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Noida News: चेक बाउंस मामले में सत्र न्यायालय ने बरकरार रखी सजा
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। चेक बाउंस मामले में अदालत ने आरोपी मनोज बर्मन की दांडिक अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश एनआईएक्ट की अदालत द्वारा 29 मई 2025 को सुनाई गई सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है। मामला थाना फेज-2 नोएडा क्षेत्र से जुड़ा है और परिवादी लव सूरी की शिकायत पर दर्ज हुआ था। परिवादी उपहार वस्तुओं की आपूर्ति का व्यवसाय करते हैं। उन्होंने सितंबर 2015 में मनोज बर्मन को कई खेप में उपहार सामग्री भेजी थी। जिसका कुल बिल 4,03,700 रुपये बना था।
इसके भुगतान के लिए बर्मन ने पहले 1,14,350 रुपये का चेक दिया था, जो बाउंस होने पर अलग मुकदमे में समझौते से निपटाया गया और भुगतान हो गया। लेकिन शेष 2,89,350 रुपये की देनदारी बकाया रह गई। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान न होने पर परिवाद दायर किया गया। विचारण न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन माह के साधारण कारावास और 2.25 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। जिसमें 2.20 लाख रुपये परिवादी को और 5,000 रुपये राज्य सरकार को देने का आदेश दिया गया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट का निर्णय सही ठहराया।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। चेक बाउंस मामले में अदालत ने आरोपी मनोज बर्मन की दांडिक अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश एनआईएक्ट की अदालत द्वारा 29 मई 2025 को सुनाई गई सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है। मामला थाना फेज-2 नोएडा क्षेत्र से जुड़ा है और परिवादी लव सूरी की शिकायत पर दर्ज हुआ था। परिवादी उपहार वस्तुओं की आपूर्ति का व्यवसाय करते हैं। उन्होंने सितंबर 2015 में मनोज बर्मन को कई खेप में उपहार सामग्री भेजी थी। जिसका कुल बिल 4,03,700 रुपये बना था।
इसके भुगतान के लिए बर्मन ने पहले 1,14,350 रुपये का चेक दिया था, जो बाउंस होने पर अलग मुकदमे में समझौते से निपटाया गया और भुगतान हो गया। लेकिन शेष 2,89,350 रुपये की देनदारी बकाया रह गई। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान न होने पर परिवाद दायर किया गया। विचारण न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन माह के साधारण कारावास और 2.25 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। जिसमें 2.20 लाख रुपये परिवादी को और 5,000 रुपये राज्य सरकार को देने का आदेश दिया गया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट का निर्णय सही ठहराया।
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