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Noida News: एचआईवी और शुगर मरीजों पर टीबी का खतरा अधिक
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-समय पर जांच और पूरा इलाज जरूरी
-जिम्स के डॉट सेंटर में हर महीने पहुंच रहे 25 से अधिक मरीज, समय पर जांच कराने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। एचआईवी संक्रमण और डायबिटीज (शुगर) से पीड़ित मरीजों में टीबी (तपेदिक) होने का खतरा अधिक रहता है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण ऐसे लोगों में टीबी का संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसे देखते हुए चिकित्सक एचआईवी और डायबिटीज के मरीजों को टीबी के लक्षणों के प्रति सतर्क रहने और समय पर जांच कराने की सलाह दे रहे हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के डॉट सेंटर में भी टीबी के उपचार और जांच के लिए महीने में 25 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। हालांकि, यह शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। एचआईवी संक्रमण से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे टीबी होने और संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, डायबिटीज के मरीजों में भी टीबी विकसित होने की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में दोनों बीमारियों से पीड़ित लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। जिम्स के डॉट सेंटर के इंचार्ज डॉ. गौरव सक्सेना का कहना है कि टीबी के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहना, बुखार आना, रात में पसीना आना, वजन कम होना, भूख न लगना और खांसी के साथ खून आना टीबी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेकर जांच करानी चाहिए। एचआईवी और डायबिटीज से पीड़ित लोगों को लक्षणों का इंतजार किए बिना भी डॉक्टर से टीबी की स्क्रीनिंग के संबंध में परामर्श लेना चाहिए।
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-जिम्स के डॉट सेंटर में हर महीने पहुंच रहे 25 से अधिक मरीज, समय पर जांच कराने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। एचआईवी संक्रमण और डायबिटीज (शुगर) से पीड़ित मरीजों में टीबी (तपेदिक) होने का खतरा अधिक रहता है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण ऐसे लोगों में टीबी का संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसे देखते हुए चिकित्सक एचआईवी और डायबिटीज के मरीजों को टीबी के लक्षणों के प्रति सतर्क रहने और समय पर जांच कराने की सलाह दे रहे हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के डॉट सेंटर में भी टीबी के उपचार और जांच के लिए महीने में 25 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। हालांकि, यह शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। एचआईवी संक्रमण से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे टीबी होने और संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, डायबिटीज के मरीजों में भी टीबी विकसित होने की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में दोनों बीमारियों से पीड़ित लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। जिम्स के डॉट सेंटर के इंचार्ज डॉ. गौरव सक्सेना का कहना है कि टीबी के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहना, बुखार आना, रात में पसीना आना, वजन कम होना, भूख न लगना और खांसी के साथ खून आना टीबी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेकर जांच करानी चाहिए। एचआईवी और डायबिटीज से पीड़ित लोगों को लक्षणों का इंतजार किए बिना भी डॉक्टर से टीबी की स्क्रीनिंग के संबंध में परामर्श लेना चाहिए।
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