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Noida News: चालानों में हेरफेर कर प्राधिकरण को पहुंचाया 55 लाख का नुकसान, केस दर्ज

Sat, 30 Aug 2025 10:44 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 30 Aug 2025 10:44 PM IST
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Manipulation of challans caused loss of Rs 55 lakh to the authority, case registered
औद्योगिक भूखंडों के आवंटन और लीज डीड से जुड़े मामलों में फर्जीवाड़ा
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो औद्योगिक प्राधिकरण की अर्जित भूमि में औद्योगिक भूखंडों के आवंटन और लीज डीड से जुड़े मामलों में फर्जीवाड़ा सामने आया है। ठग कंपनी के तत्कालीन निदेशकों और कंपनी प्रबंधन ने बैंक में जमा राशि से संबंधित चालानों में रकम बढ़ाकर दर्शाई। इससे प्राधिकरण को 55 लाख रुपये का नुकसान हुआ। अब प्राधिकरण के सहायक महाप्रबंधक (उद्योग) सिद्धार्थ गौतम ने सूरजपुर कोतवाली में धोखाधड़ी से जुड़े दो मामलों में केस दर्ज कराया है।
कोतवाली पुलिस का कहना है कि आईपीसी की धारा-420, 467, 468, 471 में नामजद आरोपियों दिल्ली के पंकज सिंघल, सैयद हुसैन ताहिर, सैयद आबिद ताहिर, सतीश सिंघल, इरफान अहमद और अरसद इमाम के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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पहला मामला
सेक्टर ईकोटेक-1 विस्तार के औद्योगिक भूखंडों से जुड़ा है। भूखंड संख्या-239 और 240 पर करीब 2,000 वर्ग मीटर भूखंड 2005 में सतीश सिंघल के नाम आवंटित हुआ था। इसके बाद 2008 में उन्होंने मैगोन पेपर प्रा.लि. का गठन कर भूखंड कंपनी के नाम प्रतिस्थापित कराया। कंपनी में दिल्ली के सतीश सिंघल 52 फीसदी, इरफान अहमद 24 फीसदी और अरसद इमाम 24 फीसदी हिस्सेदार बनाए गए। शर्त रखी गई कि सतीश सिंघल की हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम नहीं होगी। प्राधिकरण ने किस्तों के भुगतान सुनिश्चित करने के बाद 2009 में लीज डीड करा दी और बाद में कंपनी को नो ड्यूज भी जारी कर दिया गया। 2010 में कंपनी ने भूखंड को मेसर्स दीप्ति लाल जज माल प्रा.लि. के नाम हस्तांतरित कर दिया। सत्यापन के दौरान गंभीर हेराफेरी का खुलासा हुआ कि कंपनी के निदेशकों ने एचडीएफसी बैंक में जमा राशि के दो चालानों में रकम से छेड़छाड़ की।
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-23 सितंबर 2009 में जमा चालान में 4,000 रुपये की वास्तविक जमा राशि के बजाय 20.94 लाख रुपये दर्शाए गए। इससे 20.90 लाख रुपये की वित्तीय हानि हुई।
-24 सितंबर 2009 के चालान में 7,000 रुपये की जगह 6.67 लाख रुपये अंकित किए गए। इससे 6.60 लाख रुपये की हानि हुई।

दूसरा मामला
ईकोटेक-1 विस्तार के भूखंड संख्या-145 और 146 में 2,000 वर्गमीटर भूखंड 2005 में पंकज सिंघल के नाम आवंटित हुआ था। 2008 में मेसर्स एस्से केम प्रा.लि. के नाम कर दिया गया। कंपनी में दिल्ली के पंकज सिंघल को 52, सैयद हुसैन ताहिर को 24 और सैयद आबिद ताहिर को 24 फीसदी का हिस्सेदार बनाया गया। 2009 में लीज डीड हुई और 2011 में अदेयता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। 2017 में कंपनी का स्वामित्व सपना द्विवेदी (90 फीसदी) और श्याम मोहन द्विवेदी (10 फीसदी) को सौंप दिया गया। वित्तीय सत्यापन में यह पाया गया कि कंपनी ने 2009 में जमा किए गए दो चालानों में हेराफेरी कर रकम बढ़ाकर दिखाई।
-23 सितंबर, 2009 के चालान में 9 हजार रुपये की वास्तविक जमा राशि की जगह 20.99 लाख रुपये दर्ज कराए गए।
-24 सितंबर 2009 के चालान में 7 हजार रुपये के स्थान पर 6.67 लाख रुपये अंकित कराए गए।
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