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Noida News: संक्रमणों की निगरानी का केंद्र बना जिम्स
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ग्रेटर नोएडा। जिम्स में अब पिस्सू, घुन, शरीर की जूं आदि से होने वाली संक्रामक बीमारियों के बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी), वेल्लोर के नेशनल रेफरेंस सेंटर फॉर रिकेट्सियल डिजीज ने जिम्स को नेशनल रिकेट्सियल सर्विलांस (एनआरएस) प्रोग्राम के तहत नॉर्थ जोन के लिए ‘स्पोक सेंटर’ के तौर पर चुना है। इससे स्क्रब टाइफस समेत रिकेट्सियल संक्रमणों की पहचान, निगरानी और नियंत्रण के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रिकेट्सियल बीमारियां बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों का एक समूह हैं। इनमें स्क्रब टाइफस, म्यूरिन टाइफस, एपिडेमिक टाइफस और स्पॉटेड फीवर ग्रुप के संक्रमण प्रमुख हैं। इनमें से कई बीमारियां संक्रमित टिक, घुन, पिस्सू या जूं जैसे छोटे परजीवियों के काटने से मनुष्यों में पहुंचती हैं। समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर कुछ संक्रमण गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं।
जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि इस पहल से संक्रामक बीमारियों की निगरानी के लिए संस्थान की क्षमता मजबूत होगी और रिकेट्सियल बीमारियों की जल्द पहचान तथा उन्हें नियंत्रित करने के राष्ट्रीय प्रयासों में मदद मिलेगी।
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विशेषज्ञों की टीम संभालेगी जिम्मेदारी
एनआरएस प्रोग्राम के तहत जिम्स में चिकित्सकीय और प्रयोगशाला स्तर पर निगरानी को मजबूत किया जाएगा। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वरुण गोयल को साइट कोऑर्डिनेटर बनाया गया है। डॉ. मीतू सिंह, डॉ. आदित्य कुमार और डॉ. सोनल सिंह क्लिनिकल कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम करेंगे। वैज्ञानिक डॉ. रॉबिन मारवाल प्रयोगशाला से जुड़े कार्यों के समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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रिकेट्सियल बीमारियां बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों का एक समूह हैं। इनमें स्क्रब टाइफस, म्यूरिन टाइफस, एपिडेमिक टाइफस और स्पॉटेड फीवर ग्रुप के संक्रमण प्रमुख हैं। इनमें से कई बीमारियां संक्रमित टिक, घुन, पिस्सू या जूं जैसे छोटे परजीवियों के काटने से मनुष्यों में पहुंचती हैं। समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर कुछ संक्रमण गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं।
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जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि इस पहल से संक्रामक बीमारियों की निगरानी के लिए संस्थान की क्षमता मजबूत होगी और रिकेट्सियल बीमारियों की जल्द पहचान तथा उन्हें नियंत्रित करने के राष्ट्रीय प्रयासों में मदद मिलेगी।
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विशेषज्ञों की टीम संभालेगी जिम्मेदारी
एनआरएस प्रोग्राम के तहत जिम्स में चिकित्सकीय और प्रयोगशाला स्तर पर निगरानी को मजबूत किया जाएगा। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वरुण गोयल को साइट कोऑर्डिनेटर बनाया गया है। डॉ. मीतू सिंह, डॉ. आदित्य कुमार और डॉ. सोनल सिंह क्लिनिकल कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम करेंगे। वैज्ञानिक डॉ. रॉबिन मारवाल प्रयोगशाला से जुड़े कार्यों के समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।