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Noida News: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर उठाए सवाल
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नई दिल्ली।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में प्रेसवार्ता आयोजित की। इसमे बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) व कई राज्यों में बंगाली भाषी प्रवासियों के उत्पीड़न पर सवाल उठाए गए।
उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया एनआरसी शैली का पिछले दरवाजे वाला अभ्यास है। करीब 2.93 करोड़ मतदाताओं से जन्म और माता-पिता की उत्पत्ति के दस्तावेज मांगे जा रहे हैंं। ये प्रक्रिया गरीब, अल्पसंख्यक और प्रवासी आबादी पर बोझ डालने जैसी है। एसआईआर प्रक्रिया राशन कार्ड सहित पहचान संबंधी दस्तावेज की व्यापक सूची को स्वीकार करने की सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश की अनदेखी करती है। इस तरह की प्रक्रिया से बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित होने की स्थिति पैदा हो सकती है। जब मतदान जैसे सांविधानिक अधिकार खतरे में पड़ते हैं तो यह न केवल प्रशासनिक विफलता बल्कि लोकतांत्रिक विश्वास के भंग होने का भी संकेत है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इतनी व्यापक कवायद शुरू करना राजनीतिक मंशा को लेकर संदेह पैदा करती है।
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जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में प्रेसवार्ता आयोजित की। इसमे बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) व कई राज्यों में बंगाली भाषी प्रवासियों के उत्पीड़न पर सवाल उठाए गए।
उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया एनआरसी शैली का पिछले दरवाजे वाला अभ्यास है। करीब 2.93 करोड़ मतदाताओं से जन्म और माता-पिता की उत्पत्ति के दस्तावेज मांगे जा रहे हैंं। ये प्रक्रिया गरीब, अल्पसंख्यक और प्रवासी आबादी पर बोझ डालने जैसी है। एसआईआर प्रक्रिया राशन कार्ड सहित पहचान संबंधी दस्तावेज की व्यापक सूची को स्वीकार करने की सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश की अनदेखी करती है। इस तरह की प्रक्रिया से बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित होने की स्थिति पैदा हो सकती है। जब मतदान जैसे सांविधानिक अधिकार खतरे में पड़ते हैं तो यह न केवल प्रशासनिक विफलता बल्कि लोकतांत्रिक विश्वास के भंग होने का भी संकेत है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इतनी व्यापक कवायद शुरू करना राजनीतिक मंशा को लेकर संदेह पैदा करती है।
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