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कांडा बरी : फैसला आते ही पिता व भाई ने खुद को किया घर में कैद
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पिता-पुत्र के चेहरों पर दिखी हताशा, मीडिया से नहीं की कोई बातचीत
अशोक विहार स्थित घर पर दिनभर मीडियाकर्मी दरवाजा खटखटाते रहे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अदालत ने जैसे ही गोपाल कांडा को बरी किया गीतिका के पिता व भाई हताश हो गए और मीडिया से बातचीत किए बिना दोनों सीधे अशोक विहार फेज-3 स्थित घर पहुंच गए। दिनभर मीडियाकर्मियों ने घर जाकर पिता व भाई की प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया, लेकिन दोनों ने दरवाजा नहीं खोला। पड़ोसियों से भी बातचीत नहीं की। हालांकि, सोसाइटी के गार्ड ने मीडिया से कहा कि गीतिका को न्याय नहीं मिला।
गीतिका परिवार के साथ पॉश सोसाइटी की दूसरी मंजिल पर रहती थी। गीतिका और मां अनुराधा के आत्महत्या करने के बाद पिता दिनेश व भाई अंकित ही बचे हैं। 11 साल केस चलने के बाद परिवार को फैसला अपने हक में आने की उम्मीद थी। सुबह पिता जरूरी सामान लेने के लिए घर से निकले थे तो लोगों ने उन्हें देखा था। इसके बाद किसी ने दोबारा नहीं देखा। सोसाइटी के गार्ड ने बताया कि पिता-पुत्र को कोर्ट से घर आते हुए देखा था। सुबह से मीडियाकर्मी गीतिका के घर के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पिता दिनेश और भाई अंकित ने दरवाजा नहीं खोला। एक पड़ोसी ने बताया कि गीतिका और मां अनुराधा की मौत के बाद से परिवार खामोश हो गया था। पड़ोसियों से भी कम ही बातचीत होती है। पूरी सोसाइटी को पता था कि मंगलवार को गीतिका मामले में फैसला आने वाला है। लोग डर की वजह से मामले पर प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।
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अशोक विहार स्थित घर पर दिनभर मीडियाकर्मी दरवाजा खटखटाते रहे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अदालत ने जैसे ही गोपाल कांडा को बरी किया गीतिका के पिता व भाई हताश हो गए और मीडिया से बातचीत किए बिना दोनों सीधे अशोक विहार फेज-3 स्थित घर पहुंच गए। दिनभर मीडियाकर्मियों ने घर जाकर पिता व भाई की प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया, लेकिन दोनों ने दरवाजा नहीं खोला। पड़ोसियों से भी बातचीत नहीं की। हालांकि, सोसाइटी के गार्ड ने मीडिया से कहा कि गीतिका को न्याय नहीं मिला।
गीतिका परिवार के साथ पॉश सोसाइटी की दूसरी मंजिल पर रहती थी। गीतिका और मां अनुराधा के आत्महत्या करने के बाद पिता दिनेश व भाई अंकित ही बचे हैं। 11 साल केस चलने के बाद परिवार को फैसला अपने हक में आने की उम्मीद थी। सुबह पिता जरूरी सामान लेने के लिए घर से निकले थे तो लोगों ने उन्हें देखा था। इसके बाद किसी ने दोबारा नहीं देखा। सोसाइटी के गार्ड ने बताया कि पिता-पुत्र को कोर्ट से घर आते हुए देखा था। सुबह से मीडियाकर्मी गीतिका के घर के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पिता दिनेश और भाई अंकित ने दरवाजा नहीं खोला। एक पड़ोसी ने बताया कि गीतिका और मां अनुराधा की मौत के बाद से परिवार खामोश हो गया था। पड़ोसियों से भी कम ही बातचीत होती है। पूरी सोसाइटी को पता था कि मंगलवार को गीतिका मामले में फैसला आने वाला है। लोग डर की वजह से मामले पर प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।
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