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अंतरराष्ट्रीय वाहन चोर गिरोह का खुलासा, सरगना एथलीट सहित तीन गिरफ्तार
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बरामद गाड़ियां
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नोएडा। दिल्ली-एनसीआर से चोरी के लग्जरी वाहन खरीदकर म्यांमार, भूटान और पूर्वोत्तर के राज्यों में बेचने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने सरगना एथलीट सहित तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान हरियाणा के रोहतक निवासी अमित और भिवानी निवासी अजमेर सिंह और संदीप सिंह के रूप में हुई है। अमित गिरोह का सरगना है। वह शॉटपुट खिलाड़ी है। जबकि उसकी पत्नी पूर्णिमा फोगाट राष्ट्रीय स्तर की एथलीट है। सोशल मीडिया पर दोनों के अच्छी खासी तादाद में फॉलोअर हैं। गिरोह का खुलासा करने वाली सेक्टर-58 कोतवाली टीम को पुलिस आयुक्त ने 25 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
सेक्टर-62 की एनआईबी चौकी के पास से गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने रविवार को रेंज रोवर, फॉर्च्यूनर, क्रेटा समेत 17 लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं। आरोपी इंश्योरेंस सर्वेयर से सांठगांठ कर एक्सीडेंट के बाद जीरो लॉस घोषित होने वाली गाड़ियों का नंबर हासिल करते थे, जिन्हें उसी मॉडल की चोरी की गई गाड़ियों पर डालकर पूर्वोत्तर के गिरोह को बेच दिया जाता था। जो उन वाहनों को आगे म्यांमार और भूटान में बेचता है।
नोएडा जोन के एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि गिरोह मेरठ से लेकर मुरादाबाद तक के वाहन चोरों के संपर्क में था। कई कंपनियों के इंश्योरेंस सर्वेयर भी इनके संपर्क में थे। गिरोह का पर्दाफाश सेक्टर-58 थाना पुलिस एवं एंटी व्हीकल थेप्ट टीम ने किया है। एसीपी 2 रजनीश वर्मा की अगुवाई वाली इस टीम में सर्विलांस सेल के भी पुलिसकर्मी शामिल रहे। पुलिस गिरोह का सहयोग करे वाले इंश्योरेंस कर्मियों पर भी जल्द कार्रवाई कर सकती है। पुलिस के मुताबिक संदीप, अमित और अजमेर सिंह ने इंश्योरेंस सर्वेयरों का एक व्हॉट्सएप ग्रुप भी बना रखा था।
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दुर्घटना में खराब गाड़ियों के नंबर का करते थे इस्तेमाल
दुर्घटना होने पर बहुत सी गाड़ियां चलाने लायक नहीं रह जाती। इंश्योरेंस क्लेम में उनको (जीरो लॉस ) घोषित कर दिया जाता है। गिरोह के बदमाश इन गाड़ियों का नंबर और आरसी की कॉपी इंश्योरेंस सर्वेयर से हासिल कर लेते थे। फिर उसी मॉडल और रंग की चोरी की गाड़ी हासिल करने के बाद उस पर जीरो लॉस घोषित हो चुकी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज कर देते और कागजात बनाकर बेच देते थे।
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कई गिरोह से जुड़े हैं तार, आरोपियों पर दर्ज हैं कई मामले
नोएडा। वाहन चोरी में पकड़े गए बदमाशों के तार कई गिरोह से जुड़े हैं। आरोपियों पर भी पहले से कई मामले दर्ज हैं। वर्ष 2020 में पकड़े गए मुरादाबाद के कुलदीप गैंग के बदमाश मोहम्मद अली जैदी का कनेक्शन भी इन आरोपियों के साथ है। अमित पर 13 से अधिक मामले हैं। जेल से बाहर आने के बाद उसने दोबारा संदीप और अजमेर सिंह के साथ मिलकर वारदात शुरू की। सेक्टर-58 थाना पुलिस ने 14 जुलाई को अली गैंग के वाहन चोर आरिफ को पकड़ा था। उससे पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली थीं। चोरी के वाहन बेचने वाले गैंग के मास्टर माइंड अमित को सेक्टर-20 थाना पुलिस ने 7 महीने स्कॉर्पियो चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था।
डायरी से मिला100 से ज्यादा चोरी के वाहनों का रिकॉर्ड
एसीपी रजनीश वर्मा के मुताबिक अजमेर सिंह के पास से एक डायरी मिली है। इसमें दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय कई वाहन चोर गिरोहों की जानकारी दर्ज है। उन वाहनों की जानकारी भी है जिनके नंबर बदल कर बेचा जा चुका था। ऐसी 100 से ज्यादा लग्जरी गाड़ियों का रिकॉड मिला है।
