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मशीन से कूड़े का चालान काटने वाला देश का पहला प्राधिकरण बनेगा ग्रेनो
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ग्रेटर नोएडा। शहर में कूड़े का ढेर लगाने वालों से मौके पर ही जुर्माना वसूला जाएगा। ग्रेनो प्राधिकरण ने एचडीएफसी बैंक के साथ मिलकर प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन तैयार करवाई है। इसका ट्रायल शुरू हो गया है। जुर्माने का डाटा प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 लागू है। इसके तहत सभी बड़े कूड़ा उत्पादकों को खुद प्रबंधन करना होता है। प्राधिकरण छोटे समूह के कूड़े को उठाता है। इसके लिए तय शुल्क भी लेता है। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए प्राधिकरण जागरूकता अभियान के साथ ही गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना भी लगा रहा है।
अब तक प्राधिकरण की टीम निरीक्षण के दौरान कूड़े का ढेर मिलने पर मैनुअल जुर्माना लगाती रही है, लेकिन अब मशीन से तुरंत चालान कर जुर्माना वसूला जाएगा। इस मशीन से मौके पर ही स्लिप भी मिल जाएगी। जिसका चालान कटेगा, उसे स्लिप दे दी जाएगी। सीईओ नरेंद्र भूषण के समक्ष जन स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी डीजीएम सलिल यादव, प्रबंधक वैभव नागर और प्राधिकरण की सलाहकार संस्था अर्नेस्ट एंड यंग की टीम ने प्रस्तुतिकरण भी दिया। सीईओ ने कहा कि ट्रायल सफल रहा तो शीघ्र लागू किया जाएगा। टीम का दावा है कि पीओएस मशीन से चालान की सुविधा अब तक देश में कहीं भी नहीं है। सबसे पहले ग्रेटर नोएडा से इसकी शुरुआत होने जा रही है।
93 गांवों में सीवेज की समस्या का होगा जल्द समाधान
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने ग्रेटर नोएडा के 93 गांवों में सीवेज और गंदे पानी की निकासी की समस्या पर बड़ा फैसला लिया है। एक याचिका पर एनजीटी ने एक टीम का गठन किया है, जो समस्या का जल्द समाधान करेगी। टीम में शासन से लेकर जिला स्तर के अधिकारी हैं। टीम से 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है। अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने बताया कि मिलक लच्छी गांव निवासी कर्मवीर सिंह और सुनपुरा निवासी प्रदीप कुमार ने एनजीटी में एक याचिका दाखिल की है। इसमें 93 गांवों में सीवेज और गंदे पानी की निकासी नहीं होने की समस्या को उठाया।
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एनजीटी को बताया कि ग्रेटर नोएडा में तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र का बुरा हाल है। याचिका पर सुनवाई कर एनजीटी ने एक टीम गठित की है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ग्रेनो प्राधिकरण, डीएम और यूपी शहरी विकास सचिव समिति का हिस्सा हैं। एनजीटी ने कहा है कि जो भी व्यक्ति या अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन नहीं करेगा। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पानी निकासी की समस्या सबसे बड़ी है। एनजीटी ने 93 गांवों की पूरी रिपोर्ट 15 दिन में मांगी है। टीम को गांवों का दौरा कर कार्ययोजना तैयार कर देनी होगी, ताकि सीवेज व गंदे पानी की समस्या का निस्तारण हो सके।
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अब तक प्राधिकरण की टीम निरीक्षण के दौरान कूड़े का ढेर मिलने पर मैनुअल जुर्माना लगाती रही है, लेकिन अब मशीन से तुरंत चालान कर जुर्माना वसूला जाएगा। इस मशीन से मौके पर ही स्लिप भी मिल जाएगी। जिसका चालान कटेगा, उसे स्लिप दे दी जाएगी। सीईओ नरेंद्र भूषण के समक्ष जन स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी डीजीएम सलिल यादव, प्रबंधक वैभव नागर और प्राधिकरण की सलाहकार संस्था अर्नेस्ट एंड यंग की टीम ने प्रस्तुतिकरण भी दिया। सीईओ ने कहा कि ट्रायल सफल रहा तो शीघ्र लागू किया जाएगा। टीम का दावा है कि पीओएस मशीन से चालान की सुविधा अब तक देश में कहीं भी नहीं है। सबसे पहले ग्रेटर नोएडा से इसकी शुरुआत होने जा रही है।
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93 गांवों में सीवेज की समस्या का होगा जल्द समाधान
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने ग्रेटर नोएडा के 93 गांवों में सीवेज और गंदे पानी की निकासी की समस्या पर बड़ा फैसला लिया है। एक याचिका पर एनजीटी ने एक टीम का गठन किया है, जो समस्या का जल्द समाधान करेगी। टीम में शासन से लेकर जिला स्तर के अधिकारी हैं। टीम से 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है। अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने बताया कि मिलक लच्छी गांव निवासी कर्मवीर सिंह और सुनपुरा निवासी प्रदीप कुमार ने एनजीटी में एक याचिका दाखिल की है। इसमें 93 गांवों में सीवेज और गंदे पानी की निकासी नहीं होने की समस्या को उठाया।
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एनजीटी को बताया कि ग्रेटर नोएडा में तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र का बुरा हाल है। याचिका पर सुनवाई कर एनजीटी ने एक टीम गठित की है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ग्रेनो प्राधिकरण, डीएम और यूपी शहरी विकास सचिव समिति का हिस्सा हैं। एनजीटी ने कहा है कि जो भी व्यक्ति या अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन नहीं करेगा। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पानी निकासी की समस्या सबसे बड़ी है। एनजीटी ने 93 गांवों की पूरी रिपोर्ट 15 दिन में मांगी है। टीम को गांवों का दौरा कर कार्ययोजना तैयार कर देनी होगी, ताकि सीवेज व गंदे पानी की समस्या का निस्तारण हो सके।