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Noida News: मोटापे के कारणों पर शोध करेंगे बीआरडी मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ
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आईसीएमआर ने स्वीकृत किए प्रोजेक्ट्स, मिलेगा अनुदान
पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पीजी की पढ़ाई करने वाले एक छात्र को मोटापा और उसके कारणों पर शोध करने की मंजूरी मिली है। इस शोध प्रस्ताव को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मंजूरी देते हुए अनुदान स्वीकृत किया है। इस वर्ष बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पांच छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर शोध के लिए मंजूरी मिली है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के शोध विंग के इंचार्ज डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि देशभर के लगभग 780 मेडिकल कॉलेजों से हर साल 70 हजार से अधिक पीजी विद्यार्थी किसी न किसी विषय पर अपना शोध कार्य करते हैं। इसमें से केवल 100 सर्वश्रेष्ठ शोध प्रस्तावों को आईसीएमआर की तरफ से अनुदान दिया जाता है। कॉलेज के एक छात्र को पहली बार यह सम्मान प्राप्त हुआ है। इस शोध के लिए एक लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने इस उपलब्धि पर कॉलेज के शिक्षकों व छात्रों को बधाई दी है।
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यूरिक एसिड बढ़ा है तो न्यूरोपैथी का खतरा अधिक
मेडिकल कॉलेज के जेआर डॉ. रोमिला गौतम ने डायबिटिक ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी की संभावना पर शोध कार्य पूरा किया है। इनका निष्कर्ष है कि मधुमेह के मरीजों में यूरिक एसिड का स्तर अधिक होने पर न्यूरोपैथी का खतरा ज्यादा रहता है। यह अध्ययन 392 मरीजों पर किया गया है। कुछ दिन पहले ही इसे राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सेमिनार में सर्वश्रेष्ठ पांच शोध में शामिल किया गया था। डॉ. रोमिला ने बताया कि डायबिटिक ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी ऐसी बीमारी है, जिसमें मरीज के हृदय, श्वसन तंत्र और शरीर की अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियाें का संतुलन बिगड़ जाता है। इसकी जांच की प्रक्रिया काफी जटिल है लेकिन इस शोध में केवल यूरिक एसिड का स्तर मापकर ही संभावित रोगी की पहचान हो सकेगी।
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पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पीजी की पढ़ाई करने वाले एक छात्र को मोटापा और उसके कारणों पर शोध करने की मंजूरी मिली है। इस शोध प्रस्ताव को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मंजूरी देते हुए अनुदान स्वीकृत किया है। इस वर्ष बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पांच छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर शोध के लिए मंजूरी मिली है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के शोध विंग के इंचार्ज डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि देशभर के लगभग 780 मेडिकल कॉलेजों से हर साल 70 हजार से अधिक पीजी विद्यार्थी किसी न किसी विषय पर अपना शोध कार्य करते हैं। इसमें से केवल 100 सर्वश्रेष्ठ शोध प्रस्तावों को आईसीएमआर की तरफ से अनुदान दिया जाता है। कॉलेज के एक छात्र को पहली बार यह सम्मान प्राप्त हुआ है। इस शोध के लिए एक लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने इस उपलब्धि पर कॉलेज के शिक्षकों व छात्रों को बधाई दी है।
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यूरिक एसिड बढ़ा है तो न्यूरोपैथी का खतरा अधिक
मेडिकल कॉलेज के जेआर डॉ. रोमिला गौतम ने डायबिटिक ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी की संभावना पर शोध कार्य पूरा किया है। इनका निष्कर्ष है कि मधुमेह के मरीजों में यूरिक एसिड का स्तर अधिक होने पर न्यूरोपैथी का खतरा ज्यादा रहता है। यह अध्ययन 392 मरीजों पर किया गया है। कुछ दिन पहले ही इसे राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सेमिनार में सर्वश्रेष्ठ पांच शोध में शामिल किया गया था। डॉ. रोमिला ने बताया कि डायबिटिक ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी ऐसी बीमारी है, जिसमें मरीज के हृदय, श्वसन तंत्र और शरीर की अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियाें का संतुलन बिगड़ जाता है। इसकी जांच की प्रक्रिया काफी जटिल है लेकिन इस शोध में केवल यूरिक एसिड का स्तर मापकर ही संभावित रोगी की पहचान हो सकेगी।
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