फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   NCLT reaches Rs 10,000 crore of authority stuck in 25 projects

Noida News: एनसीएलटी पहुंची 25 परियोजनाओं में प्राधिकरण के फंसे 10 हजार करोड़

Sat, 28 Sep 2024 08:22 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2024 08:22 PM IST
विज्ञापन
NCLT reaches Rs 10,000 crore of authority stuck in 25 projects
-प्राधिकरण की परियोजनाओं के एनसीएलटी में जाने का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा आंकड़ा
विज्ञापन

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण की 25 परियोजनाएं अब तक नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) तक पहुंच चुकी हैं। इन परियोजनाओं पर करीब 10 हजार करोड़ का बकाया है। परियोजनाओं पर फैसला नहीं होने से पैसे पूरी तरह से फंस गए हैं। इन परियोजनाओं में हजारों फ्लैट, दुकान और कार्यालय स्पेस खरीदने वाले खरीदार फंसे हुए हैं।
नोएडा प्राधिकरण से आवंटन के बाद ऐसी परियोजनाओं के लिए बिल्डरों ने काम शुरू किया। साथ ही साथ फ्लैटों, दुकानों व कार्यालय स्पेस के लिए बुकिंग भी शुरू कर दी। 2010 से लेकर अब तक यहां हजारों निवेशकों ने किया। जैसे-जैसे निर्माण का काम पूरा होता रहा, खरीदारों को फ्लैटों पर कब्जे मिलते रहे। बाद में पजेशन व फ्लैटों की रजिस्ट्री का काम धीमा होता चला गया।
विज्ञापन

बिल्डरों पर हजारों करोड़ का बकाया होने के बाद प्राधिकरण ने चुकाने का दबाव बनाना शुरू किया। लेकिन बिल्डरों ने पैसे जमा नहीं किए। इसी कड़ी में बैंकों व दूसरे अन्य बकायेदारों ने भी वापसी के लिए दबाव बनाया। पैसे नहीं चुकाने से ऐसे बैंक और अन्य एजेंसियों ने एनसीएलटी की राह ली। याचिका स्वीकार होने के बाद इन परियोजनाओं में इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) नियुक्त किए गए। इसके बाद से इन पर दिवालिया प्रक्रिया चल रही है। दिवालिया प्रक्रिया की मियाद 270 दिनों की होती है। लेकिन आलम यह है कि इन पर कई वर्षों से सुनवाई चल रही है। कुछ मामलों में यह अवधि चार-पांच वर्ष तक की हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्राधिकरण के अलावा खरीदारों को हुआ यहां घाटा
सुनवाई शुरू होने के बाद से लेकर अब तक इसमें प्राधिकरण के अलावा फ्लैट खरीदारों को घाटा हुआ है। सुनवाई होने से प्राधिकरण बिल्डर से बकाया नहीं मांग सकता है। वहीं दूसरी ओर आईआरपी नियुक्त होने के बाद कुछ चुनिंदा परियोजनाओं में ही काम हो पाए। अधिकांश में फ्लैट अटके हैं। ऐसे में खरीदारों को न तो कब्जा मिल पा रहा है और न ही उनकी रजिस्ट्री हो पा रही है।

रजिस्ट्री का ऐसे फंसा हुआ है पेच
नोएडा की किसी भी परियोजना में त्रिपक्षीय रजिस्ट्री होती है। यानी इसमें बिल्डर और खरीदार के अलावा प्राधिकरण भी एक पक्ष के तौर मौजूद रहता है। अब जिन परियोजनाओं में प्राधिकरण का बकाया है। उन परियोजनाओं की रजिस्ट्री के लिए प्राधिकरण हामी नहीं भरता है। केवल आम्रपाली की परियोजना में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिना बकाया लिए प्राधिकरण की ओर से फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री कराई जा रही है। वहीं एक दिन पहले सेक्टर-107 की लोटस 300 परियोजना में सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह में दो टावरों की रजिस्ट्री कराने का आदेश दिया है। इसमें हिदायत दी गई है कि खरीदारों से बकाये का जिक्र नहीं किया जाए।


वाणिज्यिक बिल्डर प्रोजेक्ट में भी बकाया
प्राधिकरण की ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के अलावा वाणिज्यिक बिल्डर परियोजनाओं में भी करोड़ों का बकाया है। इनकी परियोजनाओं की सुनवाई भी एनसीएलटी में हो रही है। इस पर अभी भी फैसला नहीं हुआ है।


कुछ प्रमुख परियोजनाएं एनसीएलटी में बकाये सहित
-सुपरटेक लिमिटेड-761 करोड़
-अजनारा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड-93 करोड़
-ग्रेनाइट गेट प्रोपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड-860 करोड़
-लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स-607 करोड़
-थ्री सी प्रोजेक्ट्स-536 करोड़ और 328 करोड़
-हैसिंडा प्रोजेक्ट्स-134 करोड़
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed