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Noida News: लोहिया में झुलसे बच्चे को नहीं मिला उपचार
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फर्रुखाबाद। पिछले माह आग से झुलसे एक बच्चे की पेशाब बंद हो गई। भैंस बेचकर जुटाई रकम खर्च होने पर उसे लोहिया में भर्ती कराया। रातभर बिना इलाज के बच्चा दर्द से चीखता रहा। भोर में स्टाफ ने दबाव बनाकर बच्चे को बाहर निकाल दिया। पिता चार घंटे तक इमरजेंसी के बाहर पटिया पर लिटाए रहा।
कायमगंज के गांव दोषपुर कुआखेड़ा निवासी रामसेवक की पत्नी आरती नौ दिसंबर को आग से ताप रही थीं। उसी समय खेलता हुआ आया नौ साल का बच्चा रविंद्र कुमार पीठ पर बैठ गया। असंतुलित मां और बेटा आग पर गिर गए। इससे दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। मां-बेटे को लोहिया अस्पताल में 10 दिन रखा। फायदा न मिलने पर भैंस बेचकर जुटाए 50 हजार रुपये निजी अस्पताल में इलाज में खर्च कर दिए। रुपये न होने पर बच्चे को घर ले गए। मंगलवार दोपहर में बच्चे की पेशाब बंद हो गई। इसके बाद रामसेवक ने रात साढ़े 10 बजे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया। बच्चे को कुछ इंजेक्शन लगाने के बाद वार्ड में भेज दिया। वहां रातभर बच्चा दर्द से चीखता रहा।
रामसेवक ने बताया कि उन्होंने कई बार डाक्टर से पेशाब की नली डालने का अनुरोध किया, मगर फटकार कर भगा दिया गया। बच्चा रात भर चिल्लाता रहा। गुरुवार सुबह वार्ड के स्टाफ ने उसे दबाव बनाकर बाहर निकाल दिया। बताया कि उसके पास पैसे भी नहीं हैं, जो निजी अस्पताल में ले जाएं। यदि पेशाब की नली पड़ जाती, तो कोई दिक्कत नहीं थी। वह दोपहर एक बजे तक इमरजेंसी के बाहर पटिया पर बच्चे को लिटाए रहा। रामसेवक ने बताया कि गरीबी खराब है। घर से कुछ लोगों को बुलाया है। कुछ रुपयों की व्यवस्था करके अस्पताल ले जाएंगे।
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‘इलाज से इनकार नहीं किया जा सकता। उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं आई है। यदि इलाज में लापरवाही बरती गई, तो वह इसकी जांच कराएंगे। वह इस समय जिले से बाहर आए हैं।’
-डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
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कायमगंज के गांव दोषपुर कुआखेड़ा निवासी रामसेवक की पत्नी आरती नौ दिसंबर को आग से ताप रही थीं। उसी समय खेलता हुआ आया नौ साल का बच्चा रविंद्र कुमार पीठ पर बैठ गया। असंतुलित मां और बेटा आग पर गिर गए। इससे दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। मां-बेटे को लोहिया अस्पताल में 10 दिन रखा। फायदा न मिलने पर भैंस बेचकर जुटाए 50 हजार रुपये निजी अस्पताल में इलाज में खर्च कर दिए। रुपये न होने पर बच्चे को घर ले गए। मंगलवार दोपहर में बच्चे की पेशाब बंद हो गई। इसके बाद रामसेवक ने रात साढ़े 10 बजे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया। बच्चे को कुछ इंजेक्शन लगाने के बाद वार्ड में भेज दिया। वहां रातभर बच्चा दर्द से चीखता रहा।
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रामसेवक ने बताया कि उन्होंने कई बार डाक्टर से पेशाब की नली डालने का अनुरोध किया, मगर फटकार कर भगा दिया गया। बच्चा रात भर चिल्लाता रहा। गुरुवार सुबह वार्ड के स्टाफ ने उसे दबाव बनाकर बाहर निकाल दिया। बताया कि उसके पास पैसे भी नहीं हैं, जो निजी अस्पताल में ले जाएं। यदि पेशाब की नली पड़ जाती, तो कोई दिक्कत नहीं थी। वह दोपहर एक बजे तक इमरजेंसी के बाहर पटिया पर बच्चे को लिटाए रहा। रामसेवक ने बताया कि गरीबी खराब है। घर से कुछ लोगों को बुलाया है। कुछ रुपयों की व्यवस्था करके अस्पताल ले जाएंगे।
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‘इलाज से इनकार नहीं किया जा सकता। उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं आई है। यदि इलाज में लापरवाही बरती गई, तो वह इसकी जांच कराएंगे। वह इस समय जिले से बाहर आए हैं।’
-डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।