विद्यालय केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास का माध्यम भी है। इसलिए छात्राओं को पढ़ाई के साथ उनके स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान के प्रति जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक है। विशेष रूप से किशोरावस्था और माहवारी से जुड़ी सही जानकारी देकर उन्हें आत्मविश्वासी बनाया जा सकता है। महावारी एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, लेकिन जानकारी और सुविधाओं के अभाव में कई छात्राएं इस दौरान स्कूल आने से कतराती हैं। ऐसे में महिला शिक्षिकाओं की जिम्मेदारी है कि वे बेटियों से खुलकर संवाद करें, उनकी झिझक दूर करें और उन्हें सही स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दें। छात्राओं को यह समझाना जरूरी है कि माहवारी कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का सामान्य हिस्सा है। मैं विद्यालय में कक्षा पांच की छात्राओं के लिए नियमित जागरूकता सत्र आयोजित करती हूं। समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को बुलाकर खुली चर्चा कराई जाती है। छात्राओं को व्यक्तिगत स्वच्छता, सैनिटरी पैड के सुरक्षित उपयोग और किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर तुरंत शिक्षिका या अभिभावकों को बताने के लिए प्रेरित किया जाता है। विद्यालय में माहवारी सुरक्षा प्रबंधन बैंक भी स्थापित किया गया है, जिसके माध्यम से जरूरतमंद छात्राओं को हर महीने सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाते हैं।
- पूनम कौशिक, शिक्षिका, पीएमश्री विद्यालय, कानीगढ़ी, जेवर