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Noida News: कैथ लैब मशीन गड़बड़, नहीं हो पा रहे ऑपरेशन
Mon, 06 Feb 2023 12:37 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Mon, 06 Feb 2023 12:37 AM IST
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इटावा/सैफई। आयुर्विज्ञान विवि में कार्डियो के ऑपरेशन शुरू करने में कैथ लैब मशीन की पावर केबल रोड़ा बनी हुई है। करीब पांच माह से ओपीडी तो चल रही है, लेकिन कैथ लैब मशीन की गड़बड़ी की वजह से ऑपरेशन शुरू नहीं हो सके हैं। हालांकि प्रबंधन का दावा है कि इंजीनियर अंतिम चरण में मशीन की मरम्मत कर रहे हैं। पावर केबल सही होने के बाद अगले सप्ताह से ऑपरेशन शुरू होने की उम्मीद है।
विश्वविद्यालय में कार्डियो विभाग खुलने के बाद 2014 में ऑपरेशन के लिए कैथ लैब मशीन को लगाया गया था। इससे लगभग अप्रैल 2021 तक ऑपरेशन का काम चला। मई 2021 में डॉक्टरों की कमी के कारण कॉर्डियो विभाग में ताला लटका रहा। करीब 17 महीने तक ऑपरेशन की कैथ लैब मशीन उपयोग में न होने की वजह से वह खराब हो गई। 15 सितंबर 2022 को विभागाध्यक्ष डॉ. समीर सराफा को जिम्मेदारी मिलने के ओपीडी शुरू कर दी गई। इसके दो माह के अंदर विभाग को चार अन्य डॉक्टर भी दे दि गए। इससे हृदय रोगियों को बाहर दिखाने नहीं जाना पड़ रहा है।
पांच माह में यहां पर लगभग छह हजार मरीज ओपीडी में दिखा चुके हैं, लेकिन ऑपरेशन की सुविधा शुरू न हो पाने से लोगों को अभी ऑपरेशन के लिए ग्वालियर, दिल्ली, आगरा और लखनऊ तक दौड़ लगानी पड़ रही है। मशीन लगभग सही हो गई है, लेकिन पावर केबिल का फाल्ट ढूंढना इंजीनियरों के लिए चुनौती बना हुआ है। चिकित्साधीक्षक प्रो./डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि कैथ लैब मशीन की इंजीनियर मरम्मत कर रहे हैं। अगले सप्ताह तक ऑपरेशन शुरू हो सकते हैं।
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प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ा
सैफई के एडवोकेट यदुवीर सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले हमारे रिश्तेदार मैनपुरी से दिखाने आए थे। डॉक्टरों ने उन्हें ऑपरेशन बताया। आयुर्विज्ञान विवि में सुविधा न होने के कारण उन्हें बाहर प्राइवेट अस्पताल से जाकर ऑपरेशन कराना पड़ा।
नग्ला सबी के सुरेंद्र ने बताया कि पड़ोस के ही एक युवक को कुछ दिन माइनर अटैक पड़ा। उसे परिजन आयुर्विज्ञान विवि दिखाने के लिए ले गए थे। यहां डॉक्टरों ने उसे ऑपरेशन की सलाह दी। बाहरजाकर ऑपरेशन कराना पड़ा था।
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विश्वविद्यालय में कार्डियो विभाग खुलने के बाद 2014 में ऑपरेशन के लिए कैथ लैब मशीन को लगाया गया था। इससे लगभग अप्रैल 2021 तक ऑपरेशन का काम चला। मई 2021 में डॉक्टरों की कमी के कारण कॉर्डियो विभाग में ताला लटका रहा। करीब 17 महीने तक ऑपरेशन की कैथ लैब मशीन उपयोग में न होने की वजह से वह खराब हो गई। 15 सितंबर 2022 को विभागाध्यक्ष डॉ. समीर सराफा को जिम्मेदारी मिलने के ओपीडी शुरू कर दी गई। इसके दो माह के अंदर विभाग को चार अन्य डॉक्टर भी दे दि गए। इससे हृदय रोगियों को बाहर दिखाने नहीं जाना पड़ रहा है।
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पांच माह में यहां पर लगभग छह हजार मरीज ओपीडी में दिखा चुके हैं, लेकिन ऑपरेशन की सुविधा शुरू न हो पाने से लोगों को अभी ऑपरेशन के लिए ग्वालियर, दिल्ली, आगरा और लखनऊ तक दौड़ लगानी पड़ रही है। मशीन लगभग सही हो गई है, लेकिन पावर केबिल का फाल्ट ढूंढना इंजीनियरों के लिए चुनौती बना हुआ है। चिकित्साधीक्षक प्रो./डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि कैथ लैब मशीन की इंजीनियर मरम्मत कर रहे हैं। अगले सप्ताह तक ऑपरेशन शुरू हो सकते हैं।
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प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ा
सैफई के एडवोकेट यदुवीर सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले हमारे रिश्तेदार मैनपुरी से दिखाने आए थे। डॉक्टरों ने उन्हें ऑपरेशन बताया। आयुर्विज्ञान विवि में सुविधा न होने के कारण उन्हें बाहर प्राइवेट अस्पताल से जाकर ऑपरेशन कराना पड़ा।
नग्ला सबी के सुरेंद्र ने बताया कि पड़ोस के ही एक युवक को कुछ दिन माइनर अटैक पड़ा। उसे परिजन आयुर्विज्ञान विवि दिखाने के लिए ले गए थे। यहां डॉक्टरों ने उसे ऑपरेशन की सलाह दी। बाहरजाकर ऑपरेशन कराना पड़ा था।