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Noida News: किसान की मौत मामले में जांच शुरू, मृतक किसान के बेटे और लेखपाल के बयान दर्ज हुए

Thu, 06 Nov 2025 12:59 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 06 Nov 2025 12:59 AM IST
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Investigation begins in farmer's death case, statements of son and accountant recorded
संभल। कोतवाली क्षेत्र के गांव चिमियावली निवासी किसान रामौतार (55) की मौत के मामले में जांच शुरू हो गई है। बुधवार को एसडीएम न्यायिक निधि पटेल और तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह चिमियावली पहुंचे। जान गंवाने वाले किसान के बड़े बेटे चमन के लिखित बयान लिए। संबंधित लेखपाल के भी बयान लिए गए हैं। रिपोर्ट बनाकर डीएम को भेजी गई है। बताते चलें कि एक महीने पहले छोटे बेटे की हादसे में हुई मौत के मुआवजे के लिए जरूरी अभिलेख की खातिर चकबंदी लेखपाल के चक्कर काट कर रहे किसान रामौतार की हार्ट अटैक से जान चली गई थी। परिजनों ने चकबंदी लेखपाल पर 1200 रुपये की घूस लेने और परेशान करने का आरोप लगाया था। रामौतार की मौत के बाद एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा।
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डीएम के द्वारा इस मामले में जांच कराई गई। जांच करने के बाद एसडीएम न्यायिक निधि पटेल ने बताया कि किसान के बड़े बेटे के बयान लिए हैं। जबकि लेखपाल के भी बयान लिए गए हैं। रिपोर्ट तैयार करके डीएम को भेजी गई है। हालांकि, किसान के बेटे चमन ने लेखपाल के उस बयान का भी खंडन किया है, जिसमें लेखपाल ने कहा था कि खतौनी की नकल निकालकर पेशकार को दे दी थी।
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चमन ने कहा कि लेखपाल से फोन पर जब बात हुई थी तो उन्होंने नायब तहसीलदार के साथ पैमाइश पर जाने की बात कही थी। यदि खतौनी की नकल निकालकर दे दी होती तो उसके पिता की जान न जाती।
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खतौनी की नकल देने में कुछ समय लगता है, एक सप्ताह तक किसान क्यों भटका

चकबंदी कार्यालय पर खतौनी की नकल पाने के लिए तमाम किसान हर दिन पहुंचते हैं। अधिवक्ताओं का सहारा किसानों को लेना पड़ता है। तब कहीं जाकर उनको खतौनी की नकल मिल पाती है। संभल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता का कहना है कि खतौनी की पक्की नकल बस्ते से निकालकर तत्काल दी जा सकती है। इसमें कुछ ही देर लगती है। एक किसान एक नकल पाने के लिए एक सप्ताह तक क्यों परेशान रहा। यह जांच का विषय है। अध्यक्ष ने कहा कि किसानों को बेवजह परेशान तो किया जाता है लेकिन इस पर अधिकारी ध्यान नहीं देते। अध्यक्ष ने आगे कहा कि चकबंदी विभाग के अधिकारियों की गैरमौजूदगी में दूसरे विभाग के अधिकारी चार्ज चला रहे हैं। इसलिए भी किसानों की समस्या का तत्काल समाधान नहीं हो रहा है। डीडीसी, एसओसी और चकबंदी अधिकारी के पद रिक्त चल रहे हैं। जो अधिकारी चार्ज संभाल रहे हैं वह समय नहीं दे पा रहे। ऐसे में किसानों की समस्या को कौन सुने।
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