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Noida News: कब्जा न देने पर ब्याज समेत जमा धनराशि लौटाने के निर्देश
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-आयोग ने सामिहा इंटरनेशनल बिल्डर को 30 दिन में पैसा लौटाने को कहा
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोेएडा। प्लाट के पूरा पैसा लेने के बाद भी कब्जा नहीं देने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने सामिहा इंटरनेशनल बिल्डर को 6 फीसदी ब्याज समेत पूरा पैसा 30 दिन में लौटाने का आदेश दिया है। पांच हजार रुपये वाद व्यय के भी देने होंगे। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने सुनवाई की।
गाजियाबाद के लोनी निवासी रविंद्र सिंह ने सामिहा इंटरनेशनल बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड की आवासीय योजना में एक प्लाट 200 वर्ग गज का 11.50 लाख रुपये में तय किया। 25 फरवरी 2008 को एग्रीमेंट हुआ। बिल्डर को 11.50 लाख रुपये का भुगतान किया। शेष 60 हजार रुपये कब्जा देने और रजिस्ट्री के दौरान देना तय हुआ। कई बार कहने के बाद बिल्डर ने प्लाट पर कब्जा नहीं दिया। कब्जा नहीं देने पर पैसा लौटाने के लिए कहा गया। बिल्डर ने नही पैसा लौटाया। जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर करके जमा पैसा दिलाने की गुहार लगाई गई।
आयोग में सुनवाई के दौरान बिल्डर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उत्तराखंड में आवासीय योजना में प्लाट बुक किया था, जो व्यवसायिक उद्देश्य के लिए लिया था। यह उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि कोई भी संपत्ति व्यवसाय कमाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह नहीं कहा जा सकता है। बिल्डर ने पूरी रकम लेने के बाद भी कब्जा नहीं देने और न ही पैसा लौटाने पर सेवा में कमी की है। आयोग ने 6 फीसदी ब्याज समेत जमा की धनराशि 11.50 लाख रुपये बिल्डर को 30 दिन में लौटाने का आदेश दिया।
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ग्रेटर नोेएडा। प्लाट के पूरा पैसा लेने के बाद भी कब्जा नहीं देने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने सामिहा इंटरनेशनल बिल्डर को 6 फीसदी ब्याज समेत पूरा पैसा 30 दिन में लौटाने का आदेश दिया है। पांच हजार रुपये वाद व्यय के भी देने होंगे। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने सुनवाई की।
गाजियाबाद के लोनी निवासी रविंद्र सिंह ने सामिहा इंटरनेशनल बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड की आवासीय योजना में एक प्लाट 200 वर्ग गज का 11.50 लाख रुपये में तय किया। 25 फरवरी 2008 को एग्रीमेंट हुआ। बिल्डर को 11.50 लाख रुपये का भुगतान किया। शेष 60 हजार रुपये कब्जा देने और रजिस्ट्री के दौरान देना तय हुआ। कई बार कहने के बाद बिल्डर ने प्लाट पर कब्जा नहीं दिया। कब्जा नहीं देने पर पैसा लौटाने के लिए कहा गया। बिल्डर ने नही पैसा लौटाया। जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर करके जमा पैसा दिलाने की गुहार लगाई गई।
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आयोग में सुनवाई के दौरान बिल्डर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उत्तराखंड में आवासीय योजना में प्लाट बुक किया था, जो व्यवसायिक उद्देश्य के लिए लिया था। यह उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि कोई भी संपत्ति व्यवसाय कमाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह नहीं कहा जा सकता है। बिल्डर ने पूरी रकम लेने के बाद भी कब्जा नहीं देने और न ही पैसा लौटाने पर सेवा में कमी की है। आयोग ने 6 फीसदी ब्याज समेत जमा की धनराशि 11.50 लाख रुपये बिल्डर को 30 दिन में लौटाने का आदेश दिया।
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