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कार में गैंगरेप: सफेदपोशों के गठजोड़ से पनपा काला कारोबार, सपा राज में भी गनर और BJP में भी; घोषित होगा इनाम
Wed, 03 Jan 2024 10:36 AM IST
शाहरुख खान
जेपी शर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
जेपी शर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 03 Jan 2024 10:36 AM IST
सार
नोएडा सेक्टर-39 थाना क्षेत्र में सामूहिक दुष्कर्म का आरोपी स्क्रैप-सरिया माफिया रविंद्र नागर उर्फ रवि राजनीतिक ढाल से खुद को कानून के शिकंजे से बचाता रहा है। पांच साल पहले पुलिस ने रंगदारी और सरिया चोरी के मामले में गिरफ्तार कर उसे जेल भेजा था।
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Gangster Sundar Bhati
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले में कभी गैंगस्टर सुंदर भाटी गिरोह का सरिया-स्क्रैप के काले कारोबार में वर्चस्व था। लेकिन नेता, पुलिस और सफेदपोशों की मदद से रवि काना के गिरोह का दखल इस अवैध कारोबार में बढ़ता गया। पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बावजूद गिरोह पर कार्रवाई के बजाय पुलिस संरक्षण मिला। लेकिन अब गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
फरार आरोपियों पर इनाम घोषित करने की तैयारी के साथ बुलडोजर की मदद से करोड़ों की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी में है। समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में गैंगस्टर रवि काना का न केवल अवैध कारोबार बढ़ रहा था बल्कि उसके भाई दादूपुर के पूर्व प्रधान हरेंद्र नागर का राजनीतिक कद भी बढ़ रहा था।
सुंदर भाटी गिरोह के वर्चस्व वाले काले कारोबार में दखल और बढ़ते राजनीति कद के कारण ही हरेंद्र नागर की आठ फरवरी 2015 को हत्या की गई थी। इसके बाद उसने सफेदपोशों की मिलीभगत से राजनीतिक कद व काले कारोबार को लगातार बढ़ाने का प्रयास किया। रवि की अवैध कमाई से ही कई सफेदपोश फर्श से अर्श पर पहुंचे।
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सुंदर भाटी के खिलाफ केस लड़ने के कारण रवि नागर और उसके परिवार को बड़े स्तर पर सरकारी सुरक्षा मुहैया कराई गई। गौतमबुद्ध नगर में पुलिस कमिश्नरेट लागू होने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश के बावजूद पुलिस के हाथ रवि नागर के गिरोह तक नहीं पहुंचे। जबकि गिरोह के खिलाफ विभिन्न थानों में केस दर्ज होते रहे। गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई भी नहीं की गई।
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फरार आरोपियों पर इनाम घोषित करने की तैयारी के साथ बुलडोजर की मदद से करोड़ों की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी में है। समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में गैंगस्टर रवि काना का न केवल अवैध कारोबार बढ़ रहा था बल्कि उसके भाई दादूपुर के पूर्व प्रधान हरेंद्र नागर का राजनीतिक कद भी बढ़ रहा था।
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सुंदर भाटी गिरोह के वर्चस्व वाले काले कारोबार में दखल और बढ़ते राजनीति कद के कारण ही हरेंद्र नागर की आठ फरवरी 2015 को हत्या की गई थी। इसके बाद उसने सफेदपोशों की मिलीभगत से राजनीतिक कद व काले कारोबार को लगातार बढ़ाने का प्रयास किया। रवि की अवैध कमाई से ही कई सफेदपोश फर्श से अर्श पर पहुंचे।
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सुंदर भाटी के खिलाफ केस लड़ने के कारण रवि नागर और उसके परिवार को बड़े स्तर पर सरकारी सुरक्षा मुहैया कराई गई। गौतमबुद्ध नगर में पुलिस कमिश्नरेट लागू होने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश के बावजूद पुलिस के हाथ रवि नागर के गिरोह तक नहीं पहुंचे। जबकि गिरोह के खिलाफ विभिन्न थानों में केस दर्ज होते रहे। गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई भी नहीं की गई।
पुलिस की मौजूदगी में कब्जाए ठेके, पकड़े गए वाहन भी छोड़े
पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बावजूद गैंगस्टर रवि के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोपी ने कई बार कंपनियों के स्क्रैप के ठेके और सरिया के ट्रकों को पुलिस मौजूदगी में कब्जाया। इतना ही नहीं कई बार सूचना मिलने पर थाना स्तर पर कब्जाए गए ट्रकों को पकड़ा गया तो उन्हें पुलिस अफसर की कॉल आने पर छोड़ना पड़ा।
पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बावजूद गैंगस्टर रवि के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोपी ने कई बार कंपनियों के स्क्रैप के ठेके और सरिया के ट्रकों को पुलिस मौजूदगी में कब्जाया। इतना ही नहीं कई बार सूचना मिलने पर थाना स्तर पर कब्जाए गए ट्रकों को पकड़ा गया तो उन्हें पुलिस अफसर की कॉल आने पर छोड़ना पड़ा।
रवि काना के साथ सुरक्षा में मिले पुलिस कर्मियां का अमला चलता था। आरोपियों के आपराधिक व काले कारोबार में लिप्त होने के कारण ही पुलिस ने अब सरकारी सुरक्षा हटा ली है। हालांकि सोशल मीडिया पर चर्चा है कि गैंगस्टर रवि जब पुलिस सुरक्षा में था तो फरार कैसे हो गया।
सपा राज में भी गनर और भाजपा में भी
स्क्रैप माफिया रवि काना और इसके परिवार की तूती सपा राज में भी बोलती थी। उसकी हनक भाजपा राज में और बढ़ गई। रवि के बड़े भाई हरेंद्र नागर सपा के नेता थे। हरेंद्र की हत्या के बाद इसकी पत्नी बेबन नागर सपा से चुनाव भी लड़ चुकी है। अब बेबन और रवि भाजपा से जुड़े हुए हैं। सपा व भाजपा दोनों के शासनकाल में सुरक्षाकर्मी मिले हुए थे।
स्क्रैप माफिया रवि काना और इसके परिवार की तूती सपा राज में भी बोलती थी। उसकी हनक भाजपा राज में और बढ़ गई। रवि के बड़े भाई हरेंद्र नागर सपा के नेता थे। हरेंद्र की हत्या के बाद इसकी पत्नी बेबन नागर सपा से चुनाव भी लड़ चुकी है। अब बेबन और रवि भाजपा से जुड़े हुए हैं। सपा व भाजपा दोनों के शासनकाल में सुरक्षाकर्मी मिले हुए थे।
ढाई हजार करोड़ से अधिक का स्क्रैप कारोबार
नोएडा व ग्रेटर नोएडा में एक हजार से अधिक बड़ी कंपनियां हैं। यहां से सलाना हजारों करोड़ का स्क्रैप निकलता है। बताया जाता है कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सलाना ढाई हजार करोड़ से अधिक का स्क्रैप कारोबार है। इस कारोबार पर अभी रवि नागर का एकछत्र राज है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रवि नागर को किस कदर का संरक्षण प्राप्त है। हालांकि इस बार वह नोएडा कमिश्नरेट पुलिस के निशाने पर आ गया है।
नोएडा व ग्रेटर नोएडा में एक हजार से अधिक बड़ी कंपनियां हैं। यहां से सलाना हजारों करोड़ का स्क्रैप निकलता है। बताया जाता है कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सलाना ढाई हजार करोड़ से अधिक का स्क्रैप कारोबार है। इस कारोबार पर अभी रवि नागर का एकछत्र राज है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रवि नागर को किस कदर का संरक्षण प्राप्त है। हालांकि इस बार वह नोएडा कमिश्नरेट पुलिस के निशाने पर आ गया है।
गैंग के मददगारों पर नजर
स्क्रैप माफिया सरगना रवि काना गैंग की मदद करने वाले सफेदपोशों पर पुलिस की नजर है। रवि काना के लिए काम करने वाले और इससे लाभ प्राप्त करने वालों की जानकारी पुलिस इकट्ठा कर रही है। इसके बाद इनपर भी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस मामले में पुलिस के साथ साथ आयकर विभाग की टीम भी जांच कर रही है।
स्क्रैप माफिया सरगना रवि काना गैंग की मदद करने वाले सफेदपोशों पर पुलिस की नजर है। रवि काना के लिए काम करने वाले और इससे लाभ प्राप्त करने वालों की जानकारी पुलिस इकट्ठा कर रही है। इसके बाद इनपर भी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस मामले में पुलिस के साथ साथ आयकर विभाग की टीम भी जांच कर रही है।
राजनीतिक पार्टियों को ढाल बनाता रहा सरिया और स्क्रैप माफिया रवि
नोएडा सेक्टर-39 थाना इलाके में सामूहिक दुष्कर्म का आरोपी स्क्रैप-सरिया माफिया रविंद्र नागर उर्फ रवि राजनीतिक ढाल से खुद को कानून के शिकंजे से बचाता रहा था। पांच साल पहले पुलिस ने रंगदारी और सरिया चोरी के मामले में गिरफ्तार कर रवि को जेल भेजा था। पिछले साल भी रवि और राजकुमार के खिलाफ ईकोटेक-तीन और कासना थाने में रंगदारी का मुकदमा दर्ज हुआ था। इन दोनों मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। अब सामूहिक दुष्कर्म केस में पुलिस ने आरोपियों पर शिकंजा कस दिया है।