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जाति प्रमाणपत्र में आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग पर रोक की मांग पर जवाब तलब
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नई दिल्ली। जाति प्रमाणपत्र जारी करते हुए उन पर कथित आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग न करने का निर्देश प्राधिकारियों को देने का आग्रह हाईकोर्ट में याचिका दायर कर किया गया है। हाईकोर्ट ने याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। प्रतिवादी के वकील ने याचिका पर निर्देश लेकर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इसके बाद खंडपीठ ने सुनवाई 31 अगस्त के लिए तय कर दी।
पेश याचिका अखिल भारतीय गिहारा समाज जागृति परिषद ने अपने अध्यक्ष सुधीर कुमार गिहारा के जरिये दायर की है। इसमें कहा गया है कि सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले जाति प्रमाणपत्रों में अभद्र एवं आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया जाता है। परिषद का कहना है कि इन शब्दों को हटाने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया था लेकिन उन्होंने इस दिशा में कुछ नहीं किया।
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याची की ओर से अधिवक्ता प्राग चावला ने कहा कि इस समुदाय को गिहारा नाम से जाना जाता है और ये अनुसूचित जाति के तौर पर मान्यता प्राप्त है। इसलिए जाति प्रमाणपत्र में अन्य आपत्तिजनक एवं अभद्र शब्द प्रयोग करने के बजाय गिहारा शब्द के प्रयोग पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि ऐसे शब्दों का प्रयोग मानवता को लज्जित करता है। इसके साथ भारतीय संविधान में दिए समानता एवं सम्मान के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन करता है। प्रतिवादियों पर एससी-एसटी प्रताड़ना रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों को लागू कराने की जिम्मेदारी है। वह समुदाय के जाति प्रमाणपत्रों में ऐसे आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग कर उक्त अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर सकते।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। प्रतिवादी के वकील ने याचिका पर निर्देश लेकर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इसके बाद खंडपीठ ने सुनवाई 31 अगस्त के लिए तय कर दी।
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पेश याचिका अखिल भारतीय गिहारा समाज जागृति परिषद ने अपने अध्यक्ष सुधीर कुमार गिहारा के जरिये दायर की है। इसमें कहा गया है कि सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले जाति प्रमाणपत्रों में अभद्र एवं आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया जाता है। परिषद का कहना है कि इन शब्दों को हटाने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया था लेकिन उन्होंने इस दिशा में कुछ नहीं किया।
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याची की ओर से अधिवक्ता प्राग चावला ने कहा कि इस समुदाय को गिहारा नाम से जाना जाता है और ये अनुसूचित जाति के तौर पर मान्यता प्राप्त है। इसलिए जाति प्रमाणपत्र में अन्य आपत्तिजनक एवं अभद्र शब्द प्रयोग करने के बजाय गिहारा शब्द के प्रयोग पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि ऐसे शब्दों का प्रयोग मानवता को लज्जित करता है। इसके साथ भारतीय संविधान में दिए समानता एवं सम्मान के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन करता है। प्रतिवादियों पर एससी-एसटी प्रताड़ना रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों को लागू कराने की जिम्मेदारी है। वह समुदाय के जाति प्रमाणपत्रों में ऐसे आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग कर उक्त अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर सकते।