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Dussehra: पर्यावरण को ध्यान में रखकर तैयार हो रहे रावण, ग्रीन पटाखों का होगा प्रयोग, नहीं उठेगा हानिकारक धुआं

Fri, 11 Oct 2024 01:06 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 11 Oct 2024 01:06 PM IST
सार

पर्यावरण प्रदूषण में कमी लाने के लिए नोएडा की रामलीला समितियों ने रावण के पुतले बनाने में प्रयोग होने वाली आतिशबाजी के लिए ग्रीन पटाखों का प्रयोग किया है। यह केमिकल युक्त पटाखों की तरह ही तेज आवाज भी करेंगे लेकिन हानिकारक धुआ नहीं उठेगा।

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Go Green crackers will be used for the fireworks used in making the effigy of Ravan
पर्यावरण को ध्यान में रखकर तैयार हो रहे रावण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नोएडा में धूमधाम से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। जिसमें नौ दिन रामलीला के मंचन के बाद दसवें दिन दशहरा की रात करीब 12 बजे भगवान राम दशानन यानि रावण का वध करते हैं और रावण के रूप में उसके पुतले को जलाया जाता है। कई फीट के बने रावण के पुतले के जलते ही लोगों में एक अलग ही जोश, उत्साह और उमंग देखने को मिलता है।

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इसके साथ ही होने वाली आतिशबाजी इस उमंग को और बढ़ा देती है। लेकिन इस बीच सबसे प्रमुख पर्यावरण प्रदूषण की चिंता बढ़ जाती है। शहर की हवा और खतरनाक हो जाती है। ऐसे में पर्यावरण प्रदूषण में कमी लाने के लिए शहर की रामलीला समितियों ने रावण के पुतले बनाने में प्रयोग होने वाली आतिशबाजी के लिए ग्रीन पटाखों का प्रयोग किया है। यह केमिकल युक्त पटाखों की तरह ही तेज आवाज भी करेंगे लेकिन हानिकारक धुआं नहीं उठेगा।
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सेक्टर 21ए स्थित नोएडा स्टेडियम में श्री सनातन धर्म रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला के महासचिव संजय बाली ने बताया कि उन्होने रावण के साथ साथ मेघनाद और कुंभकर्ण का पुतला बनवाने में लगभग तीन लाख का खर्चा किया है। जिसमें करीब एक लाख से भी अधिक के पटाखों का प्रयोग किया गया है। जिसमें करीब 80 प्रतिशत ग्रीन पटाखों का प्रयोग किया गया है। जिससे ज्यादा धुंआ नही होगा और पर्यावरण को भी कोई नुकसान नही होगा। 
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वहीं, सेक्टर-46 में श्री राम लखन धार्मिक रामलीला समिति की ओर से तैयार किए गए रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के बारे में लीला वाचक कृष्णा स्वामी ने बताया कि वह सिर्फ ठंडे यानि ग्रीन पटाखों का ही प्रयोग कर रहे हैं, सुरक्षा दृष्टि को ध्यान में रखते हुए रावण समेत अन्य पुतलों की लंबाई भी कम रखी गई है। 


इसके साथ ही सेक्टर-62 में आयोजित रामलीला समिति के महासचिव मुन्ना लाल शर्मा ने बताया कि रावण को बनाने के लिए लकड़ी और पेपर समेत रंग बिरंगी लाइटों का प्रयोग किया जा रहा है। आतिश बाजी के लिए ग्रीन पटाखों का प्रयोग किया गया है। दशहरे के दिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रावण के पुतले के करीब 100 मीटर की दूरी तक सार्वजनित प्रवेश वर्जित रहेगा, एहतियातन भारी पुलिस बल भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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