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Noida News: एक महीने से खराब है एमआरआई मशीन, 20 मरीजों पर पड़ रहा आर्थिक बोझ
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लोगों को निजी अस्पताल या सेंटर में दोगुने दाम में करानी पड़ रही है जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। जिम्स में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था का खामियाजा मरीजों व कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल में एक माह से एमआरआई मशीन खराब है। इस वजह से मरीजों को दोगुने दाम पर निजी सेंटर में जांच करानी पड़ रही है। वहीं सुरक्षाकर्मियों का आरोप है कि उन्हें महीने का वेतन नहीं मिला है। शिकायत के बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जिम्स में ग्रेनो ही नहीं, नोएडा, बुलंदशहर, हापुड़, गाजियाबाद और आसपास के जिलों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में एमआरआई जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधा उपलब्ध होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को काफी राहत मिलती है। मशीन खराब होने से रोजाना औसतन 20 मरीज प्रभावित हो रहे हैं। मरीजों का कहना है कि निजी अस्पताल या जांच सेंटर में एमआरआई कराने पर जेब पर बोझ बढ़ रहा है।
अस्पताल के करीब 40 सुरक्षाकर्मियों ने आरोप लगाया है कि उनको मई महीने का वेतन अब तक नहीं मिला है। इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से कई बार की जा चुकी है लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में उनका परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
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एमआरआई मशीन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित है। मशीन में आई तकनीकी खराबी को दूर कराने के लिए संबंधित कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। अस्पताल के अधिकतर सुरक्षाकर्मियों को वेतन का भुगतान कर दिया गया है। जिन कर्मचारियों को अभी वेतन नहीं मिला है उनकी सूची मंगाई गई है और मामले की जांच की जा रही है। -डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता, निदेशक, जिम्स
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। जिम्स में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था का खामियाजा मरीजों व कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल में एक माह से एमआरआई मशीन खराब है। इस वजह से मरीजों को दोगुने दाम पर निजी सेंटर में जांच करानी पड़ रही है। वहीं सुरक्षाकर्मियों का आरोप है कि उन्हें महीने का वेतन नहीं मिला है। शिकायत के बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जिम्स में ग्रेनो ही नहीं, नोएडा, बुलंदशहर, हापुड़, गाजियाबाद और आसपास के जिलों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में एमआरआई जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधा उपलब्ध होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को काफी राहत मिलती है। मशीन खराब होने से रोजाना औसतन 20 मरीज प्रभावित हो रहे हैं। मरीजों का कहना है कि निजी अस्पताल या जांच सेंटर में एमआरआई कराने पर जेब पर बोझ बढ़ रहा है।
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अस्पताल के करीब 40 सुरक्षाकर्मियों ने आरोप लगाया है कि उनको मई महीने का वेतन अब तक नहीं मिला है। इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से कई बार की जा चुकी है लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में उनका परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
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एमआरआई मशीन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित है। मशीन में आई तकनीकी खराबी को दूर कराने के लिए संबंधित कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। अस्पताल के अधिकतर सुरक्षाकर्मियों को वेतन का भुगतान कर दिया गया है। जिन कर्मचारियों को अभी वेतन नहीं मिला है उनकी सूची मंगाई गई है और मामले की जांच की जा रही है। -डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता, निदेशक, जिम्स