फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Government should not decide the age of marriage

सरकार तय न करे निकाह की उम्र

Tue, 21 Dec 2021 11:18 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 21 Dec 2021 11:18 PM IST
विज्ञापन
Government should not decide the age of marriage
पुन्हाना। केंद्र सरकार के लड़कियों की शादी की आयु सीमा 21 वर्ष करने के प्रस्ताव दिए जाने का विरोध शुरू हो गया है। मेवात के उलमा
विज्ञापन

ने भी इस मसले पर बैठक कर अपनी राय रखी।
मंगलवार को मेवात के शीर्ष नेतृत्व के उलमा की बैठक फिरोजपुर झिरका स्थित आयशा कालोनी में हुई। अध्यक्षता जमीअत उलमा हिंद के मेवात जिला अध्यक्ष मौलाना हकीमुद्दीन उटावडी ने की। मौलाना साबिर कासमी ने बताया की केंद्र सरकार द्वारा लड़की की शादी की उम्र 21 साल की गई है। निकाह मानव जीवन की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है, लेकिन निकाह किस आयु में हो इसके लिए किसी आयु को मानक नहीं बनाया जा सकता। मौलाना डॉ. रफीक आजाद ने कहा कि शादी का संबंध जहां स्वास्थ्य से है, वहीं समाज में नैतिक मूल्यों की सुरक्षा और समाज को अनैतिकता से बचाने से भी है। इसलिए न केवल इस्लाम बल्कि अन्य धर्मों में भी शादी की कोई आयु सीमा तय नहीं की गई है। उस धर्म के मानने वालों के स्वविवेक पर रखा गया है। यदि कोई लड़का या लड़की 21 वर्ष से पूर्व निकाह की आवश्यकता महसूस करता है और निकाह के बाद के दायित्व का निर्वहन करने में सक्षम है तो उसको रोकना अत्याचार ही नहीं बल्कि एक वयस्क व्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप है।
समाज में इसके कारण अपराध को बढ़ावा मिल सकता है। मौलाना कासमी ने कहा कि 18 वर्ष या 21 वर्ष शादी की न्यूनतम आयु तय कर देना और इससे पूर्व निकाह को कानून के विरुद्ध घोषित करना न ही लड़कियों के हित में और न ही किसी भी समाज के लिए लाभदायक है।
विज्ञापन

जमीअत उलमा हरियाणा के उपाध्यक्ष मौलाना उस्मान रूपडाका, नूंह जिला अध्यक्ष मौलाना हकीमुददीन उटावडी और पलवल के जिला अध्यक्ष मोलाना साबिर कासमी का कहना है कि जमाने की रफ्तार के साथ वैसे भी कम आयु में शादी का रिवाज खत्म होता जा रहा है। कुछ परिस्थितियां ऐसी आती हैं कि तय आयु से पूर्व ही निकाह कर देने में लड़की का हित होता है। इसलिए जमीअत उलमा हिंद मेवात के पदाधिकारी सरकार से मांग करते हैं कि ऐसे हानिकारक कानून बनाने से परहेज करे। इस अवसर पर हाजी मोहम्मद रमजान और डाक्टर मौलाना रफीक आजाद सहित कई प्रमुख उलमा मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed