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सुपरटेक मामले में ऋणदाताओं को 8 अप्रैल तक करना होगा क्लेम
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ग्रेटर नोएडा। सुपरटेक लिमिटेड के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी कड़ी में सुपरटेक के अलग-अलग ऋणदाताओं को आठ अप्रैल तक अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) के पास क्लेम करना होगा। इसके लिए विज्ञापन जारी कर अपील की गई है।
आईआरपी की ओर से कंपनी के प्रोजेेक्ट के समाधान के लिए 180 दिन का समय दिया गया है। यह समय सीमा 21 सितंबर तक की है। इसके बाद अगर जरूरत पड़ी तो आईआरपी को 90 दिन का और समय दिया जा सकता है। ऋणदाताओं में ऑपरेशनल क्रेडिटर्स के लिए फॉर्म बी, फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के लिए फॉर्म सी, घर खरीदारों के लिए फॉर्म सीए, कर्मचारियों के लिए फॉर्म डी, कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के लिए फार्म एफ भरकर आईआरपी को भेजना होगा। इसके बाद यह तय होगा कि सुपरटेक लिमिटेड की कहां-कहां देनदारी होगी।
ऑपरेशनल क्रेडिटर्स में ऐसे लोग आएंगे जिन्होंने सुपरटेक लिमिटेड के प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए सप्लाई आदि का काम किया होगा। फाइनेंशियल क्रेडिटर्स में बैंक और ऋण देने वाली संस्थाएं आएंगी। इसके अलावा घर खरीदारों को भी अलग से क्लेम करने को कहा गया है। इससे पता चलेगा कि कितने घर खरीदर इनके कौन-कौन से प्रोजेक्ट में फंसे हुए हैं। कर्मचारियों को भी मासिक वेतन आदि के लिए क्लेम करना होगा। जब तक दिवालिया प्रक्रिया चलेगी आईआरपी के माध्यम से ही कंपनी को चलेगी। क्लेम मंगाने का दूसरा पहलू यह है कि अगर समाधान की प्रक्रिया से कोई बात नहीं बनती है और कंपनी की संपत्तियों की नीलामी होगी। इससे जो पैसा आएगा वह क्लेम करने वालों में बांटा जाएगा।
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आईआरपी की ओर से कंपनी के प्रोजेेक्ट के समाधान के लिए 180 दिन का समय दिया गया है। यह समय सीमा 21 सितंबर तक की है। इसके बाद अगर जरूरत पड़ी तो आईआरपी को 90 दिन का और समय दिया जा सकता है। ऋणदाताओं में ऑपरेशनल क्रेडिटर्स के लिए फॉर्म बी, फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के लिए फॉर्म सी, घर खरीदारों के लिए फॉर्म सीए, कर्मचारियों के लिए फॉर्म डी, कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के लिए फार्म एफ भरकर आईआरपी को भेजना होगा। इसके बाद यह तय होगा कि सुपरटेक लिमिटेड की कहां-कहां देनदारी होगी।
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ऑपरेशनल क्रेडिटर्स में ऐसे लोग आएंगे जिन्होंने सुपरटेक लिमिटेड के प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए सप्लाई आदि का काम किया होगा। फाइनेंशियल क्रेडिटर्स में बैंक और ऋण देने वाली संस्थाएं आएंगी। इसके अलावा घर खरीदारों को भी अलग से क्लेम करने को कहा गया है। इससे पता चलेगा कि कितने घर खरीदर इनके कौन-कौन से प्रोजेक्ट में फंसे हुए हैं। कर्मचारियों को भी मासिक वेतन आदि के लिए क्लेम करना होगा। जब तक दिवालिया प्रक्रिया चलेगी आईआरपी के माध्यम से ही कंपनी को चलेगी। क्लेम मंगाने का दूसरा पहलू यह है कि अगर समाधान की प्रक्रिया से कोई बात नहीं बनती है और कंपनी की संपत्तियों की नीलामी होगी। इससे जो पैसा आएगा वह क्लेम करने वालों में बांटा जाएगा।
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