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Noida News: बीआईआरसी में 30,435 करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर
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-भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2025 का भव्य समापन
-1083 विदेशी खरीदारों समेत 10,854 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय बीआईआरसी (भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2025) का शुक्रवार को समापन हुआ। इस दौरान भारत के चावल क्षेत्र में वैश्विक विश्वास और व्यापारिक साझेदारी को लेकर 30,435 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आयोजित कॉन्फ्रेंस में 10,854 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें 1,083 विदेशी खरीदार और 154 प्रदर्शक थे। दूसरे दिन चार विशेष पैनल सत्र आयोजित किए गए, जिनमें चावल व्यवसाय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
किसानों के कल्याण व उन्नत खेती पर चर्चा
पहले सत्र में ‘क्वालिटी सर्टिफिकेशन और फूड सेफ्टी’ विषय पर चर्चा की गई। इसमें एसजीएस के सौमिक मंडल, क्यूसीआई की डॉ. प्रियंका सरकार और एपीडा के तरुण बजाज ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने और किसानों को हैजर्ड एनालिसिस प्रशिक्षण से जोड़ने की योजनाओं पर चर्चा की। दूसरे सत्र में ‘ऑर्गेनिक राइस एंड रिलेटेड गुड्स’ विषय पर बात हुई। एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने बताया कि पिछले वर्ष ऑर्गेनिक चावल के निर्यात में 30 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र के निदेशक डॉ. गगनेश शर्मा ने पंजाब में मिट्टी पुनर्जीवन के प्रयोगों को साझा किया। तीसरे सत्र निर्यातकों को वित्तीय और बीमा सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई।
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विकसित भारत 2047 के लिए चावल क्षेत्र की भूमिका पर मंथन
अंतिम सत्र में ‘विकसित भारत 2047 में चावल की भूमिका’ विषय पर चर्चा हुई। भारतीय राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के देव गर्ग ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) स्थिर रखने की जरूरत बताई। कार्यक्रम का समापन भारतीय चावल की विविधताओं पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक के लोकार्पण और पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ। इसमें उत्कृष्ट निर्यातकों और नवाचार करने वाले स्टार्टअप्स को सम्मानित किया गया।
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-1083 विदेशी खरीदारों समेत 10,854 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय बीआईआरसी (भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2025) का शुक्रवार को समापन हुआ। इस दौरान भारत के चावल क्षेत्र में वैश्विक विश्वास और व्यापारिक साझेदारी को लेकर 30,435 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आयोजित कॉन्फ्रेंस में 10,854 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें 1,083 विदेशी खरीदार और 154 प्रदर्शक थे। दूसरे दिन चार विशेष पैनल सत्र आयोजित किए गए, जिनमें चावल व्यवसाय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
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किसानों के कल्याण व उन्नत खेती पर चर्चा
पहले सत्र में ‘क्वालिटी सर्टिफिकेशन और फूड सेफ्टी’ विषय पर चर्चा की गई। इसमें एसजीएस के सौमिक मंडल, क्यूसीआई की डॉ. प्रियंका सरकार और एपीडा के तरुण बजाज ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने और किसानों को हैजर्ड एनालिसिस प्रशिक्षण से जोड़ने की योजनाओं पर चर्चा की। दूसरे सत्र में ‘ऑर्गेनिक राइस एंड रिलेटेड गुड्स’ विषय पर बात हुई। एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने बताया कि पिछले वर्ष ऑर्गेनिक चावल के निर्यात में 30 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र के निदेशक डॉ. गगनेश शर्मा ने पंजाब में मिट्टी पुनर्जीवन के प्रयोगों को साझा किया। तीसरे सत्र निर्यातकों को वित्तीय और बीमा सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई।
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विकसित भारत 2047 के लिए चावल क्षेत्र की भूमिका पर मंथन
अंतिम सत्र में ‘विकसित भारत 2047 में चावल की भूमिका’ विषय पर चर्चा हुई। भारतीय राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के देव गर्ग ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) स्थिर रखने की जरूरत बताई। कार्यक्रम का समापन भारतीय चावल की विविधताओं पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक के लोकार्पण और पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ। इसमें उत्कृष्ट निर्यातकों और नवाचार करने वाले स्टार्टअप्स को सम्मानित किया गया।