एक मिनट में 45 हजार का बिल!: 'बधाई हो ऑपरेशन सफल रहा', फिर अस्पताल को क्यों बोलना पड़ा- यह एक मानवीय भूल
दूसरी ओर अस्पताल की डॉ. प्रतिभा ने बताया कि 45 हजार रुपये लेने का आरोप निराधार है। आठ हजार रुपये इलाज का खर्चा था। उसमें भी 500 रुपये कम कर दिए गए।
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बाईं की जगह दाईं आंख का ऑपरेशन कर देने के मामले में सात वर्षीय युधिष्ठिर के शरीर में लाल रंग चकत्ते निकल आए हैं। आंख के इलाज के बाद घर आने पर उसे कई उल्टियां भी हुई थीं। बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर परिजन चिंतित हैं और दूसरे डॉक्टरों से भी सलाह ले रहे हैं। बच्चे के पिता नितिन भाटी ने चिकित्सक पर धमकी देने और बीटा-2 पुलिस पर मुकदमा नहीं दर्ज करने का आरोप भी लगाया है। उधर, अस्पताल प्रबंधन ने 45 हजार रुपये लिए जाने की बात को खारिज किया है।
बीटा-2 निवासी नितिन भाटी ने बताया कि एक हफ्ते पहले अपने बेटे की बाईं आंख में परेशानी होने के बाद गामा-1 स्थित आनंद स्पेक्ट्रम हॉस्पिटल गए थे। वहां बताया गया ऑपरेशन करने की बात कही। बेटे को एनस्थीशिया दिया गया। एक मिनट बाद ही ऑपरेशन कक्ष से बाहर आकर बोले कि ऑपरेशन सफल रहा। इसके लिए 45 हजार रुपये लिए गए। नितिन भाटी का आरोप है कि एनस्थीशिया देने के बाद से ही बेटे के पेट पर लाल चकत्ते से उभर आए हैं। घर लाने के बाद से अब तक उसे चार-पांच उल्टियां भी हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि सीएमओ से उनकी फोन पर वार्ता हुई है और शनिवार को वे पूरे मामले की लिखित शिकायत करेंगे।
परिजनों का आरोप है कि इस मामले में तीन से चार बार शिकायत दर्ज कराने थाने गए, मगर पुलिस मुकदमा नहीं दर्ज कर रही है। उधर, आनंद स्पेक्ट्रम अस्पताल की डॉ. प्रतिभा ने बताया कि जिसको ऑपरेशन कह रहे हैं वह एक प्रोसीजर है। इस मामले में नर्स से गलती हुई। उसने दूसरी आंख पर ड्रेसिंग कर दी। यह लोग बाद में अस्पताल आए और स्थानीय लोगों के साथ आकर यहां धमकाया व स्टाफ के साथ अभद्रता की। हमने बच्चे के परिवार से कहा कि वह किसी अन्य ऑप्थोलोजिस्ट को भी दिखा लें लेकिन वह दिखाने नहीं ले गए। थाना बीटा-2 प्रभारी विद्युत गोयल ने बताया कि दोनों पक्ष हमारे पास आए थे। मामला स्वास्थ्य विभाग से संबंधित है। वहां से जैसा आदेश होगा हम आगे कार्रवाई करेंगे।
इलाज के खर्च पर आमने-सामने परिजन और अस्पताल
बिना ऑपरेशन किए ही अस्पताल ने नितिन भाटी से 45 हजार रुपये वसूले जाने के मामले में भी परिजन और अस्पताल आमने-सामने हैं। परिजनों का कहना है कि तीन-चार बार की ओपीडी के बाद ऑपरेशन का समय तय हुआ। इसके बाद बच्चे को पूरी तरह बेहोश किया। इलाज के बाद 45 हजार रुपये की रकम ली गई। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इलाज का खर्च आठ हजार रुपये था। डिस्चार्ज के वक्त साढ़े सात हजार रुपये लिए गए हैं।