराया था। मूल योजना के हिसाब से पुनर्भुगतान की अवधि पहले दो साल मोरेटोरियम के बाद 16 अर्द्धवार्षिक किस्तों में थी। दिसंबर 2016 में खरीदारों को समय पर युनिट्स की डिलीवरी देने तथा किस्तों पर बकाया राशि की वसूली के लिए नोएडा प्राधिकरण प्रोजेक्ट सैटलमेंट पॉलिसी (पीएसपी) लेकर आया। पीएसपी के तहत प्राधिकरण ने डब्ल्यूएमसीसी की 4.5 लाख वर्गमीटर जमीन वापस ले लीं। इसमें ग्रुप की ओर से जमा किए गए पैसे को ब्याज की राशि मान लिया गया। 10 मार्च 2021 को, नोएडा प्राधिकरण द्वारा 1.08 लाख वर्ग मीटर अधिग्रहण जमीन के आवंटन को निरस्त कर दिया गया और साथ ही दो टावरों को भी सील कर दिया गया। हालांकि अभी भी करीब 56 हजार वर्गमीटर जमीन कंपनी के पास है।
देश में न्याय प्रणाली अभी भी जिंदा है और यह फैसला इसका प्रमाण है। इस फैसले से फंसे हुए घर खरीदारों में एक नई उम्मीद जगी है। अब घर खरीदार के साथ नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ेगा। हमारे लिए यह पहली जीत है। हालांकि लड़ाई लंबी है। - अंशुमान जैन, फ्लैट खरीदार और वेव सिटी सेंटर होम बायर्स एसोसिएशन के सदस्य

माननीय न्यायाधीकरण ने अभी-अभी आदेश सुनाया है। हम आदेश का मूल्यांकन करेंगे और आगे की कार्रवाई के लिए उपयुक्त अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।- प्रवक्ता, वेव मेगा सिटी सेंटर
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