दिल्ली पुलिस की फाइल से चकमा देने की थी कोशिश
गाड़ियों की हेराफेरी के लिए गिरोह के सदस्य दिल्ली पुलिस या अन्य प्रतिष्ठित विभागों के नाम की फाइल का इस्तेमाल करता था। फाइल को ड्राइविंग सीट के सामने इस तरह रखा जाता था कि लोग चकमा खा जाए और ज्यादा पूछताछ न करें।
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सेक्टर-62 की एनआईबी चौकी के पास से गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने रविवार को रेंज रोवर, फॉर्च्यूनर, क्रेटा समेत 17 लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं। आरोपी इंश्योरेंस सर्वेयर से सांठगांठ कर एक्सीडेंट के बाद जीरो लॉस घोषित होने वाली गाड़ियों का नंबर हासिल करते थे, जिन्हें उसी मॉडल की चोरी की गई गाड़ियों पर डालकर पूर्वोत्तर के गिरोह को बेच दिया जाता था। जो उन वाहनों को आगे म्यांमार और भूटान में बेचता है।
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नोएडा जोन के एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि गिरोह मेरठ से लेकर मुरादाबाद तक के वाहन चोरों के संपर्क में था। कई कंपनियों के इंश्योरेंस सर्वेयर भी इनके संपर्क में थे। गिरोह का पर्दाफाश सेक्टर-58 थाना पुलिस एवं एंटी व्हीकल थेप्ट टीम ने किया है। एसीपी 2 रजनीश वर्मा की अगुवाई वाली इस टीम में सर्विलांस सेल के भी पुलिसकर्मी शामिल रहे। पुलिस गिरोह का सहयोग करे वाले इंश्योरेंस कर्मियों पर भी जल्द कार्रवाई कर सकती है। पुलिस के मुताबिक संदीप, अमित और अजमेर सिंह ने इंश्योरेंस सर्वेयरों का एक व्हॉट्सएप ग्रुप भी बना रखा था।
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दुर्घटना में खराब गाड़ियों के नंबर का करते थे इस्तेमाल
दुर्घटना होने पर बहुत सी गाड़ियां चलाने लायक नहीं रह जाती। इंश्योरेंस क्लेम में उनको (जीरो लॉस ) घोषित कर दिया जाता है। गिरोह के बदमाश इन गाड़ियों का नंबर और आरसी की कॉपी इंश्योरेंस सर्वेयर से हासिल कर लेते थे। फिर उसी मॉडल और रंग की चोरी की गाड़ी हासिल करने के बाद उस पर जीरो लॉस घोषित हो चुकी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज कर देते और कागजात बनाकर बेच देते थे।
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कई गिरोह से जुड़े हैं तार, आरोपियों पर दर्ज हैं कई मामले
नोएडा। वाहन चोरी में पकड़े गए बदमाशों के तार कई गिरोह से जुड़े हैं। आरोपियों पर भी पहले से कई मामले दर्ज हैं। वर्ष 2020 में पकड़े गए मुरादाबाद के कुलदीप गैंग के बदमाश मोहम्मद अली जैदी का कनेक्शन भी इन आरोपियों के साथ है। अमित पर 13 से अधिक मामले हैं। जेल से बाहर आने के बाद उसने दोबारा संदीप और अजमेर सिंह के साथ मिलकर वारदात शुरू की। सेक्टर-58 थाना पुलिस ने 14 जुलाई को अली गैंग के वाहन चोर आरिफ को पकड़ा था। उससे पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली थीं। चोरी के वाहन बेचने वाले गैंग के मास्टर माइंड अमित को सेक्टर-20 थाना पुलिस ने 7 महीने स्कॉर्पियो चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था।
डायरी से मिला100 से ज्यादा चोरी के वाहनों का रिकॉर्ड
एसीपी रजनीश वर्मा के मुताबिक अजमेर सिंह के पास से एक डायरी मिली है। इसमें दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय कई वाहन चोर गिरोहों की जानकारी दर्ज है। उन वाहनों की जानकारी भी है जिनके नंबर बदल कर बेचा जा चुका था। ऐसी 100 से ज्यादा लग्जरी गाड़ियों का रिकॉड मिला है।
दिल्ली पुलिस की फाइल से चकमा देने की थी कोशिश
गाड़ियों की हेराफेरी के लिए गिरोह के सदस्य दिल्ली पुलिस या अन्य प्रतिष्ठित विभागों के नाम की फाइल का इस्तेमाल करता था। फाइल को ड्राइविंग सीट के सामने इस तरह रखा जाता था कि लोग चकमा खा जाए और ज्यादा पूछताछ न करें।

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी