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Noida News: व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज पड़ते ही मौके पर जुट जाते हैं 30 से अधिक बदमाश
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अकटहवा पुल गैंगवार : मारपीट, रंगदारी और हत्या की कोशिश का लेते हैं ठेका
24 से अधिक मामलों में नामजद, 16 से 35 वर्ष तक के युवा सक्रिय
गोरखपुर में सक्रिय हैं कई ऐसे व्हाट्सएप गैंग, सोशल मीडिया पर खुलेआम करते हैं ताकत का प्रदर्शन
जंगल कौड़िया (गोरखपुर)। अकटहवा पुल गैंगवार मामले की जांच तेज हो गई है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि जिले में कई ऐसे गैंग सक्रिय हैं जो व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इन गैंग में 30 से अधिक बदमाश जुड़े हैं जो किसी भी विवाद की जानकारी मिलते ही कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच जाते हैं। गैंग के गुर्गे रुपये लेकर मारपीट, रंगदारी वसूली, जमीन कब्जा और हत्या की कोशिश जैसे अपराधों का ठेका लेते हैं।
यही वजह है कि हाल के दिनों में शहर के कई इलाकों में अचानक होने वाली मारपीट, रंगदारी और फायरिंग की घटनाएं बढ़ गई हैं। इनमें सबसे कुख्यात गैंग में एके-47, लाल गैंग 7171, रेड टीम, महाकाल ग्रुप, बिच्छू ग्रुप, देवा, गैंगस्टर, एके-47, गुंडों की टोली, ईगल आदि शामिल हैं।
गिरोह के गुर्गों के बीच आपसी तालमेल इतना मजबूत है कि कोई भी गुर्गा मदद मांगते हुए व्हाट्सएप ग्रुप पर मैसेज डालता है तो देखते ही देखते करीब 30 युवक बाइक और कारों से मौके पर पहुंच जाते हैं। उनके पास तमंचे, रॉड, लाठी-डंडे और धारदार हथियार रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, गैंग के गुर्गे व्हाट्सएप ग्रुप से आपस में जुड़े हैं। ग्रुप में शामिल किसी की ओर से घटना की जानकारी दिए जाने व सहयोग मांगे जाने पर आधे घंटे के भीतर जुट जाते हैं फिर किसी को भी पीटकर भाग जाते हैं।
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गैंग में 16 से 35 वर्ष तक के युवा शामिल
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इन गैंग में 16 से लेकर 35 वर्ष तक के युवा शामिल हैं। अधिकांश बेरोजगार हैं और कुछ छोटे-मोटे ठेकेदारों या भूमाफिया के संपर्क में रहते हैं। कई गुर्गे पहले से ही लूट, मारपीट, रंगदारी और आर्म्स एक्ट के मामलों में जेल जा चुके हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गोरखपुर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में इनके खिलाफ 24 से से अधिक केस दर्ज हैं।
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सोशल मीडिया पर भी एक्टिव, साइबर पुलिस कर रही निगरानी
गैंग के गुर्गे सोशल मीडिया पर भी बेहद सक्रिय हैं। इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट पर हथियारों के साथ तस्वीरें और वीडियो पोस्ट कर अपने गैंग के पहचान का प्रचार करते हैं। कुछ बदमाश खुद को एके-47 बॉयज, लाल गैंग 7171, रेड टीम, महाकाल ग्रुप, बिच्छू ग्रुप, देवा, गैंगस्टर, एके-47, गुंडों की टोली, ईगल, एम जैसे नामों से पेश करते हैं। साइबर टीम ने इन अकाउंट्स की निगरानी शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिये ये गैंग नए युवाओं को अपराध की ओर आकर्षित कर रहे हैं।
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अकटहवा घाट गैंगवार से खुली पोल
बीते सोमवार को अकटहवा घाट पर हुई गैंगवार ने इन व्हाट्सएप गैंग की असलियत उजागर कर दी है। वारदात के बाद पुलिस ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि हमले से कुछ देर पहले ही ग्रुप में मदद चाहिए का मैसेज डालकर लोकेशन भेजा गया था। इसके बाद देखते ही देखते दर्जनों युवक मौके पर पहुंच गए और ताबड़तोड़ मारपीट व फायरिंग की घटना को अंजाम दिया।
