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धनौरी वेटलैंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनेगा पक्षी विहार
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ग्रेटर नोएडा। दनकौर का धनौरी वेटलैंड जिले का दूसरा पक्षी विहार बनेगा। वन विभाग ने इस संबंध में यमुना प्राधिकरण से एनओसी मांगी है। साथ ही वेटलैंड की जमीन अधिसूचित करने की मांग की है। प्राधिकरण की एनओसी मिलने के बाद विभाग वेटलैंड को पक्षी विहार के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। साथ ही वेटलैंड को रामसर साइट घोषित कराने की पैरवी भी करेगा। दनकौर और बिलासपुर क्षेत्र को प्राधिकरण पर्यटन स्थल बनाने की तैयारी में है।
धनौरी वेटलैंड करीब 100 बीघा जमीन पर फैला हुआ है। हर वर्ष यहां पर लाखों की संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। प्राधिकरण इसे विकसित कर पर्यटन स्थल बनाने की योजना पर काम कर रहा है। वन विभाग ने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। पिछले सप्ताह वन विभाग ने यमुना प्राधिकरण के सीईओ से मिलकर वार्ता भी की थी। वेटलैंड 100 बीघा जमीन पर है और विभाग की तरफ से 150 बीघा जमीन मांगी है। इससे वहां पर सभी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। प्राधिकरण से जमीन को अधिसूचित करने व वेटलैंड को विकसित करने की एनओसी मांगी है। इसके बाद वेटलैंड को रामसर साइट घोषित कराने की प्रक्रिया चलाई जाएगी। ओखला के बाद यह दूसरा पक्षी विहार होगा। इस वेटलैंड को सारस का गढ़ कहा जाता है। चूंकि यहां पर सबसे अधिक यही पक्षी निवास करते हैं।
रामसर साइट घोषित होने के बाद धनौरी वेटलैंड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आ जाएगा। रामसर साइट उन्हीं वेटलैंड को घोषित किया जाता है, जहां पर अच्छा पर्यावरण, पानी की उचित व्यवस्था और बड़ी संख्या में पक्षी पहुंचते हो।
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क्या है रामसर
ईरान के शहर रामसर में 1971 में वेटलैंड पर सम्मेलन हुआ था। रामसर कन्वेंशन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने से पहले वाइल्ड लाइफ, ईको सिस्टम समेत कई मानकों की जांच की जाती है। 160 देशों ने रामसर कन्वेंशन स्वीकार किया है। रामसर साइट में दर्ज होने से वेटलैंड को मिलने वाले बजट और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भी बढ़ोतरी होती है।
यमुना प्राधिकरण को वेटलैंड की जमीन अधिसूचित करनी है। प्राधिकरण से एनओसी भी मांगी है। एनओसी मिलने के बाद धनौरी वेटलैंड को रामसर साइट घोषित कराने और पक्षी विहार बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-पीके श्रीवास्तव, प्रभागीय वनाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर
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धनौरी वेटलैंड करीब 100 बीघा जमीन पर फैला हुआ है। हर वर्ष यहां पर लाखों की संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। प्राधिकरण इसे विकसित कर पर्यटन स्थल बनाने की योजना पर काम कर रहा है। वन विभाग ने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। पिछले सप्ताह वन विभाग ने यमुना प्राधिकरण के सीईओ से मिलकर वार्ता भी की थी। वेटलैंड 100 बीघा जमीन पर है और विभाग की तरफ से 150 बीघा जमीन मांगी है। इससे वहां पर सभी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। प्राधिकरण से जमीन को अधिसूचित करने व वेटलैंड को विकसित करने की एनओसी मांगी है। इसके बाद वेटलैंड को रामसर साइट घोषित कराने की प्रक्रिया चलाई जाएगी। ओखला के बाद यह दूसरा पक्षी विहार होगा। इस वेटलैंड को सारस का गढ़ कहा जाता है। चूंकि यहां पर सबसे अधिक यही पक्षी निवास करते हैं।
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रामसर साइट घोषित होने के बाद धनौरी वेटलैंड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आ जाएगा। रामसर साइट उन्हीं वेटलैंड को घोषित किया जाता है, जहां पर अच्छा पर्यावरण, पानी की उचित व्यवस्था और बड़ी संख्या में पक्षी पहुंचते हो।
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क्या है रामसर
ईरान के शहर रामसर में 1971 में वेटलैंड पर सम्मेलन हुआ था। रामसर कन्वेंशन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने से पहले वाइल्ड लाइफ, ईको सिस्टम समेत कई मानकों की जांच की जाती है। 160 देशों ने रामसर कन्वेंशन स्वीकार किया है। रामसर साइट में दर्ज होने से वेटलैंड को मिलने वाले बजट और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भी बढ़ोतरी होती है।
यमुना प्राधिकरण को वेटलैंड की जमीन अधिसूचित करनी है। प्राधिकरण से एनओसी भी मांगी है। एनओसी मिलने के बाद धनौरी वेटलैंड को रामसर साइट घोषित कराने और पक्षी विहार बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-पीके श्रीवास्तव, प्रभागीय वनाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर