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ग्रेनो की तरह नोएडा के गांवों में भी तेजी से फैल रहा कोरोना संक्रमण
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नोएडा। कोरोना संक्रमण अब तक ग्रेटर नोएडा के गांवों में लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रहा था, लेकिन अब तेजी से नोएडा के गांवों में भी पैर पसारने लगा है। तुरंत जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इन गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया नहीं कराई तो स्थिति भयावह हो सकती है। सर्फाबाद निवासी एडवोकेट अमित ने बताया कि 19 दिन में उनकी मां रामेश्वरी समेत 53 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, निठारी के देवेंद्र ने बताया कि करीब 31 लोगों की जान जा चुकी है। सोरखा गांव में भी 15 मौतें हो चुकी हैं।
कोरोना संक्रमण ने ग्रेटर नोएडा और ग्रेनो वेस्ट के गांवों में मौत का आंकड़ा इतना बढ़ा दिया है कि जितनी मौतें एक साल में होती थीं। उतनी पिछले कुछ समय में हुई हैं और सिलसिला जारी है। इतना होने के बाद भी प्रशासन-स्वास्थ्य विभाग का ध्यान गांवों की ओर से नहीं है। जबकि, मुख्यमंत्री ने गांवों में तेजी से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन गांवों में न जांच हो रही है और न ही कोई दवा दी जा रही है। अधिकतर गांवों में इस समय 60 फीसदी लोग बुखार-खांसी और जुकाम आदि से ग्रस्त हैं। इन रोगों को सामान्य मानते हुए दवाई तक नहीं ले रहे हैं और न ही सतर्कता बरत रहे हैं। इससे वह स्वयं तो संक्रमित हो रहे हैं और परिजनों को भी संक्रमित कर रहे हैं। जब तक उनको ज्यादा दिक्कत नहीं होती है, तब तक डॉक्टर से संपर्क नहीं करते हैं। ऐसे में संक्रमण गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है। इससे फेफड़े प्रभावित हो जाते हैं। अंत में आक्सीजन की कमी से संक्रमित की मौत हो जाती है।
लापरवाही ले रही लोगों की जान
फेलिक्स अस्पताल के डॉक्टर डीके गुप्ता का कहना है कि यदि समय पर संक्रमण की जानकारी हो जाए तो उसे दूर किया जा सकता है। जैसे ही शरीर में सामान्य दिनों की तरह कुछ बदलाव आए तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। जिससे वह समय से कोरोना का इलाज शुरू कर सकें और यदि जरूरत समझें तो एचआर सीटी स्कैन करा सकते हैं। इससे फेफड़ों में संक्रमण का पता लग जाता है। समय से बीमारी पकड़ में आ जाने पर उसे दूर किया जा सकता है। वहीं, सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
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कोरोना संक्रमण ने ग्रेटर नोएडा और ग्रेनो वेस्ट के गांवों में मौत का आंकड़ा इतना बढ़ा दिया है कि जितनी मौतें एक साल में होती थीं। उतनी पिछले कुछ समय में हुई हैं और सिलसिला जारी है। इतना होने के बाद भी प्रशासन-स्वास्थ्य विभाग का ध्यान गांवों की ओर से नहीं है। जबकि, मुख्यमंत्री ने गांवों में तेजी से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन गांवों में न जांच हो रही है और न ही कोई दवा दी जा रही है। अधिकतर गांवों में इस समय 60 फीसदी लोग बुखार-खांसी और जुकाम आदि से ग्रस्त हैं। इन रोगों को सामान्य मानते हुए दवाई तक नहीं ले रहे हैं और न ही सतर्कता बरत रहे हैं। इससे वह स्वयं तो संक्रमित हो रहे हैं और परिजनों को भी संक्रमित कर रहे हैं। जब तक उनको ज्यादा दिक्कत नहीं होती है, तब तक डॉक्टर से संपर्क नहीं करते हैं। ऐसे में संक्रमण गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है। इससे फेफड़े प्रभावित हो जाते हैं। अंत में आक्सीजन की कमी से संक्रमित की मौत हो जाती है।
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लापरवाही ले रही लोगों की जान
फेलिक्स अस्पताल के डॉक्टर डीके गुप्ता का कहना है कि यदि समय पर संक्रमण की जानकारी हो जाए तो उसे दूर किया जा सकता है। जैसे ही शरीर में सामान्य दिनों की तरह कुछ बदलाव आए तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। जिससे वह समय से कोरोना का इलाज शुरू कर सकें और यदि जरूरत समझें तो एचआर सीटी स्कैन करा सकते हैं। इससे फेफड़ों में संक्रमण का पता लग जाता है। समय से बीमारी पकड़ में आ जाने पर उसे दूर किया जा सकता है। वहीं, सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
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