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वर्जनगैंगवार की जांच में यह सामने आया है कि कुछ आपराधिक समूह व्हाट्सएप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर अपराध की साजिश कर रहे हैं। सभी संदिग्ध ग्रुपों और उनके सदस्यों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- जितेंद्र श्रीवास्तव, एसपी नार्थ
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24 से अधिक मामलों में नामजद, 16 से 35 वर्ष तक के युवा सक्रिय
गोरखपुर में सक्रिय हैं कई ऐसे व्हाट्सएप गैंग, सोशल मीडिया पर खुलेआम करते हैं ताकत का प्रदर्शन
जंगल कौड़िया (गोरखपुर)। अकटहवा पुल गैंगवार मामले की जांच तेज हो गई है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि जिले में कई ऐसे गैंग सक्रिय हैं जो व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इन गैंग में 30 से अधिक बदमाश जुड़े हैं जो किसी भी विवाद की जानकारी मिलते ही कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच जाते हैं। गैंग के गुर्गे रुपये लेकर मारपीट, रंगदारी वसूली, जमीन कब्जा और हत्या की कोशिश जैसे अपराधों का ठेका लेते हैं।
यही वजह है कि हाल के दिनों में शहर के कई इलाकों में अचानक होने वाली मारपीट, रंगदारी और फायरिंग की घटनाएं बढ़ गई हैं। इनमें सबसे कुख्यात गैंग में एके-47, लाल गैंग 7171, रेड टीम, महाकाल ग्रुप, बिच्छू ग्रुप, देवा, गैंगस्टर, एके-47, गुंडों की टोली, ईगल आदि शामिल हैं।
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गिरोह के गुर्गों के बीच आपसी तालमेल इतना मजबूत है कि कोई भी गुर्गा मदद मांगते हुए व्हाट्सएप ग्रुप पर मैसेज डालता है तो देखते ही देखते करीब 30 युवक बाइक और कारों से मौके पर पहुंच जाते हैं। उनके पास तमंचे, रॉड, लाठी-डंडे और धारदार हथियार रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, गैंग के गुर्गे व्हाट्सएप ग्रुप से आपस में जुड़े हैं। ग्रुप में शामिल किसी की ओर से घटना की जानकारी दिए जाने व सहयोग मांगे जाने पर आधे घंटे के भीतर जुट जाते हैं फिर किसी को भी पीटकर भाग जाते हैं।
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गैंग में 16 से 35 वर्ष तक के युवा शामिल
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इन गैंग में 16 से लेकर 35 वर्ष तक के युवा शामिल हैं। अधिकांश बेरोजगार हैं और कुछ छोटे-मोटे ठेकेदारों या भूमाफिया के संपर्क में रहते हैं। कई गुर्गे पहले से ही लूट, मारपीट, रंगदारी और आर्म्स एक्ट के मामलों में जेल जा चुके हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गोरखपुर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में इनके खिलाफ 24 से से अधिक केस दर्ज हैं।
सोशल मीडिया पर भी एक्टिव, साइबर पुलिस कर रही निगरानी
गैंग के गुर्गे सोशल मीडिया पर भी बेहद सक्रिय हैं। इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट पर हथियारों के साथ तस्वीरें और वीडियो पोस्ट कर अपने गैंग के पहचान का प्रचार करते हैं। कुछ बदमाश खुद को एके-47 बॉयज, लाल गैंग 7171, रेड टीम, महाकाल ग्रुप, बिच्छू ग्रुप, देवा, गैंगस्टर, एके-47, गुंडों की टोली, ईगल, एम जैसे नामों से पेश करते हैं। साइबर टीम ने इन अकाउंट्स की निगरानी शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिये ये गैंग नए युवाओं को अपराध की ओर आकर्षित कर रहे हैं।
अकटहवा घाट गैंगवार से खुली पोल
बीते सोमवार को अकटहवा घाट पर हुई गैंगवार ने इन व्हाट्सएप गैंग की असलियत उजागर कर दी है। वारदात के बाद पुलिस ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि हमले से कुछ देर पहले ही ग्रुप में मदद चाहिए का मैसेज डालकर लोकेशन भेजा गया था। इसके बाद देखते ही देखते दर्जनों युवक मौके पर पहुंच गए और ताबड़तोड़ मारपीट व फायरिंग की घटना को अंजाम दिया।
वर्जनगैंगवार की जांच में यह सामने आया है कि कुछ आपराधिक समूह व्हाट्सएप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर अपराध की साजिश कर रहे हैं। सभी संदिग्ध ग्रुपों और उनके सदस्यों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- जितेंद्र श्रीवास्तव, एसपी नार्थ