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आश्रमों को गाय दान करेंगे मुस्लिम
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नगीना। राष्ट्रवादी संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मंगलवार को मेवात जिले की तरफ से दिल्ली स्थित एक आश्रम को गाय दान करेगा। इसका उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम भाईचारा को मजबूत करना है। आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने रविवार को अमर उजाला से बातचीत में बताया कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का गोसेवा प्रकोष्ठ मुसलमानों के साथ मिलकर आश्रमों को गोवंश दान करेगी।
उन्होंने कहा कि मंच ने अपील की है कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करें। इस्लाम कुरान की आयतों और हुजूर पाक की सुन्नतों व हदीस से जाना जाता है। पैगंबर ने कहा था कि गाय का मांस बीमारी है। इसका दूध और घी औषधि है। मंच सभी मुसलमानों से अपील करता है कि वो रसूल की सुन्नत और हदीस पर चलकर अच्छा, सच्चा और नेक इंसान बनें। मंच के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुर्शीद राजाका ने बताया कि मंगलवार को मेवात जिले की तरफ से दिल्ली आश्रम को एक गाय दान की जाएगी। इसके बाद अलग-अलग आश्रमों को मुसलमान गाय दान करेंगे। मेवात गोपालन का गढ़ है, यहां हजारों मुसलमान गाय का पालन सदियों सेे करते आ रहे हैं। बड़ी बात है कि मेवाती गायों का दूध आश्रमों के आचार्य पिएंगे। इससे हिंदू-मुस्लिम भाईचारा मजबूत होगा। मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया मांडीखेड़ा के मुफ्ती मोहम्मद रफीक अहमद ने बताया कि मुस्लिम समुदाय के लोग कोई ऐसा काम हरगिज न करें, जो फसाद पैदा करे। देवबंद का दारुल उलूम साफ कह चुका है कि किसी भी मुसलमान के लिए गाय की कुर्बानी जायज नहीं है।
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उन्होंने कहा कि मंच ने अपील की है कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करें। इस्लाम कुरान की आयतों और हुजूर पाक की सुन्नतों व हदीस से जाना जाता है। पैगंबर ने कहा था कि गाय का मांस बीमारी है। इसका दूध और घी औषधि है। मंच सभी मुसलमानों से अपील करता है कि वो रसूल की सुन्नत और हदीस पर चलकर अच्छा, सच्चा और नेक इंसान बनें। मंच के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुर्शीद राजाका ने बताया कि मंगलवार को मेवात जिले की तरफ से दिल्ली आश्रम को एक गाय दान की जाएगी। इसके बाद अलग-अलग आश्रमों को मुसलमान गाय दान करेंगे। मेवात गोपालन का गढ़ है, यहां हजारों मुसलमान गाय का पालन सदियों सेे करते आ रहे हैं। बड़ी बात है कि मेवाती गायों का दूध आश्रमों के आचार्य पिएंगे। इससे हिंदू-मुस्लिम भाईचारा मजबूत होगा। मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया मांडीखेड़ा के मुफ्ती मोहम्मद रफीक अहमद ने बताया कि मुस्लिम समुदाय के लोग कोई ऐसा काम हरगिज न करें, जो फसाद पैदा करे। देवबंद का दारुल उलूम साफ कह चुका है कि किसी भी मुसलमान के लिए गाय की कुर्बानी जायज नहीं है।
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