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Noida News: जे-फार्म पूरी फसल का, आढ़ती कच्ची पर्ची पर दर्ज कर रहे नमी

Sun, 12 Oct 2025 12:35 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा Updated Sun, 12 Oct 2025 12:35 AM IST
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J-form for the entire crop, the commission agents are recording moisture on the raw slip
जगाधरी अनाज मंडी में रखी धान से भरी बोरियां। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। अनाज मंडियों में आढ़ती किसानों की धान एमएसपी पर तो खरीद रहे हैं, लेकिन नमी के नाम पर लगाए जाने वाले कट की कच्ची पर्ची थमाई जा रही है। किसान के हिसाब-किताब करते वक्त आढ़ती उनसे रुपये ले लेते हैं। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। नमी के नाम पर अवैध रूप से लगाया जा रहा यह कट किसानों के लिए मुसीबत बन गया है।
सरकार ने धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत निर्धारित कर रखी है। कई बार धान में 17 के बजाय 20 या फिर इससे ज्यादा भी नमी होती है। ऐसे में गेट पास कटने के बाद किसान को एक कच्ची पर्ची थमा दी जाती है जिस पर धान का वजन व नमी की मात्रा अंकित होती है। जब जे फार्म काटा जाता है तो उस पर एमएसपी के हिसाब से फसल का पूरा वजन होता है।
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फसल का जितना वजन जे-फार्म पर अंकित होगा उसी हिसाब से पैसा किसान के खाते में आएगा। बाद में जब किसान आढ़ती से अपना हिसाब-किताब करता है तो आढ़ती नमी के प्रति प्वाइंट की दर से राशि काट लेता है। जिले की मंडियों में 17 प्रतिशत से ऊपर 25 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कट लगाया जा रहा है।
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इसे इस उदाहरण से भी समझ सकते हैं। कोई किसान यदि मंडी में 30 क्विंटल धान लेकर आया और उसमें नमी की मात्रा 20 प्रतिशत है तो तीन प्वाइंट होने से 25 रुपये की दर से एक क्विंटल के 75 रुपये बनते हैं। 30 क्विंटल धान में यह राशि 2,250 रुपये बनती है, जो बाद में किसान से वापस ले ली जाती है।
मंडियों में खरीदा गया 2,78,440 मीट्रिक टन धान
जिले की सभी 13 मंडियों में 2,78,440 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। इसमें से 1,88,705 मीट्रिक टन धान का उठान हो चुका है। किसानों के खातों में अब तक 384 करोड़ रुपये धान की पेमेंट हो चुकी है। व्यासपुर अनाज मंडी में 24,197 मीट्रिक टन, छछरौली अनाज मंडी में 30,500 मीट्रिक टन, गुमथला राव अनाज मंडी में 5,231 मीट्रिक टन, जगाधरी अनाज मंडी में 40,454 मीट्रिक टन, जठलाना अनाज मंडी में 1,772 मीट्रिक टन, खारवन अनाज मंडी में 2,663 मीट्रिक टन, प्रतापनगर अनाज मंडी में 40,530 मीट्रिक टन, सरस्वतीनगर अनाज मंडी में 65,319 मीट्रिक टन, रादौर अनाज मंडी में 31,734 मीट्रिक टन, रणजीतपुर अनाज मंडी में 13,008 मीट्रिक टन, रसूलपुर मंडी में 6,411 मीट्रिक टन, साढौरा अनाज मंडी में 16,341 मीट्रिक टन, यमुनानगर अनाज मंडी में 280 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है।
20 प्रतिशत होनी चाहिए नमी की मात्रा : मंदीप सिंह

भारतीय किसान यूनियन के निदेशक मंदीप सिंह रोडछप्पर का कहना है कि सरकार को धान में नमी की मात्रा 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करनी चाहिए। क्योंकि अब हाथ के बजाय मशीनों से धान की कटाई हो रही है। इससे फसल को सूखने का समय नहीं मिलता। हाथ से कटाई होने पर तीन-चार दिन में नमी कम हो जाती थी। वहीं किसानों को भी चाहिए कि वह फसल को अच्छी तरह सूखा कर ही मंडी में ले जाए। इससे न तो नमी के नाम पर कट लगेगा और न ही कच्ची पर्ची दी जाएगी। मंडियों में कट लगने का खेल बंद होना चाहिए।

किसान के खाते में जे फार्म के हिसाब से ही एमएसपी पर राशि आती है। इसलिए फसल का सारा पैसा किसान के खाते में ही जाता है। बाद में किसान उस पैसे का क्या करता है इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार है। - विशाल गर्ग, सचिव, मार्केट कमेटी जगाधरी।

जगाधरी अनाज मंडी में रखी धान से भरी बोरियां। संवाद

जगाधरी अनाज मंडी में रखी धान से भरी बोरियां। संवाद

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