मानसिक रूप से बीमार कर रही गर्मी: तनाव-अवसाद के मामले बढ़े, दिमागी अस्थिरता का खतरा; विशेषज्ञों ने दी यह सलाह
भीषण गर्मी शारीरिक के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। यह दिमाग के रसायनों को प्रभावित कर तनाव, चिड़चिड़ापन और मानसिक असंतुलन के मामले बढ़ा रही है।
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भीषण गर्मी अब केवल शारीरिक बीमारियों का कारण नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी तेजी से दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण उल्टी, दस्त, बुखार, थकान और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं के साथ-साथ तनाव, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और मानसिक असंतुलन के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
दरअसल, अत्यधिक गर्मी का सीधा प्रभाव दिमाग के रसायनों पर पड़ता है, जिससे मानसिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में गर्मी के दौरान अवसाद और मानसिक तनाव से जुड़े मरीजों की संख्या बढ़ रही है। चिकित्सकों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी का सीधा असर दिमाग के रसायनों पर पड़ता है, जिससे उनका संतुलन बिगड़ जाता है और मानसिक अस्थिरता की स्थिति पैदा हो सकती है।
जिम्स के मनोरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक भारती ने बताया कि गर्म मौसम में नींद की कमी, शरीर में पानी की कमी और लगातार असहजता मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इसके कारण लोगों में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, थकान, तनाव और गुस्से जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि इस मौसम में सामान्य रूप से स्वस्थ व्यक्ति भी मानसिक रूप से अस्थिर महसूस कर सकता है। हर दिन दो से तीन मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं।
गर्मी से करें बचाव
- डॉ. अभिषेक का कहना है कि गर्मी के मौसम में अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, संतुलित और हल्का आहार लेना, धूप में कम से कम निकलना और शरीर को ठंडा रखने के उपाय अपनाना जरूरी है। इसके अलावा, नियमित दिनचर्या बनाए रखना और पर्याप्त नींद लेना मानसिक संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित होता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार चिड़चिड़ापन, घबराहट, बेचैनी या मानसिक अस्थिरता महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेने से स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है।