अस्थियों का लॉकडाउन: कभी सोचा नहीं था सांस बंद होने के बाद भी 'सांस' के लिए तरसेंगे, ना जाने कब खत्म होगा ये इंतजार
ऐसा लगता है आम आदमी के जीवन में अब बस इंतजार ही बचा है। कोरोना हो गया तो बेहतर इलाज का इंतजार, भर्ती हो गए तो ऑक्सीजन का इंतजार, हालत ज्यादा खराब हुई तो दवाई का इंतजार, डॉक्टर सही से देख लें इस बात का इंतजार, अगर अपना कोई चला गया तो शव मिलने का इंतजार, शव मिल गया तो अंतिम संस्कार का इंतजार, अंतिम संस्कार हो गया तो अब मुक्ति का इंतजार और इन सबके बीच में कोरोना के खत्म होने का इंतजार। ऐसे ही एक इंतजार के बारे में हम आपको बताने वाले हैं जो मौत के बाद भी जारी है...
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बल्लभगढ़ में कोरोना संक्रमण से दम तोड़ने वाले लोगों के परिजन अपनों की अस्थियों लेने नहीं पहुंच रहे। ऐसे में अस्थियों को बहते पानी में प्रवाहित करने की परंपरा न सिर्फ टूट रही है, बल्कि कई लोगों की अस्थियों को श्मशान घाट संचालक समिति ही पानी में प्रवाहित कर रही है। बल्लभगढ़ श्मशान घाट में इस समय 80 से ज्यादा मृतकों की अस्थियां मौजूद है, जिनको अभी तक अपनों का इंतजार है। वहीं कुछ अस्थियों को समिति द्वारा यमुना में विसर्जित किया गया है।
बिजनौर: शवों को हाथ लगाने से भी कतरा रहे परिजन
जिला अस्पताल में कई मौत ऐसी हुई, जिनके परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया। ऐसे में पुलिस शवों को लेकर गंगा बैराज घाट गई, लेकिन परिजनों ने दाह संस्कार करने से भी मुंह मोड़ लिया। अधिकांश मामलों में परिजन शवों को हाथ लगाने से भी बच रहे थे। ऐसे भी लोग थे जिनके पास लकड़ी के लिए पैसा नहीं था और वे खुद दाह संस्कार नहीं कर सकते थे। ऐसे में शवों का दाह संस्कार करने से लेकर उनकी अस्थियां तक को विसर्जित करने का जिम्मा नमामि गंगे संस्था ने उठाया।
दिल्ली: फोन तक नहीं उठा रहे परिजन
कोरोना संक्रमण का खतरा होने के कारण श्मशान घाटों में एक हजार से अधिक मृतकों की अस्थियों को लेने अपने ही नहीं पहुंचे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें कुछ अस्थियां छह माह से एक वर्ष पुरानी हो गई हैं। अब तो कॉल करन पर इनके परिजन फोन भी नहीं उठा रहे हैं।
आगरा: अस्थियों को अब भी है अपनों का इंतजार
मोक्षस्थली पर अस्थि रूपी फूल मोक्ष के लिए इंतजार कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण या अन्य वजह से काल के गाल में समा गए लोगों की अस्थियां अभी गंगा में प्रवाहित होने का इंतजार कर रही हैं। अप्रैल से लेकर 15 मई तक शवों का अंतिम संस्कार करने के बाद कुछ परिवार अस्थियां लेने नहीं पहुंचे हैं। कई परिजनों ने विद्युत शवदाह गृह के प्रभारी को कोरोना लहर थमने के बाद अस्थियां ले जाने के लिए कहा है। ऐसे कई परिवार हैं जिनमें सभी लोग क्वारंटीन हुए थे। इस कारण भी अस्थियां लेने नहीं पहुंचे हैं। कुछ लोग लॉकडाउन के खुलने का इंतजार कर रहे है।
देहरादून: लॉकर हो गए फुल, बोरे में रखी जा रही अस्थियां
26 अप्रैल से प्रदेश सरकार की ओर से लगाए कोविड कर्फ्यू के चलते लोग अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार नहीं जा पा रहे हैं। जिसके चलते लक्खीबाग स्थित मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार होने के बाद रखी गई अस्थियों से सभी 18 लॉकर फुल हो गए हैं। ऐसे में अस्थियों को बोरों में रखा जा रहा है।