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Noida News: कैग की 14 रिपोर्ट विधानसभा में पेश करने के लिए एलजी को ज्ञापन सौंपा
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भाजपा विधायकों ने दिल्ली सरकार के रवैये को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया
कहा- सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर होने से बचाने के लिए रिपोर्ट को दबाया जा रहा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भाजपा विधायकों ने दिल्ली सरकार की ओर से नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 14 रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने में देरी पर आपत्ति दर्ज कराई है। शुक्रवार को उन्होंने उपराज्यपाल वीके सक्सेना से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और सरकार के रवैये को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध बताया।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता की अगुवाई में भाजपा विधायकों ने उपराज्यपाल से मुलाकात की। इस मौके पर गुप्ता ने कहा कि सरकार ने विपक्ष और भाजपा विधायकों की लगातार मांग के बावजूद विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। उपराज्यपाल ने 19-20 दिसंबर को विशेष सत्र बुलाने का निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने निर्देश का पालन नहीं किया। भाजपा विधायकों के अनुरोध और दिल्ली उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण 24 दिसंबर को मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को विवश होकर स्पीकर को लंबित ऑडिट रिपोर्ट भेजनी पड़ी। हालांकि, विधानसभा में इन्हें अब तक प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस पर भाजपा ने फिर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। कोर्ट ने स्पीकर को नोटिस जारी कर 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
नेताा प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को उजागर होने से बचाने के लिए रिपोर्ट को दबाया जा रहा है। आबकारी नीति, वित्तीय प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रदूषण जैसे प्रमुख मुद्दों का हिसाब-किताब इन रिपोर्ट में दर्ज है, जिन्हें जानबूझकर सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। कैग रिपोर्ट वित्तीय और प्रशासनिक स्थितियों का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं और इन्हें सांविधानिक नियमों के तहत समयबद्ध तरीके से प्रस्तुत करना आवश्यक है, लेकिन दिल्ली सरकार की यह देरी न केवल पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाती है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का भी उल्लंघन है।
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कहा- सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर होने से बचाने के लिए रिपोर्ट को दबाया जा रहा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भाजपा विधायकों ने दिल्ली सरकार की ओर से नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 14 रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने में देरी पर आपत्ति दर्ज कराई है। शुक्रवार को उन्होंने उपराज्यपाल वीके सक्सेना से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और सरकार के रवैये को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध बताया।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता की अगुवाई में भाजपा विधायकों ने उपराज्यपाल से मुलाकात की। इस मौके पर गुप्ता ने कहा कि सरकार ने विपक्ष और भाजपा विधायकों की लगातार मांग के बावजूद विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। उपराज्यपाल ने 19-20 दिसंबर को विशेष सत्र बुलाने का निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने निर्देश का पालन नहीं किया। भाजपा विधायकों के अनुरोध और दिल्ली उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण 24 दिसंबर को मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को विवश होकर स्पीकर को लंबित ऑडिट रिपोर्ट भेजनी पड़ी। हालांकि, विधानसभा में इन्हें अब तक प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस पर भाजपा ने फिर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। कोर्ट ने स्पीकर को नोटिस जारी कर 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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नेताा प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को उजागर होने से बचाने के लिए रिपोर्ट को दबाया जा रहा है। आबकारी नीति, वित्तीय प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रदूषण जैसे प्रमुख मुद्दों का हिसाब-किताब इन रिपोर्ट में दर्ज है, जिन्हें जानबूझकर सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। कैग रिपोर्ट वित्तीय और प्रशासनिक स्थितियों का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं और इन्हें सांविधानिक नियमों के तहत समयबद्ध तरीके से प्रस्तुत करना आवश्यक है, लेकिन दिल्ली सरकार की यह देरी न केवल पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाती है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का भी उल्लंघन है।
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